भारतीय अर्थव्यवस्था को दुर्बल करने वाली ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ का उन्मूलन आवश्यक !

कोल्हापुर, ८ जून (वार्ता.) – ‘कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ’ अर्थात् ‘गोकुल’ द्वारा ‘हलाल’ प्रमाणपत्र प्राप्त करने का प्रकरण उजागर हुआ है। ‘हलाल’ प्रमाणपत्र प्रदान करने वाली ‘जमीयत उलेमा-ए-हिंद’ नामक संस्था ७०० से अधिक आतंकवादियों के अभियोग (मुकदमे) न्यायलय में लडती है तथा इस धन का संकलन उन माध्यमों से किया जा रहा है जो यह प्रमाणपत्र प्राप्त करते हैं । सामान्य कृषकों (किसानों) को अंधकार में रखकर ‘गोकुल’ के धन का उपयोग ‘हलाल’ के निमित्त करना, यह लाखों कृषकों के साथ घोर वंचना (धोखाधडी ) ही है । वर्ष २०१३ में प्रारंभ हुई यह हलाल अर्थव्यवस्था आज वैश्विक स्तर पर २.१ अमेरिकन ट्रिलियन डॉलर्स (१७९.६ लाख करोड रुपयों) तक पहुंच चुकी है । हिन्दुओं के कोष से प्राप्त किया जाने वाला यह ‘हलाल टैक्स’ वास्तव में हिन्दुओं से लिया जाने वाला ‘जजिया कर’ ही है । भारतीय अर्थव्यवस्था को जर्जर करने वाली इस ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ का समूल नाश अत्यंत आवश्यक है तथा इसके लिए संपूर्ण भारत देश ‘हलाल’ मुक्त होना ही चाहिए, ऐसा सुदृढ प्रतिपादन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने कोल्हापुर की पत्रकार वार्ता में किया ।
Addressing a press conference in Kolhapur, Hindu Janajagruti Samiti National Spokesperson @Ramesh_hjs asserted that the Kolhapur District Cooperative Milk Producers Union (‘Gokul’) obtained a #Halal Certificate from Jamiat Ulema-e-Hind and questioned the necessity of… pic.twitter.com/ElXw9i7ey2
— HinduJagrutiOrg (@HinduJagrutiOrg) June 8, 2026
इस अवसर पर ‘हिन्दू एकता आंदोलन’ के श्री. गजानन गुरव, ‘महाराजा प्रतिष्ठान’ के संस्थापक श्री. निरंजन शिंदे, ‘मराठा तितुका मेळवावा’ के श्री. योगेश केरकर, उद्धव बालासाहेब ठाकरे दल के उपजिलाप्रमुख श्री. संभाजीराव भोकरे, हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. शिवानंद स्वामी, शिवसेना के उपजिलाप्रमुख श्री. किशोर घाटगे एवं मंदिर महासंघ के श्री. अशोक गुरव आदि गणमान्य उपस्थित थे ।
इस समय श्री. रमेश शिंदे ने कहा कि,
महाराष्ट्र राज्य देश में ५ वें क्रमांक का दुग्ध उत्पादक राज्य है । राज्य में कुल उत्पादन की तुलना में २.५ दश लाख लीटर दुग्ध की न्यूनता (कमी) है, ऐसी स्थिति में हमें दुग्ध निर्यात करने की क्या आवश्यकता है ? विश्व के १९२ देशों ने जब ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक प्राधिकरण’ (‘एफ्.एस्.एस्.ए.आई’) को अधिमान्यता दी है, तो हम भारत में धर्म आधारित ‘हलाल’ प्रमाणपत्र को मान्यता क्यों प्रदान कर रहे हैं ? ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक प्राधिकरण’ ने जब किसी खाद्य पदार्थ के समस्त परीक्षणों के उपरांत यह प्रमाणित कर दिया कि ‘इसमें मांस से संबंधित कोई भी तत्व सम्मिलित नहीं है’, तब उन पर अविश्वास करके एक अन्य ‘हलाल’ प्रमाणपत्र की क्या आवश्यकता है ?
प्रारंभ में केवल ‘मांस’ तक सीमित रहने वाला यह ‘हलाल प्रमाणपत्र’ आज दुग्ध, तुलसी अर्क, शर्करा, ‘डेटिंग ऐप’, आवासीय परिसर एवं शेयर बाजार से लेकर लगभग प्रत्येक जीवनोपयोगी उत्पाद तक ‘हलाल प्रमाणित’ हो चुका है । हिन्दुओं द्वारा क्रय की जाने वाली प्रायः प्रत्येक वस्तु ‘हलाल’ है तथा हिन्दुओं के अर्जन का धन ‘हलाल’ के निमित्त व्यय हो रहा है । ‘हलाल’ के अंतर्गत केवल मुस्लिमों की धार्मिकता का विचार किया गया है; इसमें हिन्दुओं के लिए परम पवित्र गोमाता के संदर्भ में किसी भी उत्पाद का निषेध किया जाएगा, इसकी कोई निश्चितता नहीं है, ऐसा भी श्री. शिंदे ने इस अवसर पर स्पष्ट किया ।
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