दिल्ली शंखनाद महोत्सव में भारत का प्राचीन इतिहास एवं देश की चुनौतियों के विषय में मान्यवरों के मौलिक विचार !

श्रीराम द्वारा स्थापित आदर्श अपने विद्यार्थियों को सिखाए जाने चाहिए ! – डॉ. वेदवीर आर्यजी, संयुक्त सचिव, रक्षा मंत्रालय

डॉ. वेदवीर आर्यजी

इतिहास राष्ट्र की नींव होता है । इतिहास के माध्यम से ही राष्ट्र की सुरक्षा और संवर्धन हो सकता है । सनातन राष्ट्र की संकल्पना इतिहास से ही उत्पन्न हुई है । इतिहास किसी भी राष्ट्र का व्यक्तित्व होता है । विश्व-निर्माण के कार्य में सनातन धर्म के संत-महात्माओं का बहुत बडा योगदान है; परंतु यह योगदान आज की पीढी को नहीं सिखाया जा रहा । आज इतिहास में विद्यार्थियों को वेद, रामायण, महाभारत व पुराण सिखाए जाने चाहिए । भारतीय इतिहास में भगवान श्रीराम का चरित्र अंतर्भूत किया जाना चाहिए और उनके द्वारा प्रस्थापित आदर्श विद्यार्थियों को पढाना आवश्यक है । कालक्रम पर आधारित इतिहास स्थापित करने से ही सनातन राष्ट्र का निर्माण संभव है । भारतीय परंपरा में ज्ञान, विज्ञान और दर्शन की साधना समाहित है । वेदों से लेकर महाभारत तक की जो भी घटनाएं हैं, वे खगोल विज्ञान पर आधारित हैं । हम अपने ग्रंथों और संस्कृति से दूर हो गए हैं । भारत ही विश्व की प्रथम संस्कृति का उद्गम स्थल है और इंडो-यूरोपियन संस्कृति का मूल स्थान भी भारत ही है ।


गैरहिन्दुओं की बढती जनसंख्या के विरुद्ध हिन्दू एकता द्वारा संघर्ष करना आवश्यक ! – प्रदीप भंडारीजी, प्रवक्ता, भाजपा

प्रदीप भंडारीजी

‘बांग्लादेशियों की घुसपैठ’ :

‘समस्या एवं उपाय’ विषय पर भाजपा प्रवक्ता श्री. प्रदीप भंडारीजी ने कहा कि

१. मुसलमान बहुल चुनावक्षेत्र में कभी भी हिन्दू प्रत्याशी चुनाव नहीं जीतता; परंतु हिन्दूबहुल चुनावक्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रत्याशी चुनाव जीतते हैं ।

२. कोई हिन्दूबहुल क्षेत्र मुसलमान बहुल क्षेत्र से घिरा हो, तो वहां के हिन्दुओं को अपने घर छोडकर पलायन करना पडता है तथा उसके कुछ ही दिन में वह क्षेत्र भी मुसलमान बहुल बन जाता है ।

३. वर्ष २०४० तक भारत के १०० जिले मुसलमान बहुल बन जाएंगे, जबकि ९० जिलों में हिन्दुओं की संख्या ७० से ६०% तक घटेगी । जब इस प्रकार किसी देश का जनसंख्या शास्त्र बदलता है, वहां का लोकतंत्र भी बदलता है । इसके समाधान हेतु चिंतन, मनन एवं प्रयास होने चाहिए । हिन्दू जिस प्रकार श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए लडे, वैसे ही संगठित लडाई लडनी पडेगी, तभी जाकर अगली सनातनी पीढियां, भारतीय लोकतंत्र, भारत की एकता एवं अखंडता बनी रहेगी ।