उत्तरभारत में ‘तनाव मुक्ति के लिए विविध स्थानों पर अध्यात्म’ विषय पर प्रवचन

फरीदाबाद (हरियाणा) – यहां ‘मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज कॉलेज’ के डाएट एवं न्यूट्रिशन डिपार्टमेंट के विद्यार्थियों के लिए सनातन संस्था द्वारा मार्गदर्शन किया गया । अधिवक्ता (श्रीमती) मणी मुंजाल यादव ने विद्यार्थियों को ‘स्वभावदोष-निर्मूलन प्रक्रिया कर आनंदी कैसे रह सकते हैं ?’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया । मार्गदर्शन में उन्होंने बताया कि ‘‘वर्तमान में हमें बहुत तनाव का सामना करना पड रहा है, उसका कारण क्या है ? हम अपने दोष जैसे क्रोध, आत्मविश्वास का अभाव, अपनी छवि के कारण बोल नहीं पाना, जैसे कि मैंने किसी को कुछ पूछा, तो वे मेरे बारे में क्या सोचेंगे ? इत्यादि दोषों को दूर करने के लिए हम स्वभावदोष-निर्मूलन प्रक्रिया कर कैसे आनंदी रह सकते हैं ।’’ इसका लाभ ८० विद्यार्थियों ने लिया । आगे उन्होंने मार्गदर्शन किया कि ‘‘हम कैसे नियमित ईश्वर का नामजप कर तथा उनके आंतरिक सान्निध्य में रहकर आनंद में रह सकते हैं, तनाव को कम कर सकते हैं ।’’
क्षणिकाएं
१. प्रोफेसर (श्रीमती) अंकिता शर्मा ने इस मार्गदर्शन के आयोजन में विशेष सहयोग किया ।
२. हेड ऑफ डिपार्टमेंट की डॉ. दिव्या संघवी ने सनातन संस्था के उपक्रम का आयोजन करेंगी ।
तनाव से त्रस्त विश्व का समाधान – सनातन जीवनशैली ! – आनंद जाखोटिया

जबलपुर (मध्य प्रदेश) – ‘‘अनेक सुविधाएं प्राप्त होने के पश्चात आज जीवन में बढता दुःख तथा तनाव कथित आधुनिक जीवनशैली का ही परिणाम है । इसके दुष्परिणामों को भली-भांति अनुभव कर चुका विश्व अब शांति एवं संतुलन के लिए सनातन संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहा है । सनातन संस्कृति व्यापार नहीं, अपितु परिवार भाव को प्रबल करती है । इसलिए तनावग्रस्त समाज को आनंदमय एवं संतुलित बनाने के लिए हमें सनातन जीवनशैली को अपनाना होगा’’, ऐसा प्रतिपादन महाराष्ट्र व्यायामशाला में आयोजित ‘मंथन’ मासिक प्रबोधन कार्यक्रम में हिन्दू जनजागृति समिति के मध्य प्रदेश एवं राजस्थान समन्वयक श्री. आनंद जाखोटिया ने किया ।
श्री. जाखोटिया ने कहा कि ‘‘मैकाले शिक्षा व्यवस्था तथा अंग्रेजों द्वारा गुरुकुल पद्धति को नष्ट करने के कारण सनातन जीवनशैली का उपहास किया गया; किंतु सनातन धर्म शाश्वत, परिपूर्ण, प्रकृति एवं संस्कृति से जुडा हुआ है । आधुनिक जीवनशैली भोग, सुख तथा ‘स्व’ तक सीमित है, जबकि सनातन जीवनशैली स्वयं के साथ-साथ प्रकृति, परिवार, समाज एवं राष्ट्र के सुख पर केंद्रित है ।’’
उन्होंने खेद व्यक्त किया कि ‘‘आज त्योहारों को केवल मनोरंजन तक सीमित कर दिया गया है, आज आवश्यकता है कि हम भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सनातन संस्कृति को समझें, उसे जीवन में उतारें तथा विश्व के समक्ष प्रस्तुत करें ।’’
इस अवसर पर अध्यक्ष श्री. प्रकाश पंगेरकर, सचिव अविनाश हळबे तथा संरक्षक मंडल के वरिष्ठ सदस्य श्री. धनंजय बेहरे उपस्थित थे ।
सैदपुर व्यापारियों के लिए प्रवचन
वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – के बडागांव में गांगकला भट्टा के व्यापारियों के लिए, सैदपुर (गाजीपुर) में कौशिक उपवन में व्यावसायिक, पाठक एवं हितचिंतकों के लिए तथा सैदपुर (गाजीपुर) के आर.जे.पी. स्कूल के शिक्षक तथा कर्मचारियों के लिए यह विषय लिया गया । सैकडों जिज्ञासुओं ने इस विषय का लाभ लिया ।
हरियाणा में शिक्षकों के लिए प्रवचन
बल्लभगढ (हरियाणा) – यहां के छत्रपति प्ले स्कूल में ‘आनंदमय एवं तनावमुक्त जीवन हेतु अध्यात्म’, इस विषय पर सनातन संस्था की ओर से शिक्षकों के लिए प्रवचन का आयोजन किया गया । इसके अंतर्गत संस्था की श्रीमती वंदना सचदेवा ने ‘हम तनाव मुक्त जीवन कैसे जी सकते हैं ?’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया ।
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संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
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