यह मस्जिद पहले मंदिर होने का दर्शानेवाले मिले प्रमाण ! – सूत्रों की जानकारी

संभल (उत्तर प्रदेश) – संभल न्यायालय के आयुक्त रमेश सिंह राघव ने यहां की शाही जामा मस्जिद की संरचना के सर्वेक्षण का ब्योरा सीलबंद लिफाफे में चंदौसी न्यायालय में दिवानी न्यायाधीश (वरिष्ठ विभाग) आदित्य सिंह को प्रस्तुत किया है । सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के उपरांत यह बंद लिफाफा खोला जाएगा । यह ब्योरा ४५ पृष्ठों का है । सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस वास्तु की भूमि पर पहले मंदिर होने के ठोस प्रमाण हैं ।
सर्वेक्षण ब्योरे में अनुमानित साढेचार घंटे के चित्रीकरण का, साथ ही छायाचित्रों का समावेश है । इसमें लगभग १ सहस्र २०० छायाचित्र खींचे गए । सर्वेक्षण के पहले दिन अर्थात १९ नवंबर २०२४ को लगभग डेढ घंटे का चित्रीकरण किया गया, साथ ही छायाचित्र भी खींचे गए ।
मस्जिद में क्या मिला ?१. प्राप्त जानकारी के अनुसार इस ब्योरे में कहा गया है कि इस मस्जिद के परिसर में २ वटवृक्ष हैं, जो सामान्यतः हिन्दू मंदिरों से संबंधित होते हैं तथा वहां उनकी पूजा होती है । २. यहां एक कुआं भी है, जिसका एक भाग मस्जिद परिसर के अंदर है तथा दूसरा बाहर है । कुएं का बाहरी भाग ढंका हुआ था । ३. जामा मस्जिद के अंदर ५०० से अधिक फूलों के रेखाचित्र तथा शिल्प मिले, साथ ही मूल रचना में नया निर्माणकार्य किया गया है, ऐसा देखने को मिला । ४. मंदिर की दीवारों, खिडकियों तथा विभिन्न प्रकार से सजावट की गई दीवारों पर लगभग ५० कलाकृतियां मिली हैं । इन कलाकृतियों को ढंकने के लिए उस पर प्लास्टर तथा रंग लगाकर मंदिर की मूल वास्तुकला को छिपाया गया है । ५. गुंबज के मध्य में घंटा टांगने हेतु उपयोग की जानेवाली लोहे की शृंखला भी मिली है । वर्तमान में उस पर झूमर टांगा गया है । इस प्रकार की शृंखला का उपयोग सामान्यतः मंदिर में घंटा लटकाने के लिए अथवा शिवलिंग पर २४ घंटे जलाभिषेक करने हेतु बरतन लटकाने के लिए होता है । ६. गुंबज का कुछ भाग सपाट होने का भी ब्योरे में कहा गया है । |
संभल की शाही जामा मस्जिद अर्थात पूर्व का श्री हरिहर मंदिर
संभल के कोट गरवी में स्थित शाही जामा मस्जिद मुघलकालीन है । वह संभल जिले की सबसे पुरानी वास्तुओं में से एक है । बाबर के निर्देश पर नेता मीर बेग नाम के सरदार ने वर्ष १५२९ में उसका निर्माण किया गया था । हिन्दुओं का श्री हरिहर मंदिर गिराकर वहां मस्जिद बनाई गई है, ऐसा हिन्दू पक्ष का दावा है । इस विषय में न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की गई है । न्यायालय के आदेश पर यहां सर्वेक्षण किया गया ।
सर्वेक्षण के समय धर्मांध मुसलमानों ने की थी हिंसा
न्यायालय के आदेश के उपरांत १९ नवंबर २०२४ को जब सर्वेक्षण दल मस्जिद में गया था, उस समय बाहर धर्मांधों की भीड ने सर्वेक्षण का विरोध करना आरंभ किया । उसके कारण घंटेभर में सर्वेक्षण दल को वहां से बाहर जाना पडा । उसके उपरांत २४ नवंबर के सवेरे ही यह दल मस्जिचद में सर्वेक्षण के लिए पहुंचा, उस समय धर्मांध मुसलमानों ने बाहर हिंसा आरंभ की । इसमें ५ मुसलमानों की मृत्यु हुई । पुलिस ने इस हिंसा के प्रकरण में अब तक ५० लोगों को बंदी बनाया है, साथ ही अन्य ९० लोगों की खोज जारी है ।
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