हिन्दू देवस्थानों के अस्तित्व पर आघात करने वाले ‘इनाम उन्मूलन अधिनियम’ को तत्काल वापस लें, अन्यथा जनआंदोलन करेंगे !

रायगढ जिले के मंदिर न्यासियों की चेतावनी

तहसीलदार श्री . उत्तम कुंभार को निवेदन सौंपते हुए रायगढ के मंदिर न्यासियों (विश्वस्तों) सहित उपस्थित श्रद्धालु तथा धर्मप्रेमी ।

रायगढ, २१ मई (वार्ता .) – महाराष्ट्र शासन के राजस्व एवं वन विभाग द्वारा प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप अधिनियम, २०२६’ राज्य के सहस्रों हिन्दू देवस्थानों के स्वायत्त अस्तित्व तथा उनके आय के स्रोतों को समूल नष्ट करने वाला है । इस अधिनियम के प्रारूप में अत्यंत गंभीर विधिक (कानूनी) त्रुटियां हैं तथा यह हिन्दू धर्म के धार्मिक तथा संपत्ति के अधिकारों पर सीधा आघात करने वाला है । इस लोकतंत्र विरोधी प्रारूप का रायगढ जिले के अनेक मंदिर न्यासियों ने तीव्र विरोध किया है तथा सरकार से इस प्रस्तावित अधिनियम को बिना शर्त वापस लेने की मांग की गई है । इस विषय में रायगढ के मंदिर न्यासियों द्वारा २० एवं २१ मई को सुधागढ तहसील कार्यालय में तहसीलदार श्री. उत्तम कुंभार को निवेदन सौंपे गए ।

निवेदन सौंपने के लिए उपस्थित हुए रायगढ के मंदिर न्यासियों सहित श्रद्धालु तथा धर्मप्रेमी ।

यह निवेदन सौंपते समय अष्टविनायकों में से पाली स्थित ‘श्री बल्लालेश्वर देवस्थान’ के अध्यक्ष श्री. जितेंद्र गद्रे के नेतृत्व में ‘श्री उद्धर रामेश्वर देवस्थान’ के अध्यक्ष श्री. प्रदीप तुकाराम लांगी, बल्लालेश्वर देवस्थान के उपाध्यक्ष श्री. वैभव आप्टे, ‘रामवाडी देवस्थान’ के श्री. राजू पातेरे, ‘विष्णु देवस्थान’ के श्री. योगेश उपाध्ये, ‘पाली देवस्थान’ के श्री. प्रमोद पावगी, ‘मारुति देवस्थान’ के अध्यक्ष श्री. अभिजीत चांदोरकर, ‘मरी माता मंदिर’ के अध्यक्ष श्री. संजय घोसालकर, ‘महाकाली देवस्थान’ के न्यासी श्री. महादेव पिंपले एवं महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के प्रतिनिधि श्री. राजेंद्र पावसकर सहित ६० से अधिक श्रद्धालु तथा धर्मप्रेमी उपस्थित थे ।

देवस्थानों की भूमि पर से देवस्थानों का ही स्वामित्व अधिकार समाप्त होने की आशंका ! – श्री . जितेंद्र गद्रे , अध्यक्ष, श्री बल्लालेश्वर देवस्थान

श्री. जितेंद्र गद्रे ने इस अवसर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘प्रस्तावित प्रारूप के प्रावधानों के अनुसार महाराष्ट्र के समस्त देवस्थानों के स्वामित्व की जो भूमियां हैं, उन भूमियों पर से देवस्थानों का स्वामित्व अधिकार समाप्त होने की बड़ी आशंका है ।’’ उन्होंने यह भी कहा कि देवस्थानों के अस्तित्व तथा उनकी भूमियों की रक्षा के लिए सभी मठ-मंदिर एकजुट होकर इसका विरोध कर रहे हैं ।

समय आने पर जनआंदोलन करेंगे ! – श्री. प्रदीप लांगी, अध्यक्ष, श्री उद्धर रामेश्वर देवस्थान

‘श्री उद्धर रामेश्वर देवस्थान’ के अध्यक्ष श्री. प्रदीप लांगी ने कहा, ‘‘अन्य देवस्थानों के अध्यक्षों ने जो भूमिका अपनाई है, उसे हमारा पूर्ण समर्थन है । संपूर्ण रायगढ में हम इस अधिनियम का तीव्र निषेध करेंगे । आवश्यकता पडने पर संपूर्ण रायगढ जिले में तीव्र जनआंदोलन छेडा जाएगा ।’’

वक्फ की संपत्तियों तथा मंदिरों की संपत्तियों के विषय में सरकार द्वारा भेदभाव ! – समस्त मंदिर न्यासी

एक ओर वक्फ संपत्तियों को विशेष संरक्षण प्रदान किया जा रहा है, तो दूसरी ओर मंदिरों की भूमि हडपने के लिए अधिनियम बनाना पक्षपातपूर्ण एवं निंदनीय है । मंदिरों की भूमि केवल भूमि का टुकडा नहीं है, अपितु यह भूमि हिन्दू संस्कृति तथा श्रद्धा की पवित्र धरोहर है । महाराष्ट्र मंदिर महासंघ एवं समस्त मंदिर न्यासियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने हिन्दू समाज की भावनाओं को कुचलकर इस अधिनियम को थोपने का प्रयास किया, तो धार्मिक संस्थाएं, संप्रदाय तथा श्रद्धालु रायगढ सहित संपूर्ण महाराष्ट्र में तीव्र जनआंदोलन करेंगे ।

संपादकीय भूमिका

ऐसी चेतावनी क्यों देनी पडती है ? प्रशासन स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई क्यों नहीं करता ?