
नई देहली – हिन्दुओं के प्रमुख पर्वों पर हिन्दुओं पर मुसलमानों द्वारा आक्रमण की घटनाएं होना अब सामान्य हो गया है । विगत कुछ वर्षों में तो इस प्रकार के आक्रमणों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हुई है । यदि किसी पर्व पर भारत में कहीं भी आक्रमण न हो, तो वह एक वृहद् समाचार बन जाए, ऐसी बुरी अवस्था इस देश की हो गई है । इस वर्ष होली के अवसर पर भी देश के विविध भागों में मुसलमानों द्वारा हिन्दुओं पर आक्रमण किए गए । न्यूनतम् ७ स्थानों पर आक्रमण कर हिन्दुओं के साथ मारपीट की गई । उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, बिहार तथा गुजरात राज्यों से ये घटनाएं सम्मुख आई हैं ।
१. देहरादून (उत्तराखंड) : यहां के कोतवाली नगर क्षेत्र स्थित लक्ष्मण चौक पर सलीम नामक एक युवक ने सब्जी विक्रय करने वाली हिन्दू महिला पर आक्रमण किया । पीडिता लक्ष्मी देवी सोनकर के अनुसार, सलीम ने उनसे फल क्रय किए । कुछ समय पश्चात वह वहां आया एवं उन्हें अपशब्द कहे, उन पर फल फेंककर प्रहार किया, उन्हें थप्पड मारे तथा प्राणों से मारने की धमकी दी । परिवाद के आधार पर पुलिस ने अभियोग पंजीकृत कर सलीम को बंदी बना लिया है ।
२. मोहाली (पंजाब) : यहां के सेक्टर ७० स्थित मटौर ग्राम के बाजार में होली के समय विवाद उत्पन्न होने की घटना सम्मुख आई है । आंबेडकरवादी कार्यकर्ता राजेश वाल्मीकि चौहान ने आरोप लगाया कि मस्जिद के समीप स्थित बाजार में लगभग १५-१६ मुसलमानों के समूह ने उन पर आक्रमण किया । (‘जय भीम जय मीम’ (नवबौद्ध-मुसलमान एकता की घोषणा) जैसे नारे लगाने वालों को अब इस घटना पर क्या कहना है ? – संपादक) उन लोगों के पास दंड (लाठियां) थे । उन्हें समझाने का प्रयास किया गया कि हम अपना पर्व मना रहे हैं । अतः हमें इस कारण रोकना कानून तथा संविधान के विरुद्ध है । तत्पश्चात स्थिति और अधिक विकट हो गई । (‘लातों के भूत बातों से नहीं मानते’, यह सूत्र हिन्दुओं को स्मरण रखना चाहिए । ऐसे तत्वों के विरुद्ध स्वसंरक्षण के अधिकार का उपयोग करना, साथ ही पुलिस पर त्वरित कार्रवाई हेतु दबाव बनाना ही ऐसे समय में हिन्दुओं के समक्ष विकल्प होते हैं, यह समझें ! – संपादक)
३. टोंक (राजस्थान) : नगर के पुराने टोंक क्षेत्र के संघपुरा परिसर में होली की रात्रि नमाज के पश्चात घर लौट रहे एक मुसलमान परिवार ने कुछ हिन्दुओं के साथ पूर्व वैमनस्य के कारण विवाद किया तथा हिन्दुओं के साथ मारपीट भी की । इससे परिसर में तनाव बढ गया एवं उसका परिणाम पथराव में हुआ । पुलिस ने समय रहते स्थिति पर नियंत्रण पा लिया ।
४. बूंदी (राजस्थान) : जनपद के अलोद ग्राम में होली की शोभायात्रा के समय रंग उडने की घटना पर मुसलमानों ने विरोध किया । हिन्दुओं पर जानबूझकर मस्जिद पर काला रंग फेंकने का आरोप लगाया गया । (मुसलमानों की सहिष्णुता ! – संपादक)
५. मिर्ज़ापुर (उत्तरप्रदेश) : जिले के रायपुर ग्राम में मंदिर की स्वच्छता करने वाले व्यक्ति तथा उनकी माता पर आक्रमण किया गया । अनिल कुमार गुप्ता पीडित व्यक्ति का नाम है। गुप्ता विश्व हिन्दू परिषद एवं बजरंग दल के विंध्याचल प्रखंड के गौरक्षण प्रमुख हैं । वे प्रातः प्राचीन शिव मंदिर परिसर में स्वच्छता कर रहे थे । उस समय कुछ मुसलमानों ने पत्थर, ईंट तथा लौह शलाका (लोहे की रॉड) द्वारा आक्रमण किया । इसमें गुप्ता एवं उनकी ६० वर्षीय माता गंभीर रूप से घायल हो गए । (भाजपा शासित राज्य में ऐसा घटित होना हिन्दुओं के लिए अपेक्षित नहीं है ! – संपादक) इस प्रकरण में अंगूर अली, हसमत अली, सद्दाम अली तथा नौशाद अली सहित अनेक लोगों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर आरोपियों को बंदी बनाया गया है ।
गुप्ता ने बताया कि मंदिर परिसर में गृह-निर्माण के कारण कुछ मुसलमान निरंतर अतिक्रमण का प्रयास कर रहे हैं । २ वर्ष पूर्व हिन्दुओं ने प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार किया था । उसके पश्चात वे लोग बार-बार मारपीट का प्रयास करते हैं । (क्या कभी किसी मस्जिद के समीप हिन्दू अपना घर बना सकते हैं ? क्या वहां अतिक्रमण कर सकते हैं ? हिन्दुओं में क्षात्रभाव के अभाव एवं पराजित मानसिकता के कारण ही मुसलमान हिन्दू -बाहुल्य क्षेत्रों में प्रविष्ट होकर उन्हीं पर उद्दंडता करते हैं। यह स्थिति हिन्दुओं के लिए लज्जास्पद है ! – संपादक)
६. मुंगेर जिला (बिहार) : यहां के आदर्श आरक्षी केंद्र (पुलिस थाना) क्षेत्र में स्थित रामपुर कॉलोनी के डोम टोला में मुसलमानों पर हिन्दुओं द्वारा खेला जा रहा रंग उडने से शाब्दिक विवाद तथा फिर संघर्ष प्रारंभ हुआ । इस समय स्थिति बिगाडने का प्रयास भी किया गया । पथराव होने की आशंका को देखते हुए पुलिस दल समय पर घटनास्थल पर उपस्थित हो गया तथा अनिष्ट टल गया ।
७. भरूच (गुजरात) : यहां विवादित जामा मस्जिद परिसर में जब कुछ हिन्दू महिलाएं पूजा हेतु आईं, तब मुसलमानों ने उनका विरोध कर रोकने का प्रयास किया । ऐतिहासिक प्रलेख (दस्तावेज) बताते हैं कि यह मस्जिद मूल हिन्दू-जैन मंदिरों के अवशेषों पर निर्मित की गई है । इस विरोध का चलचित्र (वीडियो) भी सम्मुख आया है । संत समाज का दावा है कि यह स्थान मूलतः ‘समाली विहार’ जैन मंदिर एवं चक्रधर स्वामी का जन्मस्थान था ।
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