
तेल अवीव (इजरायल) – इजरायल में २ दलों द्वारा सरकार से समर्थन वापस लेने के कारण प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार गिरने की आशंका व्यक्त की जा रही है । ‘युनायटेड तोराह ज्यूडाईम’ नामक दल ने १५ जुलाई को, एवं अति-रूढिवादी ‘शास’ दल ने १६ जुलाई को सरकार से समर्थन वापस ले लिया । ‘ऐसा होने पर भी, हम विभिन्न कानूनों को समर्थन देते रहेंगे’, ऐसा आश्वासन दोनों दलों ने दिया है । इससे वर्तमान मे तो सरकार संकट में नहीं है, परंतु सरकार पर अस्थिरता की तलवार स्थायी है ।
१२० सदस्यी इजरायली संसद में सरकार बनाने हेतु न्यूनतम ६१ सीटें आवश्यक हैं । दोनों दलों ने समर्थन वापस लेने से सत्तारूढ गठबंधन के पास केवल ५० सीटें बची हैं ।
समर्थन वापस लेने के पीछे कारण क्या ?
इस विवाद का मुख्य कारण इजरायल में धार्मिक विद्यार्थियों को अनिवार्य सैन्यसेवा से मिली छूट है । नेतन्याहू सरकार ने यह छूट सीमित करने हेतु एक विधेयक प्रस्तुत किया है । सरकार का समर्थन वापस लेनेवाले दोनों दलों का कहना है कि, धार्मिक विद्यार्थियों को सेना में भर्ती करने से उनकी धार्मिक जीवनशैली को संकट उत्पन्न होगा । दूसरी ओर अनेक इजरायली लोग विद्यार्थियों को दी गई यह छूट, अर्थात विशेषाधिकार होने का आरोप लगाकर उसका निषेध कर रहे हैं । इजरायल एवं हमास के मध्य युद्ध में अब तक ८८८ इजरायली सैनिक मारे गए हैं, अतः इस कानून को पारित करने की आग्रहपूर्ण मांग हो रही है ।
धार्मिक विद्यार्थियों की हठधर्मी भूमिका !
इस विधेयक के विरुद्ध आंदोलन करनेवाले रूढिवादी धार्मिक विद्यार्थियों का कहना है कि, वे कारागृह में जाने हेतु तत्पर हैं; परंतु सेना में सम्मिलित होना नहीं चाहते ।
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