प्रपत्र में धर्म के रूप में ‘इस्लाम’ तथा मातृभाषा के रूप में हिन्दी न लिखकर ‘उर्दू’ लिखें ! – Maulana Khalid Rasheed Firangi Mahali

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली का जनगणना के संदर्भ में मुसलमानों से आह्वान

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) – जनगणना प्रपत्र भरते समय धर्म के स्थान पर केवल ‘इस्लाम’ ही लिखना चाहिए । साथ ही मातृभाषा के स्तंभ में हिन्दी के स्थान पर ‘उर्दू’ लिखनी चाहिए, ऐसा आह्वान यहां के प्रसिद्ध मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने किया है ।

मौलाना महली के अनुसार, कई बार लोग सामान्य रूप से हिन्दी लिख देते हैं ; किन्तु अपनी उचित पहचान दर्ज करना आवश्यक है । सरकार शासकीय योजनाएं बनाते समय इसी जानकारी का आधार लेती है, इसलिए स्पष्ट जानकारी होने पर योजनाएं बनाना तथा उनका क्रियान्वयन करना सरल होता है ।

जनगणना प्रपत्र में सभी हिन्दुओं को ‘संस्कृत’ का उल्लेख करना चाहिए !

यद्यपि प्रत्येक व्यक्ति की मातृभाषा भिन्न होती है, तथापि भारत की मूल भाषा देववाणी संस्कृत मानी जाती है । हिन्दू प्रतिदिन प्रार्थना, मंत्र, श्लोक तथा पूजा-विधियों में संस्कृत का ही उपयोग करते हैं । संस्कृत सभी भाषाओं की जननी मानी जाती है । इस भाषा को जीवित रखना सभी का दायित्व है । वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार, पूरे देश में संस्कृत भाषियों की संख्या मात्र २ लाख थी, जबकि अरबी, फारसी अथवा उर्दू जैसी विदेशी भाषाएं बोलने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक थी तथा उन्हें शासकीय अनुदान एवं समर्थन भी प्राप्त हुआ ।

संपादकीय भूमिका

यदि ऐसा आह्वान किया जा रहा है, तो यदि ‘हिन्दुओं ने धर्म के रूप में ‘ हिन्दू’ तथा मातृभाषा के रूप में ‘संस्कृत’ का उल्लेख करें’, ऐसा कोई आह्वान करें, तो उसे भी अनुचित नहीं माना जाना चाहिए !