छत्रपती शिवाजी महाराज का अनादर पूर्वक उल्लेख न हटाने वाले प्रकाशकों तथा संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध आपराधिक अभियोग पंजीकृत करें !

कोल्हापुर — गोविंद पानसरे द्वारा रचित ‘शिवाजी कोण होता ?’ यह पुस्तक छत्रपती शिवाजी महाराज का अनादर करते हुए संबोधन कर न केवल उनका अपमान करती है, अपितु इस पुस्तक में इतिहास का विकृतीकरण कर असत्य इतिहास को प्रस्थापित करने हेतु अनेक भ्रामक घटनाएं लिखी गई हैं । इस ग्रंथ में छत्रपती शिवाजी महाराज के प्रखर, जाज्वल्य, देदीप्यमान तथा पराक्रमी इतिहास को जनमानस के समक्ष प्रस्तुत करने के स्थान पर मिथ्या इतिहास प्रस्तुत किया गया है । अतः गोविंद पानसरे लिखित इस पुस्तक पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए एवं संबंधित घटकों पर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए, इन मांगों हेतु ‘हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति’ की ओर से छत्रपती शिवाजी महाराज चौक पर आंदोलन किया गया ।
आंदोलन के पश्चात पुलिस अधीक्षक कार्यालय में निवेदन प्रस्तुत किया गया । निवेदन स्वीकार करने के उपरांत नगर पुलिस उपअधीक्षक प्रिया पाटिल तथा अपर पुलिस अधीक्षक धीरजकुमार बच्चू ने ‘उचित कार्रवाई करने’ का आश्वासन दिया । इस अवसर पर शिवसेना के उपजिल्हाप्रमुख श्री. किशोर घाटगे, भाजपा के श्री. महेश जाधव, ‘हिन्दू एकता आंदोलन’ के नगर अध्यक्ष श्री. गजानन तोडकर, ‘शिवशाही फाऊंडेशन’ के संस्थापक श्री. सुनील सामंत, ‘आरोग्य भारती’ की वैद्या अश्विनी माळकर तथा सनातन संस्था के डॉ. मानसिंग शिंदे ने अपने विचार व्यक्त किए । हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति के श्री. रामभाऊ मेथे ने कार्यक्रम का संचालन किया ।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
‘महाराजा प्रतिष्ठान’ के संस्थापक श्री. निरंजन शिंदे, हिन्दू महासभा के उपाध्यक्ष श्री. विकास जाधव, हिन्दू जनजागृती समिति के श्री. शिवानंद स्वामी, उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के उपजिला प्रमुख श्री. संभाजीराव भोकरे, मंदिर महासंघ के श्री. अशोक गुरव एवं श्री. प्रसाद कुलकर्णी, हिन्दू महासभा महिला मोर्चा की शीलाताई माने, पूर्व जिला परिषद सदस्य श्री. महेश चौगुले, हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति के श्री. रामभाऊ मेथे, हिन्दुत्वनिष्ठ श्री. सुहास चव्हाण, श्री. शशी बीडकर, विश्व हिन्दू परिषद के श्री. मनोहर चौनानी, ‘नमो नमो’ के जिलाध्यक्ष श्री. विक्रम जरग सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे ।
शिवराय की भवानी तलवार की भी इसी प्रकार अवहेलना की गई है । पुस्तक में लिखा गया है कि ‘भवानी देवी ने छत्रपती शिवाजी महाराज को तलवार दी ही नहीं’ । यह कृत्य हिन्दू अस्मिता के आधारस्तंभ महापुरुषों का ‘वैचारिक पतन’ करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है । इससे हिन्दू समाज की भावनाएं आहत हुई हैं । छत्रपती शिवाजी महाराज ने मुगलों की ५ सल्तनतों को परास्त किया तथा आक्रामक मुगलों को यमलोक भेजा । उन्होंने अनेक स्थानों पर मंदिरों तथा अन्नक्षेत्रों की स्थापना की । वे हिन्दुओं के राजा हुए । ऐसी स्थिति में, ‘शिवाजी कोण होता ?’ पुस्तक के माध्यम से उनकी पूर्णतः दूषित प्रतिमा निर्मित की गई है । अतः इस पुस्तक के विक्रय तथा वितरण पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए, ऐसी मांग इस समय की गई ।
इस अवसर पर की गई अन्य मांगें :
१. छत्रपती शिवाजी महाराज के अनादर पूर्वक उल्लेख न हटाने वाले प्रकाशकों तथा संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा २९९ धार्मिक भावनाएं आहत करना एवं महापुरुषों का अपमान करना, तथा धारा १९६ विविध समूहों में वैमनस्य उत्पन्न कर सामाजिक शांति भंग करना के अंतर्गत आपराधिक अभियोग पंजीकृत किए जाएं ।
२. महाराष्ट्र शासन इतिहासविदों की एक उच्चस्तरीय समिति नियुक्त कर इस पुस्तक के प्रत्येक आपत्तिजनक कथन तथा ऐतिहासिक संदर्भों का शोध करे ।
३. केवल मुद्रित पुस्तकें ही नहीं, अपितु ‘अमेजन’, ‘फ्लिपकार्ट’ जैसी ‘ई-कॉमर्स साइट्स’ तथा अन्य संकेतस्थलों पर उपलब्ध इस पुस्तक की डिजिटल प्रतियों एवं ‘पीडीएफ’ लिंक को साइबर विधि के अंतर्गत प्रतिबंधित (ब्लॉक) किया जाए ।

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