विश्व शांति के निर्माण के लिए एक आध्यात्मिक नेतृत्व !
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित आध्यात्मिक गुरु हैं तपोभूमि, कुंडई (गोवा) के पद्मश्री सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामी ! सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामी का जन्म गोवा के सिरकेम में १२ मार्च १९८१ को हुआ था । उन्हें बचपन से ही ध्यान एवं अध्यात्म में रुचि थी । ७ वर्ष की आयु से ही वे संगीत वाद्य यंत्र बजाना, भगवद्गीता पढना तथा उसका पाठ आदि सहजता से करते थे । विद्यालय में रहते हुए वे तपस्या की ओर आकर्षित हुए एवं ‘ध्यान’, ‘साधना’ तथा ‘तपस्या’ को जीवन की आकांक्षा मानते थे । अंततः उन्होंने घर छोड दिया और कठोर आध्यात्मिक मार्गों का अध्ययन एवं अभ्यास करने के लिए समर्पित तपस्वी जीवन स्वीकार किया । आगे ‘दत्त पद्मनाभ संप्रदाय’ के तत्कालीन पीठाधीश सद्गुरु ब्रह्मानंदाचार्य स्वामी से उनकी भेंट हुई । उनके मार्गदर्शन में सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामी ने साधना आरंभ की । २१ वर्ष की आयु में सद्गुरु ब्रह्मानंदाचार्य स्वामी ने ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामी को ‘पद्मनाभ शिष्य संप्रदाय’ के ५ वें ‘पीठाधीश’ के रूप में घोषित किया । सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामी विश्वबंधुत्व के लिए सामान्य जन की शांति का नेतृत्व करते हैं । वे सुदृढ एकता और सामंजस्य के अग्रदूत हैं, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक नेता, वक्ता और समाज सुधारक भी हैं । वे अंतर्राष्ट्रीय वक्ता के साथ आध्यात्मिक व्याख्याता भी हैं । सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्यजी विश्व शांति और सामंजस्य के माध्यम से संसार को एक साथ लाने के लिए पूरे विश्व में कार्य करनेवाले ‘इंटरनेशनल सद्गुरु फाउंडेशन’ के प्रमुख संस्थापक हैं । वर्तमान में वे सहस्त्रों वर्षों की अमर गुरु-शिष्य परंपरा के ‘श्री दत्त पद्मनाभ पीठ, गोवा’ (भारत) संस्था के पीठाधीश हैं ।

विशेष लेखमाला

छत्रपति शिवाजी महाराज के हिन्दवी मावले तथा सैनिकों का त्याग सर्वोच्च है, ठीक वैसे ही आज भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ और राष्ट्रप्रेमी नागरिक धर्म-राष्ट्र की रक्षा के लिए ‘सैनिक’ के रूप मे कार्य कर रहे है । उनकी और उनके हिन्दू धर्म-रक्षण के संघर्ष की जानकारी देने वाले ‘हिन्दुत्व के वीर योद्धा’ इस लेखमाल के द्वारा दूसरो को भी प्रेरणा मिलेगी। इन उदाहरणो से अपने मन की चिँता दूर हो कर उत्साह उत्पन्न होगा ! – सँपादक
१. विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के ‘मानद निदेशक’
सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामी संयुक्त अरब अमीरात (सीनियर) स्थित ‘एशियन अरब चैंबर ऑफ कॉमर्स’ संस्था के ‘मानद निदेशक’ हैं । वर्ष २०१८ में चीन में हुए ‘एस.एम.ई. सम्मेलन’ की विशेषज्ञ परामर्शदाता समिति के वे ‘समुपदेशक’ हैं । रोम (इटली) स्थित ‘सूर्य-चंद्र योगाश्रम’ के ‘मानद अध्यक्ष’ हैं, साथ ही ‘ग्लोबल योग अलायंस, दुबई’ स्थित ‘यूथ चैंबर्स ऑफ कॉमर्स’, ‘वर्ल्ड पीस डेवलपमेंट एंड रिसर्च फाउंडेशन’, ‘इंटरनेशनल फिल्म एंड टेलीविजन क्लब’ के संरक्षक हैं ।

