Malegaon Blast : बंदी बनाने के उपरान्त मुझे सर्वाधिक पीडा पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे द्वारा दी गई थी ! – मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त)

  • मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण

  • छाती पर पांव रखकर पट्टे से पीटने का करकरे पर आरोप

  • पुत्री के साथ बलात्कार करने की धमकियां भी मिलीं !

मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त)

मुंबई – जिस दिन मालेगांव में बमविस्फोट हुआ, उस दिन मैं मुंबई में था; किन्तु फिर भी मुझे इस प्रकरण में बंदी बनाकर पीटा गया तथा अपशब्द कहे गए । गत १७ वर्षों में हमारे परिवारजनों को अत्यधिक कष्ट सहन करना पडा । मेरी पुत्री के साथ बलात्कार करने की धमकियां दी गईं । आतंकवाद विरोधी दल के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे ने मुझे पट्टे से पीटा । मेरे वस्त्र उतरवाकर मेरी छाती पर पांव रखकर पीटा गया । पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे ने ही मुझे सबसे अधिक पीडा दी; परन्तु पृथ्वी गोल है । आतंकवादियों के आक्रमण में करकरे मारे गए, यह अत्यन्त भयानक स्थिति है – ऐसा मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण से निर्दोष मुक्त हुए मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त) ने एक समाचारवाहिनी को बताया ।

वे कहने लगे…

१. मैंने जीवन में कभी मालेगांव की यात्रा नहीं की; फिर भी मुझे पीटकर प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत, प्रवीण तोगडिया, श्री श्री रविशंकर, योगी आदित्यनाथ जैसे महानुभावों के नाम लेने के लिए विवश किया गया; किन्तु मैंने अन्त तक उनका नाम नहीं लिया । ये सभी हमारे लिए पूज्य एवं महान व्यक्ति हैं । ‘यदि तुम उनके नाम नहीं लोगे, तो हम तुम्हें आरोपी बना देंगे’, ऐसा हेमंत करकरे बार-बार कहते रहते थे ।

२. सुशीलकुमार शिंदे एवं दिग्विजय सिंह ने जानबूझकर हमें बंदी बनाया ।

३. मेरी तीन बार नार्को जांच करवाई गई । न्यायालय को आरम्भ से ही ज्ञात था कि मैं निर्दोष हूं; फिर भी हमें सामाजिक एवं आर्थिक रूप से नष्ट करने का प्रयत्न किया गया । मैं एक सैन्याधिकारी हूं । ऐसी स्थिति में मैं बमविस्फोट क्यों करुंगा ?

४. ‘तेरे पुत्र को आतंकवादी घोषित कर देंगे’, ऐसी भी धमकियां दी गईं ।

५. एक दिन हमारे घर में घुसकर सारा सामान बाहर फेंक दिया गया था । उस समय भी कोई हमारी सहायता के लिए आगे नहीं आया ।

संपादकीय भूमिका 

  • आतंकवाद विरोधी दल के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे अब इस संसार में नहीं हैं; किन्तु उन्होंने मालेगांव बमविस्फोट की जांच किस प्रकार से की, वह इस कथन से स्पष्ट होता है । यदि किसी हिन्दू को ‘आतंकवादी’ सिद्ध करने हेतु अन्वेषण तंत्र के वरिष्ठ अधिकारी ही ऐसे अमानुष कृत्य करें, तो यह अत्यन्त पीड़ादायक है !
  • मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण में कथित आरोपी निर्दोष सिद्ध होकर मुक्त हो गए; किन्तु उनके साथ अन्याय एवं अत्याचार करनेवाले पुलिस अधिकारी आज भी सार्वजनिक रूप से उन्मुक्त घूम रहे हैं । ऐसे अधिकारियों को दण्ड अवश्य मिलना चाहिए ।