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(‘डिजिटल लत’ का अर्थ है मोबाइल, कंप्यूटर आदि देखने में बिताया गया समय)
(‘स्क्रीन टाइम’ का अर्थ है मोबाइल, कंप्यूटर देखने की अवधि)
बेंगलुरु (कर्नाटक) – डिजिटल लत की बढती समस्या को नियंत्रित करने के लिए कर्नाटक सरकार ने कक्षा ९ वीं से १२ वीं के छात्रों के लिए ‘डिजिटल’ उपयोग से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण रूपरेखा तैयार किया है । इस योजना में छात्रों के अध्ययन के अतिरिक्त ‘स्क्रीन टाइम’ प्रतिदिन १ घंटे तक सीमित रखने तथा शाम ७ बजे के उपरांत इंटरनेट उपयोग बंद करने की अनुशंसा की गई है ।
सरकार के अनुसार लगभग २५ प्रतिशत किशोर इंटरनेट की लत से प्रभावित हैं । इसके कारण नींद की कमी, चिंता एवं ध्यान भटकने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं । इसी पृष्ठभूमि में छात्रों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह नीति तैयार की गई है ।
Karnataka moves to curb digital addiction among students 📵📚
➡️ Screen time capped at 1 hr/day
➡️ No internet after 7 PM
➡️ Policy for Classes 9–12⚠️ Govt says ~25% teens are addicted
Proposals include 👇
✔️ Digital detox days
✔️ Mental health support
✔️ Parental & teacher… pic.twitter.com/nn8bXtLah0— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) March 25, 2026
इस मसौदे के अनुसार…
१. छात्रों को सोने से कम से कम एक घंटे पहले ‘स्क्रीन’ से दूर रखना आवश्यक है । मोबाइल उपयोग के लिए ‘चाइल्ड प्लान’ की अवधारणा सुझाई गई है, जिसमें बच्चों को सीमित सुविधाएं, केवल ऑडियो विकल्प एवं निर्धारित समय के पश्चात इंटरनेट अपने आप बंद होने की व्यवस्था होती है । साथ ही आयु के अनुसार सुरक्षित उपकरण एवं ‘ऑपरेटिंग सिस्टम’ विकसित करने पर भी जोर दिया गया है ।
२. विद्यालयों में ‘डिजिटल वेल-बीइंग’ (छात्रों का डिजिटल उपयोग संतुलित एवं स्वस्थ रहे, इस पर ध्यान देना) एवं ऑनलाइन सुरक्षा को पाठ्यक्रम का भाग बनाया जाएगा । छात्रों को ‘साइबर बुलिंग’ (इंटरनेट या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी को धमकाना), गोपनीयता एवं उत्तरदायी ऑनलाइन व्यवहार के बारे में शिक्षा दी जाएगी । प्रत्येक विद्यालय को अपना डिजिटल उपयोग नीति लागू करना अनिवार्य होगा । ‘डिजिटल डिटॉक्स डे’ (डिजिटल उपकरणों से दूर रहने का दिन) तथा ‘टेक-फ्री’ समय जैसे उपक्रम भी चलाए जाएंगे ।
३. छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा । विद्यालयों में परामर्श व्यवस्था को और दृढ किया जाएगा । इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ।
४. शिक्षक एवं अभिभावकों की भूमिका निर्धारित की जाएगी । शिक्षक बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर दृष्टि रखेंगे तथा मार्गदर्शन करेंगे । अभिभावक घर पर ‘स्क्रीन टाइम’ निर्धारित करेंगे तथा ‘नो-फोन जोन’ (घर के ऐसे स्थान जहां मोबाइल का उपयोग न हो) बनाना अपेक्षित होगा ।
५. ए.आई. के उपयोग के लिए दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे । विद्यालय ए.आई. के उपयोग के नियम बनाएंगे, गृहकार्य में इसके उपयोग को नियंत्रित करेंगे तथा नकल रोकने के लिए व्यवस्था विकसित करेंगे ।
१६ वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर पहले ही प्रतिबंध लगाया गया है !
कर्नाटक सरकार ने १६ वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा पहले ही कर दी है । ऐसा करने वाला कर्नाटक देश का पहला राज्य बन गया है ।
संपादकीय भूमिका
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