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मुंबई – जिस दिन मालेगांव में बमविस्फोट हुआ, उस दिन मैं मुंबई में था; किन्तु फिर भी मुझे इस प्रकरण में बंदी बनाकर पीटा गया तथा अपशब्द कहे गए । गत १७ वर्षों में हमारे परिवारजनों को अत्यधिक कष्ट सहन करना पडा । मेरी पुत्री के साथ बलात्कार करने की धमकियां दी गईं । आतंकवाद विरोधी दल के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे ने मुझे पट्टे से पीटा । मेरे वस्त्र उतरवाकर मेरी छाती पर पांव रखकर पीटा गया । पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे ने ही मुझे सबसे अधिक पीडा दी; परन्तु पृथ्वी गोल है । आतंकवादियों के आक्रमण में करकरे मारे गए, यह अत्यन्त भयानक स्थिति है – ऐसा मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण से निर्दोष मुक्त हुए मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त) ने एक समाचारवाहिनी को बताया ।
🚨 “The one who tortured me most during my arrest was Hemant Karkare” – Major Ramesh Upadhyay (Retd.)
He revealed Parambir Singh jumped on his chest, beat him with a belt & even threatened his daughter.
👮♂️ Karkare, then ATS chief, is no more; but this exposes how the Malegaon… pic.twitter.com/K820vwRPwj
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) August 1, 2025
वे कहने लगे…
१. मैंने जीवन में कभी मालेगांव की यात्रा नहीं की; फिर भी मुझे पीटकर प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत, प्रवीण तोगडिया, श्री श्री रविशंकर, योगी आदित्यनाथ जैसे महानुभावों के नाम लेने के लिए विवश किया गया; किन्तु मैंने अन्त तक उनका नाम नहीं लिया । ये सभी हमारे लिए पूज्य एवं महान व्यक्ति हैं । ‘यदि तुम उनके नाम नहीं लोगे, तो हम तुम्हें आरोपी बना देंगे’, ऐसा हेमंत करकरे बार-बार कहते रहते थे ।
२. सुशीलकुमार शिंदे एवं दिग्विजय सिंह ने जानबूझकर हमें बंदी बनाया ।
३. मेरी तीन बार नार्को जांच करवाई गई । न्यायालय को आरम्भ से ही ज्ञात था कि मैं निर्दोष हूं; फिर भी हमें सामाजिक एवं आर्थिक रूप से नष्ट करने का प्रयत्न किया गया । मैं एक सैन्याधिकारी हूं । ऐसी स्थिति में मैं बमविस्फोट क्यों करुंगा ?
४. ‘तेरे पुत्र को आतंकवादी घोषित कर देंगे’, ऐसी भी धमकियां दी गईं ।
५. एक दिन हमारे घर में घुसकर सारा सामान बाहर फेंक दिया गया था । उस समय भी कोई हमारी सहायता के लिए आगे नहीं आया ।
संपादकीय भूमिका
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