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तिरुवनंतपुरम (केरल) – केरल उच्च न्यायालय ने १ अप्रैल २००८ को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता विष्णु की हत्या के प्रकरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) के १३ स्वयंसेवकों को आरोप मुक्त कर दिया। सत्र न्यायालय ने २०१६ में आरोपियों को आजीवन कारावास का दंड सुनाया था, जिसे उन्होंने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी ।
2008 में विष्णु की हत्या, 2016 में RSS के 13 कार्यकर्ता को गुनाहगार बता सुनाई सजा: 2022 में केरल हाई कोर्ट में पूरी कहानी ही निकली फर्जी, सारे बरी#KeralaHC #RSShttps://t.co/SPG50qcuwJ
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) July 13, 2022
जांच अधिकारियों ने घटनाक्रम को कहानी के अनुसार बनाकर साक्ष्य व साक्षीदार जुटाए !
न्यायालय ने कहा कि यह पूरा प्रकरण राजनीतिक विद्वेष व बदले का उदाहरण है । प्रकरण के आरोपियों को बिना साक्ष्य के बंदी बनाया गया और साक्ष्यों को सिखाया गया कि साक्ष्य देते समय क्या कहना है । यह प्रकरण को एक अलग दिशा में ले जाने का प्रयास था । हत्या के समय हत्यारों के चेहरे ढके हुए थे किन्तु अन्वेषण अधिकारियों ने इस संबंध में न्यायालय को सूचित नहीं किया । उन्होंने घटना को एक कहानी की तरह प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया एवं तदनुसार साक्ष्य जुटाए । (जन सामान्य को लगता है कि न्यायालय ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का आदेश दे ! गत १४ वर्षों में निर्दोषों ने जो कुछ भी भोगा है, उसकी हानि भरपाई की जानी चाहिए । इस संबंध में केंद्र सरकार को अब कानून बनाना चाहिए ! – संपादक )
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