ऐतिहासिक वज्रेश्वरी मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी के रूप में एक ईसाई की नियुक्ति का प्रकरण !

ठाणे – प्राचीन हिन्दू परंपरा के विरासत स्थल भिवंडी के ऐतिहासिक वज्रेश्वरी मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी के रूप में एक ईसाई, फ्रांसिस जोसेफ लेमोस की नियुक्ति के कारण समस्त हिन्दू समर्थक संगठनों ने तीव्र संताप व्यक्त किया है । इसको लेकर शंभुदुर्ग प्रतिष्ठान ने चेतावनी भी दी थी। हिन्दूत्वनिष्ट जनों के बीच तीव्र प्रतिक्रिया उभरने के कारण, मंदिर के अध्यक्ष अधिवक्ता पाटकर ने फ्रांसिस को पद से हटाने का आवाहन किया था किन्तु उसके पूर्व ही फ्रांसिस ने अपना त्यागपत्र दे दिया है ।
१. शंभुदुर्ग प्रतिष्ठान के कार्यकर्ताओं ने १६ अप्रैल को वज्रेश्वरी मंदिर जाकर फ्रांसिस की नियुक्ति निरस्त करने के लिए निवेदन दिया था। तदनंतर फ्रांसिस ने धर्मस्थल के अध्यक्ष को अपना त्यागपत्र सौंपा ।
२. शंभूदुर्ग प्रतिष्ठान द्वारा फ्रांसिस जोसेफ लेमोस की भूमिका का स्वागत किया गया है ।
३. ठाणे जिले में ईसाई मिशनरियों ने आदिवासी बस्तियों में पूजा स्थल स्थापित करके लोगों से संपर्क बढाया है । ऐसा पाया गया है कि जो हिन्दू बंधु इनके संपर्क में आते हैं, समय के साथ हिन्दू धर्म से उनकी निष्ठा समाप्त हो जाती है, फलस्वरूप कुछ लोग तो हिन्दू धर्म का त्याग भी कर देते हैं ।
४. ‘अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन, ईसाई मिशनरियों द्वारा हिन्दुओं का धर्मान्तरण रोकने का प्रयास कर रहे हैं । ऎसा होते हुए यह प्रकरण वज्रेश्वरी मंदिर के पर्यवेक्षक के रूप में एक ईसाई का चयन करना हिन्दू धर्म के ऊपर एक और संकट लादने जैसा है’, शंभुदुर्ग प्रतिष्ठान ने वज्रेश्वरी देवस्थान को लिखे अपने एक पत्र में यह व्यक्त किया था ।
५. इस प्रकरण में ‘हिन्दू राष्ट्र सेना’ के कार्यकर्ताओं ने आंदोलन करने की चेतावनी भी दी थी । इसके उपरांत पुलिस ने हिन्दुओं पर अवांछित दबाव बनाने का प्रयत्न किया । फ्रांसिस जोसेफ लेमोस के त्यागपत्र ने विवाद को समाप्त कर दिया है ।
संपादकीय भूमिकाधर्म की हानि के विरुद्ध अनवरत संघर्ष करने वाले शंभुदुर्ग प्रतिष्ठान के उदाहरण का अनुकरण सभी हिन्दू संगठनों को करना चाहिए ! |
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