हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के लिए यज्ञ समारोह एवं समष्टि धर्मप्रसार !

यज्ञसंस्कृति को पुनर्जीवित करनेवाले गुरुदेवजी को नमन !

विशेषतापूर्ण प्रसारफलक !

धर्माचरण एवं साधना से प्राप्त होनेवाला आध्यात्मिक बल ही आज राष्ट्र की प्रत्येक समस्या के निराकरण हेतु ऊर्जा प्रदान कर सकता है । ‘धर्मशिक्षा देना’ सनातन संस्था की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है । यज्ञस्थल पर भी सभागृह के मंडप के ऊपरी भाग में ‘देवी की उपासना कैसे करें ?’ इस विषय में विशेषतापूर्ण  फलक लगाकर धर्मप्रसार किया गया !

‘सनातन प्रभात’ नियतकालिक कक्ष !

हिन्दू राष्ट्र अर्थात रामराज्य की स्थापना हेतु तथा आनेवाले आपातकाल से तरने के लिए यज्ञ के माध्यम से श्री राजमातंगी देवी की उपासना की गई तथा उसी यज्ञस्थल पर हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के उद्देश्य से ही कार्यरत एवं सनातन यज्ञसंस्कृति को बढावा देनेवाले ‘सनातन प्रभात’ नियतकालिकों का प्रसार किया गया !

हिन्दू जनजागृति समिति प्रदर्शनी कक्ष !

भारतराष्ट्र को रामराज्य स्थापना की दिशा में ले जाने हेतु महायज्ञ का आयोजन एवं वहां हिन्दू राष्ट्र-स्थापना हेतु कार्यरत हिन्दू जनजागृति समिति के कार्य का किया गया प्रसार !

आपातकाल हेतु गुरुदेवजी द्वारा प्रदान की गई ग्रंथ-संजीवनी !

आपातकाल में तरने के लिए आयुर्वेदीय औषधियां एवं घर के आस-पास लगाए पौधे ही उपयोगी सिद्ध होंगे । ‘ये पौधे कैसे लगाएं ?’ इसकी जानकारी देनेवाले ग्रंथों एवं कुछ वनस्पतियों की जानकारी लेतीं यज्ञ हेतु आईं श्रद्धालु महिलाएं !

सनातन के ग्रंथों का प्रदर्शनी कक्ष !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने विपुल ग्रंथ-लेखन किया है तथा ३७० से अधिक ग्रंथों की १३ भाषाओं में १ करोड से अधिक प्रतियां प्रकाशित हुई हैं । यज्ञस्थल पर रखे ये ग्रंथ देखती जिज्ञासु महिला !
श्री राजमातंगी महायज्ञ का फल आगामी युद्ध काल में भारत की रक्षा होने पर सभी को दिखाई देगा ! आदिशक्ति की ‘प्रधानमंत्री’ श्री राजमातंगी देवी ने इस यज्ञ के माध्यम से जो आध्यात्मिक तेज एवं ओज प्रदान किया, वह राष्ट्र को विजयपथ पर ले जाएगा !