वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव का चौथा दिन (२७ जून)

विद्याधिराज सभागार – विश्व अनादि है तथा ईश्वर ही इस विश्व के नियंता हैं । इस विश्व का कार्य वेदों के अनुसार चलता है । अन्याय करनेवाले को नरकयातनाएं भोगनी पडती हैं, जबकि अच्छा आचरण करनेवाले को अच्छा फल मिलता है, इस प्रकार विश्व की व्यवस्ता है । जो भगवान को नहीं मानते, वे इस पर विश्वास नहीं करते । धर्म समझ लेने हेतु भगवान ने वेदों की निर्मिति की । सोना पुराना भी हुआ, तब भी उसका मूल्य न्यून नहीं होता । उसी प्रकार वेद भले ही प्राचीन हों; परंतु उनमें विद्यमान ज्ञान कालबाह्य नहीं होता । भगवान के पास असीम ज्ञान है । सत्ययुग में भी अग्नि में लकडी डालने पर वह जलती थी तथा कलियुग में भी जलती है । उस प्रकार वेदों का ज्ञान शाश्वत है, यह बतानेवाले मनु पृथ्वी के पहले व्यक्ति थे । मनु राजा थे । जब पाश्चात्त्यों को कपडे पहनने का भी ज्ञान नहीं था, उस समय मनु ने ‘मनुस्मृति’ लिखी । ऐसा ज्ञान देनेवाले मनु को मैं पूजनीय मानता हूं । अनेक देशों ने कानून बनाने हेतु मनुस्मृति का संदर्भ लिया । अतः ‘मनुस्मृति’, ‘वेद’ तथा अन्य धर्मग्रंथों का अन्याय सहन न करें, ऐसा आवाहन भारताचार्य पू. प्रा. सु.ग. शेवडेजी ने ‘मनुस्मृति’ पर होनेवाली राजनीति कैसे रोकी जाए ?’, इस विषय पर मार्गदर्शन करते हुए किया ।
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‘एन.सी.ई.आर.टी.’ की पाठ्यपुस्तक में मराठा साम्राज्य का इतिहास पुनः सम्मिलित करने के लिए केंद्र सरकार से विचार विमर्श निरंतर हो रहा – दादा भुसे, स्कूली शिक्षा मंत्री आवश्यक सामग्री केंद्र शासन को प्रस्तुत ।
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