‘आधुनिक प्रौद्योगिकी ने भले ही हमारा जीवन सुलभ बना दिया हो; परंतु उसके कारण शरीर की गतिविधि अल्प हो गई हैं । पूरा दिन बैठकर काम करने के कारण उत्पन्न ‘बैठी जीवनशैली’ स्वास्थ्य की अनेक समस्याओं को जन्म देती है । इन समस्याओं को दूर करने के लिए तथा स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिए ‘व्यायाम’ सबसे प्रभावी उपाय है । इस लेखमाला में हम ‘बैठी जीवनशैली’ के हमारे स्वास्थ्य पर होनेवाले शारीरिक एवं मानसिक दुष्परिणाम, उसके कारण तथा दुष्परिणाम टालने हेतु उपाय’ इत्यादि सूत्र समझ लेंगे । प्रस्तुत लेख में हम ‘बैठी जीवनशैली’ के छोटे बच्चों पर होनेवाले दुष्परिणाम तथा उन पर उपाय देखेंगे ।

१. मैदानी खेलों के कारण पहले के बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक संतुलन अच्छा होना
बदलती जीवनशैली के (लाइफस्टाइल के) दुष्परिणाम बडे व्यक्तियों सहित बच्चों पर भी दिखाई दे रहे हैं । पहले बच्चे विद्यालय छूटने के उपरांत मैदान में खेलते थे, दौडते थे अथवा पेड पर चढते थे । मैदानी खेलों के कारण उनकी मांसपेशियां तथा हड्डियां सशक्त होती थीं । उनका शरीर स्वस्थ एवं सक्षम होता था । उस समय के बच्चे ‘घर के काम में बडों की सहायता करना, साइकिल से घूमना’ जैसे शरीर को व्यायाम देनेवाली कृतियां करते थे । उन्हें ‘देर रात तक टी.वी. देखना अथवा रात को विलंब से सोना’ जैसी आदतें नहीं थी । उन्हें प्राकृतिक प्रकाश में खेलने तथा समय पर सोने की आदत थी । उस समय बच्चों के पढाई के साथ शारीरिक परिश्रम भी होते थे । उसके कारण उनका शारीरिक एवं मानसिक संतुलन अच्छा बना रहता था ।

२. चल-दूरभाष एवं संगणक के कारण आज के बच्चों की शारीरिक गतिविधियां अल्प होने से उन पर हो रहे दुष्परिणाम !
वर्तमान समय में चल-दूरभाष, संगणक एवं टी.वी. के कारण बच्चों का खेलना अल्प हो गया है । उसके कारण बच्चों की प्राकृतिक शारीरिक गतिविधियां धीमी हो गई हैं । उन्हें पढाई, ट्यूशन तथा घर का अध्ययन, यह सब बैठकर ही करना पडता है । उसके कारण बच्चों की मांसपेशियों का उचित विकास नहीं होता । उसके कारण बच्चों को बचपन से ही चल-दूरभाष की आदत लगती है । इसके कारण ‘बच्चों की गर्दन आगे की ओर झुकी होना, पीठ में टेढापन आना, छोटी आयु में ही उपनेत्र (चश्मा) लगना, मोटापा बढना’ जैसी समस्याएं बढ रही हैं । उनकी नींद का चक्र बिगड गया है । देर रात तक चल-दूरभाष (मोबाइल) के उपयोग के कारण उनके मस्तिष्क को पर्याप्त विश्राम नहीं मिलता । उसके कारण बच्चों में चिडचिडाहट तथा आलस बढता है । खेलों के स्थान पर ‘वीडियो गेम’ तथा सामाजिक प्रसारमाध्यमों के कारण उनकी शारीरिक गतिविधि लगभग रुक-सी गई है । उसके कारण बच्चों पर ‘पढाई में ध्यान न लगना, आलस बढना’ आदि दुष्परिणाम होते दिखाई देते हैं ।

३. बच्चों का चल-दूरभाष तथा टी.वी. देखना बंद कर उन्हें ‘खेल खेलने तथा व्यायाम करने’ के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक
बच्चों पर होनेवाले दुष्परिणाम टालने हेतु उन्हें ‘खेल खेलना, तैरना, साइकिल चलाना’ जैसे व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है । बच्चों की चल-दूरभाष तथा टी.वी. देखने की आदतों पर मर्यादा लाई जानी चाहिए । उनकी शारीरिक गतिविधि बढे; इसके लिए उन्हें घर के कामों में सहभागी कर लेना महत्त्वपूर्ण है । अभिभावक स्वयं भी चल-दूरभाष का अनावश्यक उपयोग टालें तथा बच्चों के सामने आदर्श स्थापित करें ।’
– श्रीमती अक्षता रूपेश रेडकर (भौतिकोपचार विशेषज्ञ (फिजियोथेरपिस्ट)), फोंडा, गोवा. (१३.४.२०२५)
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