‘आधुनिक जीवनशैली के कारण उत्पन्न होनेवाली शारीरिक समस्याओं पर ‘व्यायाम’ एक प्रभावशाली उपाय है । प्राचीन ग्रंथों में दिए गए व्यायाम के सिद्धांत आज भी उतने ही उपयुक्त हैं तथा हम उससे प्रेरणा ले सकते हैं । इस लेखमाला से हम व्यायाम का महत्त्व, व्यायाम के विषय में शंकाओं का समाधान, ‘एर्गोनॉमिक्स’ का (Ergonomics) सिद्धांत तथा बीमारी के अनुसार उचित व्यायाम की जानकारी दे रहे हैं । व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की यह यात्रा प्रेरणादायक सिद्ध होगी । इस लेख में हम काम के कारण होनेवाली थकान में (बर्नआउट) व्यायाम क्यों आवश्यक आहे ?’, इस विषय में समझ लेते हैं ।


६. ‘बर्नआउट’ के लिए व्यायाम की आवश्यकता
अ. हम अपने काम अथवा सेवा से चाहे कितना भी प्रेम करते हों, तब भी शरीर एवं मन के शक्तिकेंद्रों को समय रहते भारित करना अति आवश्यक है । उस पर व्यायाम सबसे सरल एवं प्रभावी उपाय है ।
आ. साधकों की इतनी तीव्रता का ‘बर्नआउट’ होने तक कभी-कभार ही सेवा करनी पडती होगी; परंतु इसका अर्थ ‘उन्हें खतरा अल्प है’, ऐसा नहीं है । ‘बीच-बीच में सेवा बढने पर कालांतर में मन में उत्पन्न होनेवाली उदासीनता, अलिप्तता अथवा हतोत्साह ‘बर्नआउट’ की तीव्रता के सूक्ष्म लक्षण हैं’, इस बात को ध्यान में रखकर साधकों को गंभीरता से व्यायाम करना आवश्यक है ।

७. बर्नआउट हेतु व्यायाम करने से शरीर में होनेवाली प्रक्रिया
अ. शारीरिक गतिविधि से रक्ताभिसरण बढता है, मस्तिष्क को प्रचुर प्राणवायु मिलता है तथा ‘कॉर्टिसॉल’ का (शरीर में तनाव पर प्रतिक्रिया के रूप में तैयार हार्मोन का) स्तर अल्प होता है । उसके कारण मन शांत होता है ।
आ. ५ मिनट के पैदल चलने से भी ‘डोपामाइन’ एवं ‘नॉरएपिनेफ्रिन’ नामक तंत्रिका के रसायन (न्यूरोट्रांसमिटर) बढते हैं । ये दोनों रसायन ‘ध्यान केंद्रित करना, उत्साह एवं ऊर्जा बढाना’, इसके लिए सहायक होते हैं ।
इ. घंटों तक आसंदी में बैठने से गर्दन में पीडा होती है, पीठ को कष्ट होता है तथा शरीर थक जाता है । शारीरिक थकान तथा मानसिक थकान को बढने न देने का साधन है शरीर की गतिविधि !
८. ‘बर्नआउट’ हेतु आवश्यक व्यायाम
अ. दोपहर भोजन के उपरांत घर से बाहर निकलें । १० मिनट पैदल चलने की कृति भी मस्तिष्क को ‘रिसेट’ (यथास्थिति में लाना) करती है ।
आ. कार्यालय का काम समाप्त होने के तुरंत उपरांत दूरदर्शन अथवा चल-दूरभाष देखे बिना योगासन के हल्के प्रकार अथवा व्यायामशाला के कुछ प्रकार करें । इसके कारण मन के काम से संबंधित विचारों की शृंखला बंद होकर मस्तिष्क को विश्राम मिलेगा तथा परिणामस्वरूप शरीर को भी अच्छा विश्राम मिलेगा ।
इ. काम की व्यस्तता में व्यायाम को बहुत अल्प समय देकर भी आप व्यायाम का नियोजन कर सकते हैं, उदा. प्रत्येक ६० – ९० मिनट उपरांत २ से ५ मिनट शरीर की गतिविधि करें, कक्ष में चक्कर लगाएं, शरीर में थोडा खिंचाव लाएं अथवा सांस लेकर गर्दन घुमाएं ।
हम पूरे दिन थके अथवा भ्रमित हों, उस समय ‘आज व्यायाम टालेंगे’, ऐसा लगना स्वाभाविक है; परंतु इसके कारण ‘बर्नआउट’ का चक्र चलता ही रहता है । शरीर की गतिविधि कोई छूट नहीं है, अपितु काम और अच्छे ढंग के करने के लिए स्वयं को सुसज्जित करने का साधन है । काम की व्यस्तता के कारण थककर व्यायाम की अनदेखी करने की अपेक्षा उसे उपाय के रूप में अपनाने की ओर ध्यान दें ।’
– श्री. निमिष म्हात्रे, भौतिकोपचार विशेषज्ञ, फोंडा, गोवा. (२५.६.२०२५)
(समाप्त)
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