हिन्दू विधिज्ञ परिषद की राज्य सरकार से शिकायत !

मुंबई – वक्फ बोर्ड के पास पंजीकृति वक्फ की इमारतों पर किए हुए अतिक्रमण हटाने के लिए सरकारी तंत्र का उपयोग करने का अधिकार तत्कालिन कांग्रेस सरकार ने दिया था । उसके लिए वर्ष २००८ में कांग्रेस ने ‘महाराष्ट्र सरकारी इमारतें (उदकासन) कानून (महाराष्ट्र गवर्मेट प्रियाइसेस (इविशन) एक्ट १९५६) कानून में संशोधन किया । वक्फ बोर्ड सरकारी तंत्र का उपयोग कर सके; परंतु इसलिए इस कानून में भी संशोधन करनेवाले कांग्रेस ने मंदिरों को यह लाभ नहीं दिया । मुसलमानों के धार्मिक स्थलों के प्रति लाड-प्यार; परंतु मंदिरों के लिए उल्टा न्याय की यह भूमिका संविधानविरोधी है । एक तो वक्फ बोर्ड की भांति सरकारी तंत्र के उपयोग की अनुमति हो, अन्यथा वक्फ बोर्ड को दिया जानेवाला यह विशेष लाभ बंद किया जाए, इस आशय का पत्र हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने राज्य सरकार को लिखा है तथा इस पर कार्यवाही करने की मांग की है ।
⚖️ Waqf Gets Govt Machinery, Temples Left in the Cold? 🚫🛕
📢 “Special treatment to Waqf is unconstitutional!” – Adv. Virendra Ichalkaranjikar @ssvirendra, Hindu Vidhidnya Parishad (HVP)
📝 In 2008, the Congress government gave the Waqf Board the power to use government… pic.twitter.com/5ZXtGDWrob
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) June 28, 2025
इस पत्र में हिन्दू विधिज्ञ परिषद द्वारा उठाए गए प्रश्न !
१. मंदिर एवं वक्फ ये दोनों धार्मिक स्थल होते हुए भी केवल वक्फ बोर्ड के लिए सरकारी तंत्र का तामझाम होता है, जबकि मंदिरों के लिए न्यासियों को न्यायालय के चक्कर लगाने पडते हैं ।
२. सरकारी इमारतें अथवा भूमि में कोई भी यदि अवैधरूप से रह रहा हो, तो उसे वहां से निकाल देने के लिए तथा उससे उस भूमि का किराया अथवा तत्सम खर्चा वसूल करने के लिए कांग्रेस सरकार ने कानून बनाया । वक्फ बोर्ड मानो सरकार का जमाई होने की भांति कांग्रेस सरकार ने केवल वक्फ बोर्ड को भी यह छूट दी ।
३. इसका अर्थ यह है कि यदि वक्फ बोर्ड की भूमि पर अतिक्रमण हुआ हो, तो उसे हटाने के लिए न्यायालय जाने की आवश्यकता नहीं है, अपितु सरकारी तंत्र को उस अतिक्रमण हटाने के लिए कदम उठाने हैं । इसके विपरीत मंदिरों के संबंध में ऐसा हुआ हो, तो उन्हें दिवानी न्यायालय जाना पडेगा ।
४. वक्फ को उसकी स्वयं की संपत्ति अन्य किसी काम के लिए उपयोग में लानी हो, तो उसके लिए उसे दिवानी न्यायालय जाने की आवश्यकता नहीं है, अपितु उन्हें केवल सरकार से शिकायत करनी है । सरकार उस शिकायत पर कार्यवाही करती है तथा यदि वह भूमि अथवा इमारत खाली कर उसे वक्फ बोर्ड को वापस दिला देती है । वक्फ बोर्ड का कोई किराया लंबित हो, तो उसे भी राजस्व की वसूली की भांति वसूल कर दी जाएगी, ऐसा इस कानून में प्रावधान है ।
#वक्फ बोर्डाचे लाड अजून किती करणार?#Waqf
https://t.co/YykRjXv3NA via @YouTube— Ichalkaranjikar V.S. (@ssvirendra) March 21, 2025
५. धर्मादाय आयुक्त के पास पंजीकृत मंदिरों की भूमि पर यदि किसी ने अतिक्रमण किया, तो मंदिरों के न्यासियों को उनकी भूमि वापस प्राप्त करने हेतु सरकार के पास नहीं, अपितु न्यायालय जाना पडता है । तो वक्फ एवं मंदिरों के लिए यह अलग नियम क्यों ? वक्फ की भांति मंदिरों को भी यह लाभ क्यों नहीं मिलता ? एक तो इस कानून के अनुच्छेद २ में वक्फ की भांति ही मंदिरों की भूमि तथा इमारतों का समावेश किया जाए अथवा वक्फ बोर्ड को इससे हटाया जाए ।
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