शनिशिंगणापूर में शनिपूजा की थाली के दर निश्चित !

  • ​श्रद्धालुओं की आर्थिक लूट रोकने हेतु उपाययोजना

  • ​आदेशानुसार फलक; पूजा सामग्री का विक्रय फिर भी उच्च दरों पर ही

​सोनई – शनिशिंगणापूर स्थित श्री शनिदेव के चबूतरे पर केवल तेल तथा अर्क (रुई) के पत्तों का हार अर्पण करने की अनुमति है । ऐसा होने पर भी, ग्राम के समस्त वाहन-पार्किंग स्थलों पर १५१ से ७०१ रुपये मूल्य की पूजा सामग्री की थाली के शुल्क-पत्रक के फलक राजस्व विभाग की ओर से लगाए गए हैं । ये फलक श्रद्धालुओं को भ्रमित कर रहे हैं । इसके माध्यम से श्रद्धालुओं को फंसाया जा रहा है । ग्राम में इसके पूर्व दुकानों में ५१ तथा १०१ रुपये में पूजा की थाली प्राप्त होती थी । नए शुल्क-पत्रकों के कारण श्री शनिदर्शन हेतु आए श्रद्धालुओं की आर्थिक लूट की जा रही है, ऐसा आरोप लगाया जा रहा है ।

​१. गत सप्ताह आयुक्त डॉ. गेडाम साधारण वेश धारण कर पूजा करने हेतु मंदिर आए थे । तब उन्हें १ सहस्त्र १०० रुपये की पूजा सामग्री की थाली लेने हेतु विवश किया गया । तत्पश्चात उन्होंने तत्काल बैठक कर पूजा के दर निश्चित कर वैसे फलक लगाने का आदेश दिया था ।

​२. मंडल अधिकारी विनायक गोरे ने कहा, ‘‘पूजा सामग्री के शुल्क-फलक कर्मचारियों ने लगाए हैं । पूजा सामग्री का शुल्क विक्रेताओं ने निश्चित किया है । उसमें तेल का शुल्क पृथक है । हम केवल कार्रवाई कर रहे हैं ।’’

​३. श्री शनिदेव को केवल तेल तथा अर्क (रुई) के पत्तों का हार अर्पित करना अपेक्षित होने पर भी, थाली में यंत्र, पादुका, कृष्ण (काला) वस्त्र, श्रीफल, नाल, कृष्ण पुतली, सूत्र (धागा) आदि वस्तुएं सम्मिलित कर थाली का मूल्य बढ़ाया जाता है; साथ ही, इन वस्तुओं का पुनः पुनः उपयोग किए जाने की परिवाद (शिकायत) भी श्रद्धालुओं ने की है ।

​४. अहिल्यानगर के प्रांताधिकारी सुधीर पाटिल ने कहा, ‘‘पूजा सामग्री का मूल्य तथा उसमें सम्मिलित वस्तुएं निश्चित होने से श्रद्धालुओं की आर्थिक लूट नहीं होगी । सभी ने वाहन-पार्किंग की व्यवस्था नि:शुल्क रखने की सहमति दी है । यदि कोई रसीद काटकर धन लेता है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी ।’’

​५. शिर्डी-शिंगणापूर मार्ग पर अवैध यात्री परिवहन किया जाता है । ये वाहन जिन दुकानों पर रुकते हैं, वहां चाय, स्वल्पाहार तथा पूजा सामग्री लेने की विवशता की जाती है, ऐसा मुंबई के श्री. रामेश्वर चिंचोळे नामक श्रद्धालु ने बताया ।

संपादकीय भूमिका 

मंदिर सरकारीकरण के दुष्परिणाम ! हिन्दुओं को धर्मशिक्षा न होने के कारण हिन्दुओं के मंदिरों में श्रद्धालुओं का शोषण किया जाता है, यह गंभीर विषय है !