महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल का हिन्दू-द्वेषी एवं पक्षपाती कार्य
– श्री प्रीतम नाचणकर, सनातन प्रभात प्रतिनिधि, मुंबई

मुंबई, २७ अगस्त (वार्ता) – महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने हाल ही में संपन्न हुए विधानमंडल के वर्षा–अधिवेशन में वर्ष २०२३-२४ का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया । मुंबई में कहां प्रदूषण हुआ, यह भी इस प्रतिवेदन में उल्लिखित है । इसी अधिवेशन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई की १ सहस्र १४९ मस्जिदों पर लगे अवैध भोपू हटाए जाने की सूचना दी । हिन्दुओं के उत्सवों में होने वाले प्रदूषण पर प्रतिवेदन में विस्तृत उल्लेख करनेवाले प्रदूषण मंडल ने मुंबई में इतनी विशाल संख्या में लगे भोपू एवं उनसे होने वाले प्रदूषण का कही भी उल्लेख नहीं किया । इससे प्रदूषण नियंत्रण मंडल का पक्षपात स्पष्ट होता है ।

१. गंभीर विषय यह है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानमंडल के अधिवेशन में कहा कि, मुंबई के १ सहस्र ६०८ अवैध भोपू में से १ सहस्र १४९ अर्थात् कुल ७२.६९ प्रतिशत भोपू मस्जिदों पर अभी भी है ।
२. विशेष यह है कि वर्ष भर लगाए जानेवाले भोपू से होने वाले प्रदूषण की जानकारी प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने वार्षिक प्रतिवेदन में दी ही नहीं ; किन्तु वर्ष में केवल एक बार आनेवाले गणेशोत्सव एवं दीपावली उत्सवों में मुंबई में कहां-कहां प्रदूषण हुआ, यह अवश्य उल्लेखित किया है ।
३. केवल वर्ष २०२३-२४ के प्रतिवेदन में ही नहीं, अपितु अनेक वर्षों से ‘गणेशोत्सव एवं दीपावली उत्सव में कितना प्रदूषण होता है’, इसकी संख्याएं प्रदूषण नियंत्रण मंडल विशेष रूप से देता आया है ।
४. वर्ष २०२३-२४ के प्रतिवेदन की संख्याओं के अनुसार राज्य की २७ महानगरपालिकाओं के क्षेत्र में श्री गणेशोत्सव में १३२ तथा दीपावली में १५८ स्थलों पर ध्वनि निरीक्षण कर प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है ।
५. गणेशोत्सव में श्री गणेशमूर्ति विसर्जन शोभायात्रा में उल्लास के कारण तथा दीपावली में पटाखों के कारण ध्वनि–प्रदूषण हुआ, यह भी इस प्रतिवेदन में उल्लिखित है । प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा दी गई ये संख्याएं वस्तुनिष्ठ हैं ।
इस प्रकार की कार्रवार्ई प्रदूषण नियंत्रण मंडल का कर्तव्य ही है ; किन्तु यह वस्तुनिष्ठता एवं कर्तव्यनिष्ठा वर्ष भर ३६५ दिन चालू रहनेवाले मस्जिदों के भोपू पर न दिखाकर केवल हिन्दुओं के उत्सवों में ही दिखाना, यह पक्षपात है । महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की इस पक्षपाती कार्रवार्ई पर शासन को गंभीर ध्यान देना आवश्यक है, ऐसा जनता का कहना है ।
संपादकीय भूमिकाइस प्रकार की जांच कर उत्सवों के नाम पर होने वाले उपक्रमों को रोकना ही चाहिए ; किन्तु केवल हिन्दुओं के उत्सवों को लक्ष्य करना परन्तु वर्ष भर चालू रहने वाले मस्जिदों के भोंपू की अनदेखी करना, यह कैसी नीति ? प्रदूषण नियंत्रण मंडल को कार्रवार्ई निष्पक्ष रूप से करनी चाहिए, धर्म देखकर नहीं ! |
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