लेफ्टनंट कर्नल प्रसाद पुरोहित का न्यायालय में प्रस्तुत लिखित उत्तर गंभीर आरोपों से परिपूर्ण

मुम्बई – वर्ष २००८ में राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता शरद पवार ने एक वाहन रैली में ‘हिन्दू आतंकवाद’ शब्द का उच्चारण किया था । इसके ठीक एक मास उपरांत मालेगांव में बमविस्फोट की घटना घटी । उस समय मध्यप्रदेश के पंचमढ़ी मुख्यालय में कर्नल श्रीवास्तव ने मुझसे संपर्क कर मुझे वहां बुलाया । वहां मेरा भ्रमणभाष (मोबाइल फ़ोन) छीन लिया गया । मुझे भोपाल ले जाया गया । हवाईअड्डे (एयरपोर्ट) पर जाकर ज्ञात हुआ कि मेरा टिकट दिल्ली के स्थान पर मुम्बई का है । भ्रमणभाष न होने के कारण मैं अपने परिवारजनों को कुछ भी सूचित नहीं कर सका । कर्नल श्रीवास्तव आतंकवाद विरोधी दल के किसी दलाल (एजेंट) के समान व्यवहार कर रहे थे । मुझे जबरन चारपहिये वाहन में बैठाकर खंडाला स्थित एक बंगले में ले जाया गया । वहां पहले से ही तत्कालीन पुलिस अधिकारी परमबीर सिंह एवं हेमंत करकरे उपस्थित थे । इस प्रकार मेरी पीठ में छुरा घोंपा गया, ऐसा गंभीर आरोप मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण में निर्दोष सिद्ध हुए लेफ्टनंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने अपने न्यायालयीन उत्तर में किया है ।

शरद पवार द्वारा उच्चारित ‘हिन्दू आतंकवाद’ शब्द के संदर्भ में पूछे जाने पर अन्न व नागरी आपूर्ति मंत्री छगन भुजबळ ने कहा, ‘‘इस घटना को बीते लगभग २० वर्ष हो चुके हैं । मुझे अब यह स्मरण नहीं ।’’ (राजनीतिज्ञों को ऐसे असुविधाजनक प्रसंग प्रायः स्मरण नहीं रहते ! – संपादक)
परमबीर सिंह ने प्रतिक्रिया देना किया अस्वीकार !
‘‘साध्वी प्रज्ञासिंह द्वारा बताए गए आरोप भी अत्यंत गंभीर हैं । उनके संग की गई मारपीट में तत्कालीन पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे एवं परमबीर सिंह के नाम सम्मिलित थे’’, ऐसा कहते हुए एक समाचार वाहिनी द्वारा परमबीर सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया देने से स्पष्ट रूप से अस्वीकार किया । आरोपों में जिन रमेश कुलकर्णी का उल्लेख है, उन्होंने भ्रमणभाष उठाया नहीं, तथा सचिन कदम से संपर्क स्थापित नहीं हो सका ।
शरदचंद्र पवार गुट की नेता सुप्रिया सुळे ने कहा, ‘‘शरद पवार ने ‘हिन्दू आतंकवाद’ शब्द का प्रयोग किया हो, ऐसा मुझे स्मरण नहीं । इस प्रकार का कोई समाचार मैंने किसी माध्यम में नहीं पढ़ा ।’’ (षडयंत्र के कारण असत्य बोलनेवाली सुप्रिया सुळे ! – संपादक)
संपादकीय भूमिकाअब यदि इस पृष्ठभूमि पर किसी के मन में यह प्रश्न उठे कि ‘शरद पवार का मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण से कोई संबंध हो सकता है क्या ?’, तो उसमें अनुचित क्या है ? अतः अब सरकार को इस दृष्टिकोण से भी गहन जांच करनी चाहिए, ऐसा ही सामान्य जनमानस को प्रतीत हो रहा है । |
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