पुणे की भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी की लोकसभा में सुदृढ़ मांग !

नई दिल्ली – पुणे से भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ने कुछ दिन पूर्व ही लोकसभा में बोलते हुए मांग की कि, सामाजिक माध्यमों से हिन्दू देवी-देवताओं के विरुद्ध एआई (AI) निर्मित एवं छेडछाड किए गए अश्लील चित्रों का धडल्ले से उपयोग किया जा रहा है । यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है, जिसका उद्देश्य केवल हिन्दुओं की श्रद्धा को कुचलना, सांस्कृतिक एकता को निर्बल बनाना, तथा देश में धार्मिक तनाव उत्पन्न करना है ।
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग से उत्पन्न हुई इस नई चुनौती का सामना करते हुए सरकार को तुरंत कठोर कार्रवाई करनी चाहिए । सांसद कुलकर्णी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धार्मिक सामग्री बनाते समय उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने एवं ‘एआई’ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के माध्यम से होने वाली धार्मिक मानहानि के विरुद्ध ‘हिन्दू आस्था (श्रद्धा) संरक्षण कानून’ तत्काल बनाए जाने की भी मांग की ।
मांस के अतिरिक्त अन्य वस्तुओं से हलाल प्रमाणीकरण हटाओ ! – सांसद मेधा कुलकर्णी की मांग
सांसद मेधा कुलकर्णी ने लोकसभा में मांस के अतिरिक्त अन्य वस्तुओं पर हलाल प्रमाणीकरण को हटाने की मांग की । उन्होंने कहा ‘हलाल’ शब्द एक विशिष्ट धर्म एवं श्रद्धा से जुडी संकल्पना है, जो केवल मांसाहार से संबंधित है । भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है । भारत में अन्य श्रद्धा रखने वाले लोग भी रहते हैं, जिनकी श्रद्धा हलाल के विपरीत है । ऐसे मांसाहारी लोगों पर हलाल प्रमाणित मांसाहार थोपना, धर्मनिरपेक्ष देश में उचित नहीं लगता तथा यह संविधान के विरुद्ध है । मांस के अलावा अन्य पदार्थों को हलाल प्रमाणीकरण की क्या आवश्यकता है ? दूध, चीनी, तेल जैसे खाद्य पदार्थों, दवाओं एवं सौंदर्य प्रसाधन सामग्री को इस प्रमाणीकरण की क्या आवश्यकता है ? इतना ही नहीं, निर्माण सामग्री, सीमेंट, स्टील, प्लास्टिक एवं खनिज साइट्स को भी हलाल प्रमाणपत्र देना अतार्किक तथा संदेह उत्पन्न करने वाला है । भारत में ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) के पास खाद्य प्रमाणीकरण के अधिकार हैं । दवाओं के लिए भी ‘FDA’ (फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन – अन्न एवं औषधि प्रशासन) जैसी सरकारी प्रमाणीकरण व्यवस्था है । ऐसी व्यवस्था होते हुए, किसी धार्मिक संस्था को ऐसे अधिकार क्यों होने चाहिए ? हलाल इंडिया लिमिटेड, हलाल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जमियत उलेमा-ए-हिन्द हलाल ट्रस्ट, जमियत उलेमा-ए-महाराष्ट्र जैसी धार्मिक संस्थाएं प्रमाणीकरण देकर उसके लिए शुल्क ले रही हैं । ऐसा क्यों ? एवं वे खाद्य विशेषज्ञ भी नहीं हैं । ७० से ८० ऐसी नकली (फर्जी) संस्थाएं पाई गई हैं, जो झूठे प्रमाणपत्र दे रही हैं, जिनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश राज्य में याचिका प्रविष्ट की गई है ।
सांसद मेधा कुलकर्णी ने इस समय की गईं मांगें
१. यदि हलाल में श्रद्धा रखने वाले समाज की सुविधा के लिए मांस उत्पादों पर हलाल प्रमाणपत्र देना है, तो FSSAI, FDA के अंतर्गत सरकारी व्यवस्था स्थापित की जाए तथा प्रमाणीकरण का शुल्क सरकारी खजाने में जमा हो ।
२. निजी संस्थाओं एवं गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को प्रमाणीकरण करने का अधिकार तत्काल रद्द किया जाए ।
३. आवश्यकतानुसार इस्लाम के एक विशेषज्ञ सदस्य को सरकार वेतन देकर नियुक्त कर सकती है, जो सरकारी विशेषज्ञ समिति के साथ काम करेगा ।
४. इस प्रमाणीकरण से संबंधित शुल्क की राशि सरकारी खजाने में जमा होनी चाहिए ।
५. नकली (फर्जी) संस्थाओं, साथ ही देशद्रोह से संबंधित संस्थाओं पर कार्रवाई होनी चाहिए ।
६. मांस के अतिरिक्त अन्य वस्तुओं पर हलाल प्रमाणीकरण हटा दिया जाना चाहिए ।
संपादकीय भूमिकामूलतः, सरकार को यह किसी के द्वारा बताया जाना नहीं चाहिए, अपितु सरकार से यह अपेक्षित है कि वह स्वयं हिन्दुओं के देवताओं की रक्षा के लिए कानून बनाए ! |
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