‘साधना की तीव्र लगन एवं सेवाभावी वृत्ति’ से युक्त नांदेड की श्रीमती अनीता बरारा (आयु ७२ वर्ष) ७१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर ‘समष्टि संत’ के रूप में सनातन के १३८वें संतपद पर विराजमान !                                                       

(बाएं से) सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी पू. (श्रीमती) अनीता बराराजी का सम्मान करते हुए

सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी को पू. (श्रीमती) अनीता बराराजी की प्रतीत हुईं गुणविशेषताएं !

सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी

१. श्रीमती बरारा के प्रतिष्ठित व्यावसायिक पति द्वारा पत्नी को घर से निकलकर सेवा करने का विरोध किया जाना; परंतु ऐसी स्थिति में भी श्रीमती बरारा द्वारा लगन के साथ सेवा करना

‘श्रीमती अनीता बरारा धनी परिवार से हैं । उनके पति (वर्तमान में स्व. सुरेंद्रपाल बरारा, आध्यात्मिक स्तर ६१ प्रतिशत) एक प्रतिष्ठित व्यावसायिक थे । नांदेड के अनेक व्यापारी, अधिवक्ता, डॉक्टर, अधिकारी तथा राजनेता, ऐसे सभी के साथ स्व. बरारा का अच्छा परिचय था । ‘श्रीमती बरारा का समाज के व्यक्तियों से विज्ञापन लेना तथा अर्पण संकलित करना’, यह उनके पति को अच्छा नहीं लगता था । श्रीमती बरारा के घर से निकलकर अध्यात्मप्रसार की सेवा करने के लिए उनका विरोध था । जब स्व. बरारा काम के लिए बाहर जाते थे, तब श्रीमती बरारा सेवा के लिए जाती थीं, सत्संगों में उपस्थित रहती थीं तथा पति के घर आने से पूर्व घर वापस आती थीं । वर्तमान में श्रीमती बरारा ७२ वर्ष की हैं; परंतु इस आयु में भी वे नियमित रूप से अध्यात्मप्रसार की सेवा के लिए बाहर जाती हैं ।

२. स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन प्रक्रिया कर स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त करना

श्रीमती बरारा में ऐसे कुछ तीव्र स्वभावदोष नहीं थे, अपितु उनमें गुण ही अधिक थे । उनमें कुछ मात्रा में ‘अपेक्षा करना एवं आग्रही भूमिका’, ये कुछ स्वभावदोष थे । उन्होंने स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन की प्रक्रिया कर स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त कर स्वयं में ‘प्रेमभाव एवं विनम्रता’, ये गुण वृद्धिंगत किए । उनमें आए परिवर्तन अन्य साधकों के भी ध्यान में आए हैं । वर्ष २०१३ में श्रीमती बरारा ने ६१  प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त किया ।

३. ‘श्रीमती बरारा द्वारा स्वयं में लाए परिवर्तन तथा उनकी आध्यात्मिक प्रगति’ के कारण उनके पति का विरोध क्षीण होकर उनका पत्नी की सेवा में सहायता करना तथा उससे श्रीमती बरारा के पति की भी आध्यात्मिक प्रगति होना

‘श्रीमती बरारा के स्वभाव में हुए परिवर्तन तथा उनकी हुई आध्यात्मिक प्रगति’ के कारण उनके पति का उनकी साधना को होनेवाला विरोध भी क्षीण होता गया । श्रीमती बरारा के कारण उनके परिजन भी साधना करने लगे हैं । ‘सनातन संस्था की बताई गई साधना तथा संस्था का कार्य अच्छा है’, यह बात स्व. बरारा के ध्यान में आई । उसके उपरांत वे स्वयं फ्लेक्स प्रदर्शनी लगाने की सेवा में सम्मिलित होने लगे । वे उनके प्रतिष्ठित मित्रों को प्रदर्शनी देखने के लिए तथा हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा सुनने के लिए साथ लेकर आने लगे । उन्होंने अपने चारपहिया वाहन के चालक को ‘श्रीमती बरारा को सेवा के स्थान पर पहुंचाने तथा उन्हें घर वापस लाने’ के लिए सूचित कर रखा था । स्व. बरारा पत्नी की साधना में सहायता करने लगे तथा उसके कारण उन्होंने भी ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त किया ।

४. प्रेमभाव

श्रीमती बरारा का साधकों के प्रति प्रेमभाव सभी के ध्यान में आता है । वे साधकों को उनसे हुई चूकें प्रेमपूर्वक बताती हैं ।

५. श्रीमती बरारा में सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी के प्रति दृढ श्रद्धा है । वे गुरुदेवजी का स्मरण करती हैं । वे कर्तापन गुरुदेवजी को अर्पण करती हैं । वे निरंतर कहती हैं, ‘सबकुछ गुरुदेवजी ही करते हैं ।’

(‘यह लेखन श्रीमती अनीता बराराजी के संतपद पर विराजमान होने से पूर्व का है । इसलिए इसमें श्रीमती अनीता बरारा के नाम के पहले ‘पू.’ नहीं लिखा गया है ।’ – संकलनकर्ता)

– (सद्गुरु) नंदकुमार जाधव, जळगांव, महाराष्ट्र. (२१.११.२०२५)

‘साधना की तीव्र लगन एवं सेवाभावी वृत्ति’ से युक्त नांदेड की श्रीमती अनीता बरारा (आयु ७२ वर्ष) ७१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर ‘समष्टि संत’ के रूप में सनातन के १३८वें संतपद पर विराजमान ! 

