
देवद (पनवेल) – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के प्रति अटूट श्रद्धा रखनेवाली यहां के सनातन आश्रम की साधिका श्रीमती सुलभा मालखरेजी (आयु ८४ वर्ष) ७१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर सनातन संस्था के १३६वें व्यष्टि संतपद पर विराजमान हुईं । सनातन की संत पू. (श्रीमती) अश्विनी पवारजी ने एक अनौपचारिक कार्यक्रम में उपस्थित साधकों को यह शुभ समाचार दिया । इस शुभ समाचार से सभी साधकों का भाव जागृत हुआ ।
इस घोषणा के पश्चात पू. (श्रीमती) अश्विनी पवारजी ने पू. (श्रीमती) सुलभा मालखरेजी को माल्यार्पण कर तथा शॉल, श्रीफल एवं भेंटवस्तु प्रदान कर सम्मानित किया । साथ ही उन्होंने बताया कि मालखरेजी को ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त हुआ था, तब से वे प्रत्येक ४ – ५ महिने के उपरांत ‘मैं साधना के क्या प्रयास करूं ?’, ऐसा मुझसे पूछती थीं । उन्हें प्रयास के संदर्भ में बताने पर दादी उसी क्षण से प्रयत्नों को प्रारंभ कर ४ महिने के उपरांत उसका ब्योरा भी मुझे देती थीं । ऐसे प्रयास करना, यह खरा शिष्यत्व है । पू. मालखरेजी ने शिष्यभाव से साधना की, इसलिए वे संतपद पर पहुंची ।
पू. मालखरेजी ने उनके पूर्वजीवन के प्रसंग बताकर ‘उन्होंने उन प्रसंगों में किस प्रकार सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की कृपा का अनुभव किया ?’, वह भी सभी को बताया ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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