२. विभिन्न संस्थाओं के प्रमुख संस्थापक
सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य ‘सद्गुरु फाउंडेशन’, ‘सद्गुरु ज्ञानदीप’, ‘सद्गुरु योग गुरुकुलम’, ‘गोवा संस्कृत अकादमी’, ‘दी लीगल हिन्दू फोरम’, ‘सद्गुरु यूथ फेडरेशन’, ‘जातवेद कम्युनिकेशन्स प्राइवेट लिमिटेड’, ‘इंटरनेशनल सद्गुरु फाउंडेशन’, ‘इंटरनेशनल सद्गुरु गुरुकुलम’, ‘स्वामी ब्रह्मानंद वैदिक गुरुकुल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट’, ‘स्वामी ब्रह्मेशानंद संस्कृत प्रबोधिनी’ एवं ‘प.पू. पद्मनाभ शिष्य संप्रदाय ट्रस्ट’ के प्रमुख संस्थापक हैं ।
३. विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में उद्बोधन
सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य शाश्वत जीवन के लिए विभिन्न संस्थाओं के प्रशासक और मार्गदर्शक हैं । वैश्विक स्तर पर उद्यमिता और विश्व के व्यापारिक संगठनों के लिए वे परामर्शदाता एवं व्याख्याता हैं । वे मनोरंजन, अनुसंधान, विश्व शांति, योग, एकता तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शांति वार्ताओं के सभी क्षेत्रों में कार्यरत बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति हैं । सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य द्वारा किए गए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रयासों से सिंगापुर, लंदन, थाईलैंड, श्रीलंका, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, चीन में कार्यक्रम, साथ ही दुबई, इटली, रोम में ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ (संपूर्ण पृथ्वी परिवार है ।) जैसे अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन हुआ है । अंतर-धार्मिक शांति सम्मेलनों के लिए उन्हें ‘शांतिदूत’ के रूप में, साथ ही ‘सम्माननीय अतिथि’ के रूप में बुलाया गया है । श्रीलंका के कोलंबो स्थित हिन्दू-बौद्ध धार्मिक सभा में उन्होंने शांति संबंधी ‘निमंत्रक पद’ संभाला । वे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं एवं पूरे विश्व में ‘भारत की आध्यात्मिक, प्राचीन श्रेष्ठ सांस्कृतिक परंपरा की गूंज पहुंचाना’ उनका स्वप्न है । उन्होंने अपना पूरा जीवन ‘वसुधैव कुटुंबकम्’, अर्थात संपूर्ण संसार को एक परिवार में लाने के लिए समर्पित किया है ।

४. देश-विदेश से प्राप्त विभिन्न पुरस्कार
सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य एक दिव्य व्यक्तित्व हैं तथा उनका तेज वैश्विक शांति के लिए प्रतिबद्ध है । वे भारतीय आचार एवं सांस्कृतिक धरोहर की सबसे मूल्यवान संपदाओं से परिपूर्ण हैं । अमेरिका, इंग्लैंड, चीन, श्रीलंका, इटली, रोम, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी और भारत, इन सभी देशों में ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ संकल्पना को प्रोत्साहन दे रहे हैं । उनके प्रशंसनीय कार्य के लिए सभी देशों ने उन्हें विभिन्न उपाधियों एवं पुरस्कारों से सम्मानित किया है ।
अ. वे परिपूर्ण शिक्षाविद, योगगुरु, संस्कृत भाषा के विद्वान, सामाजिक नेता, मानवतावादी, परोपकारी एवं वैदिक अनुसंधानकर्ता हैं । भारत के सभी संतों की संस्थाओं एवं प्रमुख शंकराचार्यों, महामंडलेश्वरों तथा भारत के सभी संतों ने उनके पवित्र कार्य का संज्ञान लेकर उन्हें ‘धर्मभूषण’ की दिव्य पदवी प्रदान की है ।
आ. उनके मानवतावादी कार्य का संज्ञान लेते हुए ब्रिटेन के ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ के सांसद श्री बॉब ब्लैकमैन द्वारा ब्रिटिश संसद में उन्हें ‘एम्बेसडर ऑफ पीस’ (शांति के दूत) का पुरस्कार दिया गया ।
इ. संयुक्त अरब अमीरात स्थित ‘एशियन चैंबर ऑफ कॉमर्स’ द्वारा दिया गया ‘स्पिरिचुअल एक्सीलेंस’ पुरस्कार ।
ई. अमेरिका के ‘वर्ल्ड योग कम्युनिटी’ द्वारा ‘इंटरफेथ लीडरशिप’ पुरस्कार ।
उ. न्यूयॉर्क स्थित ‘लोटस ऑफ वर्ल्ड पीस’ संस्था द्वारा ‘विश्व शांति पद्मम’ पुरस्कार ।
ऊ. श्रीलंका की महाबोधिनी सोसाइटी द्वारा ‘इंटरनेशनल पीस प्रमोटर’ पुरस्कार के साथ ही उन्हें अनेक पुरस्कार प्रदान किए गए हैं ।
परिवार व्यवस्था, धर्मसंस्था एवं शिक्षाप्रणाली को साम्यवाद से संकट !
अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास का महत्त्व !
Bhojshala : ७०० वर्षों के उपरांत शुक्रवार को भोजशाला में नमाज नहीं, अपितु हिन्दुओं ने की अखंड पूजा ।
संतों के जन्मदिन पर ही भारत तथा बंगाल स्वतंत्र होने का एक दैवी संकेत ।
Bhojshala : भोजशाला में हिन्दुओं द्वारा पूजा-अर्चना प्रारंभ !
हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से अमृता विश्वविद्यापीठम् के निदेशक डॉ. यु. कृष्णकुमार से सद्भावना भेंट !