ठाणे, गिरगांव एवं विलेपार्ले में निकाली गईं नववर्ष स्वागतयात्राआं में सनातन संस्था की ओर से प्रस्तुत की गई ‘रामराज्य’ की संकल्पना !

ठाणे में रामसेतू की संकल्पना को साकार करते हुए हाथ में शीला लेकर स्वागतयात्रा में सहभागी सनातन संस्था के साधक

ठाणे, १९ मार्च (संवाददाता) : हिन्दू नववर्ष के उपलक्ष्य में पूरे राज्य में बडे हर्षाेल्लास के साथ स्वागतयात्राएं संपन्न हुईं । ठाणे, गिरगांव एवं विलेपार्ले में संपन्न स्वागतयात्राओं में रामसेतू की संकल्पना साकार करते हुए हाथ में प्रतिकात्मक शीला लेकर सनातन संस्था के साधक सहभागी हुए । राज्य के अन्य क्षेत्रोंसहित मुंबई, पुणे, ठाणे आदि स्थानों पर बडे उत्साह के साथ एवं पारंपरिक जल्लोष में स्वागत किया गया । प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ठाणे में निकाली गई शोभायात्रा में उपस्थित थे ।

मान्यवरों को दी गई नववर्ष की शुभकामनाएं !

उपमुख्यमंत्री श्री. एकनाथ शिंदे को दैनिक ‘सनातन प्रभात’का गुढीपडवा विशेषांक भेंट कर उन्हें नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए सनातन संस्था के श्री. श्री. प्रशांत सुर्वे

ठाणे में राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, परिवहनमंत्री प्रताप सरनाईक, शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के, ठाणे की महापौर शर्मिला पिंपळोलकर, भाजपा विधायक निरंजन डावखरे एवं पार्षद सुनेश जोशी को; जबकि सनातन संस्था की ओर से डोंबिवली में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण, भाजपा के कल्याण प्रांत महासचिव नंदकिशोर परब, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे, विधायक राजेश मोरे एवं पार्षद ज्योति मराठे को दैनिक ‘सनातन प्रभात’का गुडीपडवा विशेषांक भेंट कर नववर्ष की शुभकामनाएं दी गईं ।

सनातन संस्था का रामसेतू की संकल्पना के साथ स्वागतयात्रा में सहभाग !

राज्य में सर्वत्र की शोभायात्राओं में सनातन संस्था के साधक सहभागी हुए । ठाणे, गिरगांव एवं विलेपार्ले की स्वागतयात्राओं में सनातन संस्था की ओर से चित्ररथ के माध्यम से ‘शंखनाद रामराज्य का’ यह संकल्पना साकार की गई । ‘जिसप्रकार से वानरसेना ने रामसेतू के निर्माण के लिए एक-एक शिला समुद्र में फेंककर रामसेतू का निर्माण किया, उसीप्रकार रामराज्य की निर्मिति हेतु हम भी धर्मकार्य में सहभागी होंगे’, यह संदेश इस माध्यम से दिया गया । ‘धर्म’, ‘संस्कृति’, ‘परंपरा’, ‘श्रद्धा’, ‘भक्ति’, ‘साधना’, ‘त्याग’, ‘राम’ ये शब्द लिखी गई प्रतिकात्मक शिलाएं कंधे पर लेकर रामनाम का जाप कर चल रहे साधक नागरिकों के विशेष आकर्षण का केंद्र बने । स्वरक्षा प्रशिक्षण की गंभीरता का ध्यान दिलाते हुए लाठी एवं नानचाकू के प्रदर्शन दिखाए गए ।