१. श्रीकृष्ण के विश्वरूप दर्शन का समय निकट आने का संकेत !
‘शंखनाद महोत्सव के माध्यम से युद्ध का शंखनाद होना और शंखनाद महोत्सवरूपी रथ पर सनातन राष्ट्र के ध्वज का आरोहण होना’, यह भगवान श्रीकृष्ण के विश्वरूप दर्शन का समय निकट आने का संकेत है ।
२. प्रकृति और युद्ध के माध्यम से प्रत्यक्ष पंचमहाभूत तथा सभी देवताओं के साथ भगवान श्रीकृष्ण के विश्वरूप दर्शन होने का समय समीप आया है !
जिनकी पांचों उंगलियों पर सदैव पंचमहाभूत विद्यमान रहते हैं, ‘जल (क्षीरसागर)’ जिनका निवासस्थान है, ‘अग्नि’ जिनका शरीर है, जिनका श्वास ‘वायु’ है, आर्तता से किया जिनका स्मरण संकटनाशक है, जिनका स्मरण ‘आनंदप्राप्ति’ व विस्मरण ‘दुःख’ है, ऐसे श्रीकृष्ण के विश्वरूप दर्शन प्रकृति एवं युद्ध के माध्यम से प्रकट होने का समय आ गया है ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?