मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली का जनगणना के संदर्भ में मुसलमानों से आह्वान

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) – जनगणना प्रपत्र भरते समय धर्म के स्थान पर केवल ‘इस्लाम’ ही लिखना चाहिए । साथ ही मातृभाषा के स्तंभ में हिन्दी के स्थान पर ‘उर्दू’ लिखनी चाहिए, ऐसा आह्वान यहां के प्रसिद्ध मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने किया है ।
Maulana Khalid Rasheed Firangi Mahali has urged Muslims to mark “Islam” as religion and “Urdu” as mother tongue in census forms.
If such appeals are being made, is it unreasonable to expect Hindus to assert their identity too, by writing “Hindu” as religion and “Sanskrit” as… pic.twitter.com/OI1jGPr108
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) April 13, 2026
मौलाना महली के अनुसार, कई बार लोग सामान्य रूप से हिन्दी लिख देते हैं ; किन्तु अपनी उचित पहचान दर्ज करना आवश्यक है । सरकार शासकीय योजनाएं बनाते समय इसी जानकारी का आधार लेती है, इसलिए स्पष्ट जानकारी होने पर योजनाएं बनाना तथा उनका क्रियान्वयन करना सरल होता है ।
जनगणना प्रपत्र में सभी हिन्दुओं को ‘संस्कृत’ का उल्लेख करना चाहिए !
यद्यपि प्रत्येक व्यक्ति की मातृभाषा भिन्न होती है, तथापि भारत की मूल भाषा देववाणी संस्कृत मानी जाती है । हिन्दू प्रतिदिन प्रार्थना, मंत्र, श्लोक तथा पूजा-विधियों में संस्कृत का ही उपयोग करते हैं । संस्कृत सभी भाषाओं की जननी मानी जाती है । इस भाषा को जीवित रखना सभी का दायित्व है । वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार, पूरे देश में संस्कृत भाषियों की संख्या मात्र २ लाख थी, जबकि अरबी, फारसी अथवा उर्दू जैसी विदेशी भाषाएं बोलने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक थी तथा उन्हें शासकीय अनुदान एवं समर्थन भी प्राप्त हुआ ।
संपादकीय भूमिकायदि ऐसा आह्वान किया जा रहा है, तो यदि ‘हिन्दुओं ने धर्म के रूप में ‘ हिन्दू’ तथा मातृभाषा के रूप में ‘संस्कृत’ का उल्लेख करें’, ऐसा कोई आह्वान करें, तो उसे भी अनुचित नहीं माना जाना चाहिए ! |
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