National Ghar Wapsi Day : १९ जून को ‘राष्ट्रीय घरवापसी दिन’ के रूप में मनाएं !

  • छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा किए गए धर्मांतरितों के शुद्धीकरण को ३५० वर्ष पूर्ण !

  • हिन्दू जनजागृति समिति का समस्त हिन्दू संगठनों को आह्वान

(घरवापसी अर्थात हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश)

हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज एवं पहले सेनापति नेताजी पालकर का शुद्धीकरण करवाते हुए (प्रातिनिधीक चित्र) ; घेरे में श्री. रमेश शिंदे

मुंबई – हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं थे, अपितु वे एक महान धर्मरक्षक तथा दूरदर्शी युगपुरुष थे । आज से ३५० वर्ष पूर्व, अर्थात १९ जून १६७६ के दिन छत्रपति शिवाजी महाराज ने पराक्रमी सेनापति नेताजी पालकर का ‘शुद्धीकरण’ कर उन्हें पुनः हिन्दू धर्म में सम्मानपूर्वक प्रवेश दिलाया था । इस अभूतपूर्व एवं ऐतिहासिक घटना को १९ जून को ३५० वर्ष पूर्ण हो रहे हैं । इस ऐतिहासिक त्रिशताब्दी सुवर्णमहोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में यह दिन देशभर में ‘राष्ट्रीय घरवापसी दिन’ के रूप में मनाया जाए, ऐसा आह्वान हिन्दू जनजागृति समिति ने समस्त हिन्दू संगठनों से किया है ।

समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने इस संदर्भ में कहा कि,आज ३५० वर्षों के पश्चात भी यह इतिहास हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तथा मार्गदर्शक है । विविध प्रलोभनों, दबाव अथवा उत्पीडन के शिकार होकर लाखों हिन्दू भाई बहन धर्मांतरित हुए हैं । वर्तमान समय में ‘लव जिहाद’ जैसे सुनियोजित संकट की बलि चढकर अनेक हिन्दू युवतियां परधर्म में खींची जा रही हैं । ‘वह चली गई तो जाने दो, अब उसका एवं हमारा कोई संबंध नहीं है’, इस मानसिकता का हिन्दू समाज को त्याग करना चाहिए । प्रेम के असत्य जाल में फंसाकर छली गई हिन्दू कन्याओं एवं बहनों को पुनः सम्मानपूर्वक हिन्दू धर्म तथा समाज में सुरक्षित स्थान देने के लिए इस ऐतिहासिक दिन का स्मरण करना अत्यंत आवश्यक है । छत्रपति शिवाजी महाराज का यही आदर्श सामने रखकर समस्त हिन्दू समाज, संतों तथा संगठनों को आगे आने की आवश्यकता है । जो बांधव तथा विशेषकर जो बहने मूल प्रवाह (हिन्दू धर्म) में लौट आना चाहती हैं, उनके लिए हमें अपने द्वार एवं मन खोल देने चाहिए ।

नेताजी पालकर का इतिहास

स्वराज्य के प्रथम सेनापति नेताजी पालकर को मुगलों ने कपटपूर्वक बंदी बना लिया था । अत्यंत यातनाएं देकर उन्हें बलपूर्वक मुसलमान बनाया गया तथा उनका नाम ‘मोहम्मद कुली खान’ रखा गया । अनेक वर्षों तक परधर्म एवं परभूमि में रहने के उपरांत भी नेताजी का मन स्वराज्य के लिए व्याकुल था । जब वे मुगलों के चंगुल से मुक्त होकर पुनः रायगढ पर छत्रपति शिवराया के चरणों में आए, तब महाराज ने धर्मशास्त्र के अनुसार उनका विधिवत ‘शुद्धीकरण’ किया । जेधे शकावली के अनुसार शके १५९८, आषाढ वद्य ४ (१९ जून १६७६) के दिन नेताजी पालकर को पुनः हिन्दू धर्म में स्वीकार किया गया ।