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी

‘नांदेड की श्रीमती अनीता सुरेंद्रपाल बरारा (आयु ७२ वर्ष) वर्ष २००१ से सनातन संस्था के मार्गदर्शन में साधना कर रही हैं । प्रारंभ से ही उनमें साधना के प्रति अत्यधिक गंभीरता रही है । सेवा की तीव्र लगन रखनेवाली श्रीमती बरारा ‘विज्ञापन लाना, अर्पण एकत्र करना, ‘सनातन प्रभात’ नियतकालिक के सदस्य बनाना, सत्संग लेना आदि सभी सेवाएं मन  लगाकर और निरंतर कर रही हैं । इस आयु में भी उनका सेवा के प्रति उत्साह और तत्परता अत्यंत प्रशंसनीय है ।

‘शांत स्वभाव, सहजता, साधना की लगन एवं ईश्वर के प्रति श्रद्धा’, इन गुणों के कारण उन्होंने वर्ष २०१३ में ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाई । आरंभ में उनके पति स्वर्गीय सुरेंद्रपाल बरारा (आयु ७८ वर्ष) पत्नी की समष्टि साधना का विरोध करते थे । साधना की लगन होने के कारण श्रीमती बरारा पति के विरोध का सामना कर सेवा करती रहीं । उनकी लगन के कारण पति का विरोध शांत हुआ और बाद में वे भी साधना में पत्नी की सहायता करने लगे । वर्ष २०१६ में सुरेंद्रपाल बरारा का भी आध्यात्मिक स्तर ६१ प्रतिशत हो गया ।

माया से अलिप्त एवं भावावस्था में रहनेवाली श्रीमती बरारा के सान्निध्य में सभी साधकों को आनंद मिलता है । उनके साथ सेवा करते समय साधकों को ‘स्वयं पर आध्यात्मिक उपचार हो रहे हैं’, ऐसी अनुभूति होती है । उनकी देह में चैतन्य के स्तर पर परिवर्तन हो रहे हैं । यह सब उनके संतपद प्राप्त करने का द्योतक है । वर्ष २०२५ की गुरुपूर्णिमा पर उनका आध्यात्मिक स्तर ६९ प्रतिशत था ।

आज के इस शुभ दिन पर ७१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर वे ‘समष्टि संत’ के रूप में सनातन के १३८वें संतपद पर विराजमान हुई हैं ।

पूज्य (श्रीमती) अनीता बरारा की देह में हुए परिवर्तन पहचाननेवाले साधकों का अभिनंदन ! साधको, पूज्य (श्रीमती) बरारा की साधना का आदर्श सामने रखकर लगन से साधना के प्रयास करें !’

– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले (२५.२.२०२६)

 

पू. (श्रीमती) अनीता बराराजी का मनोगत

पू. (श्रीमती) अनीता बराराजी

पू. अनीता बराराजी ने अपने साधना के प्रयासों के विषय में बताया कि ‘एक सत्संग में सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी ने बताया था कि ‘यदि किसी प्रसंग में अपनी चूक न भी हो, तब भी उस स्थिति में हमें अपनी चूक स्वीकार करनी चाहिए तथा उसके उपरांत हम उस पर चर्चा कर सकते हैं, जिससे हमारा अहं भी अल्प होता है ।’ तब से साधकों द्वारा बताई गई प्रत्येक चूक मैं स्वीकार करती थी तथा मैं चाहे ऐसा प्रयास करती थी कि मैं कहीं भी जाऊं, गुरुदेवजी द्वारा बताए प्रयास मुझे करने हैं ।’ तथा वे सभी प्रयास गुरुदेवजी ही मुझसे करवा लेते थे ।

समष्टि सेवाओं में सदस्य बनाना, लोगों से अर्पण लेना, विज्ञापन प्राप्त करना, पंचांग वितरण करना, प्रवचन लेना, सत्संग लेना, संतसेवा करना आदि जैसी विभिन्न सेवाएं मैं करती थी । उन सेवाओं से मुझे आनंद भी मिलता था । जब मेरा आध्यात्मिक स्तर ६१ प्रतिशत घोषित हुआ, तब गुरुदेवजी के प्रति मुझसे बहुत कृतज्ञता व्यक्त होती थी ।

जब पू. अनीता बराराजी को संत घोषित किया गया, उस समय उन्हें बहुत आनंद हुआ । उन्होंने कहा, ‘‘मैं कुछ नहीं करती । सबकुछ तो गुरुदेवजी ही मुझसे करवा लेते हैं । मेरे अंतर्मन में गुरुदेवजी ही विराजमान हैं । मैं कुछ नहीं करती; तब भी उन्होंने मुझे यह जो कृपाप्रसाद प्रदान किया, उसके लिए मैं केवल उनके प्रति कृतज्ञता ही व्यक्त कर सकती हूं ।

मैं अज्ञानी हूं । मुझे कुछ भी नहीं आता; परंतु सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी ने समय-समय पर मुझे सब बातें समझाकर मेरा दिशादर्शन किया, उसके कारण ही यह सब संभव हुआ । इसके लिए मैं सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी के प्रति तथा तीनों मोक्षगुरुओं के प्रति अनंत-अनंत कोटि कृतज्ञता व्यक्त करती हूं !’’