कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा पुलिस को डांट

बेंगलुरु (कर्नाटक) – हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं के विरुद्ध पूर्व में पंजीकृत प्रकरणों के आधार पर पुलिस उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाषण देने से नहीं रोक सकती, ऐसा निर्णय कर्नाटक उच्च न्यायालय ने दिया है । बेलगावी में हिन्दू सम्मेलन समिति की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में २ हिन्दुत्वनिष्ठ नेताओं को भाषण देने से पुलिस ने मना किया था । यह कार्यक्रम प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व्यक्तित्वों के कार्यों की स्मृति में आयोजित किया गया था । इस निर्णय के उपरांत पुलिस ने संबंधित नेताओं को भाषण देने की अनुमति दी ।
पुलिस नागरिकों को उनकी इच्छा के अनुसार बोलने से नहीं रोक सकती ।
न्यायमूर्ति ललिता कन्नेगंटी ने कहा कि पुलिस नागरिकों को उनकी इच्छा के अनुसार सार्वजनिक सभा में बोलने से नहीं रोक सकती । “जब राज्य सरकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित करती है, तब वह कार्यवाही कारणों के साथ तथा ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए,” ऐसे शब्दों में न्यायालय ने पुलिस को डांट लगाई ।
🚨 MAJOR UPDATE: Karnataka HC Upholds Freedom of Speech
📍 The Case: Police tried to block Kumari Harika Manjunath & @astitvam from speaking at a Hindu Sammelana in Belagavi, citing "law & order."
⚖️ The Verdict: The High Court slammed the move, ruling that past cases aren't… pic.twitter.com/Hbm0G8atGp
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) February 7, 2026
क्या है प्रकरण ?
२२ जनवरी २०२६ को दिए गए नोटिस के माध्यम से पुलिस ने आयोजकों की १३ जनवरी २०२६ की मांग को निरस्त कर दिया था । इस मांग में कुमारी हरिका मंजुनाथ तथा चक्रवर्ती सुलीबेले को ‘सनातन धर्म’ विषय पर आयोजित ३ दिवसीय सम्मेलन में भाषण देने की अनुमति मांगी गई थी । पुलिस ने कहा कि प्रस्तावित वक्ताओं के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीकृत हैं तथा उनकी उपस्थिति से कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है । यह भी बताया गया कि सुलीबेले के विरुद्ध ७ एवं हरिका के विरुद्ध १ प्रकरण पंजीकृत है ।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण श्याम ने उत्तर दिया कि पुलिस का आदेश कर्नाटक पुलिस अधिनियम, १९६३ के प्रावधानों के विरुद्ध है । यह अधिनियम पुलिस को सार्वजनिक सभाओं को नियंत्रित करने का अधिकार देता है, परंतु मनमाने ढंग से प्रतिबंध लगाने का नहीं । यह कारवाही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद १९ तथा २१ के तहत नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है । पहले भी इन दोनों वक्ताओं ने इसी प्रकार के कार्यक्रमों में भाग लिया है तथा सरकार द्वारा बताए अनुसार कोई भी अनुचित घटना नहीं घटी है, यह भी न्यायालय के संज्ञान में लाया गया ।
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण पर विचार किया जाएगा तथा उसके अनुसार आगे के आदेश दिए जाएंगे । सरकार का पूरा प्रयास किसी भी अनुचित घटना को रोकने का ही है । संबंधित वक्ताओं की उपस्थिति से पहले कानून-व्यवस्था की समस्याएं उत्पन्न हुई थीं, इसलिए सावधानी बरतना आवश्यक है, ऐसा भी न्यायालय को बताया गया ।
संपादकीय भूमिकाकर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के कारण हिन्दुत्वनिष्ठों को प्रताडित किया जा रहा है, उनके साथ अन्याय हो रहा है । न्यायालय के इस आदेश से कांग्रेस सरकार को कडा झटका लगा है । |
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