Vita Ganeshotsav : विटा (जिला सांगली) में धर्मान्धों द्वारा गणेशोत्सव मंडल के ३ कार्यकर्ताओं पर प्राणघातक आक्रमण !

  • आरती एवं भक्ति गीत चलाने का धर्मान्धों ने किया विरोध

  • हिन्दुओं में भय फैलाने का प्रयास

धर्मान्धों द्वारा गणेशोत्सव मंडल के ३ कार्यकर्ताओं पर प्राणघातक आक्रमण

सांगली, १९ सितम्बर (वार्ता.) – विटा (जिला सांगली) के आई.टी.आई महाविद्यालय क्षेत्र के ‘एकता गणेशोत्सव मंडल’ के ३ कार्यकर्ताओं पर धर्मान्धों ने प्राणघातक आक्रमण किया । अनंत चतुर्थी के दिन श्री गणेशमूर्ति विसर्जन के पश्चात धर्मान्ध मुसलमानों ने ‘एकता गणेशोत्सव मंडल’ के पदाधिकारी श्री धनराज कातारी सहित २ कार्यकर्ताओं पर घातक आक्रमण किया । गणेशोत्सव के आरंभ से ही धर्मान्ध इस गणेशोत्सव को रोकने का प्रयत्न कर रहे थे । धर्मान्धों के कृत्य इतने आतंकी थे कि इस क्षेत्र के हिन्दुओं ने पलायन आरंभ कर दिया है, ऐसा बताया जा रहा है । इस घटना को दबाने का प्रयत्न हुआ, ऐसी चर्चा भी नागरिकों में है । प्राणघातक आक्रमण करनेवाले धर्मान्धों को एक ही दिन में जमानत भी मिल गई ।

श्री धनराज कातारी के मस्तक पर धर्मान्धों द्वारा किए गए गहरे वार

गणेशोत्सव न मनाने हेतु दबाव डालकर मुसलमानों ने मुझ पर आक्रमण किया ! – धनराज कातारी

इस विषय में ‘एकता गणेशोत्सव मंडल’ के पदाधिकारी श्री धनराज कातारी ने कहा –
१. प्रति वर्ष की भांति ‘एकता युवा मित्र गणेशोत्सव मंडल’ की ओर से गणेशोत्सव आयोजित किया गया था । उस समय क्षेत्र के धर्मान्ध मुसलमानों ने गणेशोत्सव को रोकने हेतु धमकी दी कि ‘कार्यकर्ता यहां गणेशोत्सव का मंडप नहीं लगाएंगे तथा यदि मंडप लगाया, तो मस्जिद की नमाज़ के समय भक्ति गीत नहीं बजाएंगे, आरती नहीं करेंगे तथा आरती इत्यादि ध्वनिवर्धक पर नहीं चलाएंगे ।’

२. ८ सितम्बर को श्री गणेशमूर्ति के विसर्जन के पश्चात उसी रात्रि ८.१५ बजे धर्मान्ध मुसलमानों ने मुझ पर तलवार, कोयता तथा डण्डों से प्राणघातक आक्रमण किया । उस समय मेरे भ्राता श्री राज अमर कातारी तथा मित्र श्री गणेश कांबळे ने शोर मचाकर मुझे छुड़ाया ।

३. इस आक्रमण में मेरे मस्तक पर गंभीर आघात हुआ । मस्तक पर ३८ टांके लगे हैं तथा हाथ की अस्थि भंग हुई है ।

४. मेरे मित्र एवं सहकर्मी श्री हर्षद घाडगे सहित एक अन्य कार्यकर्ता पर भी धर्मान्धों ने आक्रमण किया ।

मुसलमानों की मारपीट में घायल हुए श्री हर्षद घाडगे

५. इस आक्रमण के पश्चात भीड़ एकत्र कर भीडतंत्र द्वारा हम पर यहां दबाव डालने का प्रयास हो रहा है ।

६. इतना बड़ा आक्रमण होने पर भी आरोपियों को एक ही दिन में जमानत मिल गई । पुलिस को उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करनी चाहिए थी । जमानत मिलने के पश्चात धर्मान्धों ने विटा नगर में फेरी निकालकर आतिशबाजी की ।

प्राणघातक आक्रमण होने पर भी पुलिस ने धारा ३०७ नहीं लगाई !

विटा पुलिस ने आक्रमण करनेवाले धर्मान्ध मुसलमानों पर विविध धाराओं के अंतर्गत अपराध प्रविष्ट किए हैं, किन्तु ‘भीड़ द्वारा प्राणघातक मारपीट’ (मॉब लिंचिंग) तथा ‘जाने से मारने का प्रयास’ (धारा ३०७) का अपराध प्रविष्ट नहीं किया । इतना ही नहीं, इस घटना में मारपीट करनेवाले कुल २० धर्मान्ध होते हुए भी वास्तव में केवल ८ धर्मान्धों पर अपराध प्रविष्ट किए गए हैं । इससे ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस ने आक्रमण करनेवाले धर्मान्ध मुसलमानों को बचाने का प्रयास किया है, ऐसी चर्चा है ।

धर्मान्ध आरोपियों के नाम : 

टीपु सुलतान गुट के रहीम राज कादरी, जमीर मुजावर, रहीम मुजावर, कैफ मुल्ला, हुसैन मुल्ला, सोहेल पटेल, यासीन मुजावर, नवाज मुजावर तथा अन्य ३० से ४० लोग

हिन्दुओं में भय उत्पन्न कर क्षेत्र को मुसलमानबहुल बनाने की योजना ! – स्थानीय हिन्दुओं का मत

‘आई.टी.आई महाविद्यालय क्षेत्र में रहनेवाले हिन्दुओं में भय उत्पन्न कर उन्हें यहां से पलायन करने हेतु बाध्य करना तथा इस क्षेत्र को मुसलमानबहुल बनाना, यही इस आतंक का उद्देश्य है’, ऐसा स्थानीय हिन्दुओं का मत है । गणेशोत्सव मंडल के कार्यकर्ताओं पर धर्मान्धों ने मारपीट की, उसके पश्चात स्थानीय पुलिस के समक्ष ‘एकता गणेशोत्सव मंडल’ के कार्यकर्ताओं ने शिकायत की ; किन्तु पुलिस ने शिकायत प्रविष्ट करने में विलंब किया तथा परस्पर विरोधी शिकायतें प्रविष्ट कीं ।
(पुलिस विलंब क्यों करती है ? क्या वे धर्मान्धों से डरते हैं ? – संपादक)

संपादकीय भूमिका 

  • ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो क्या विटा भारत में है अथवा पाकिस्तान में ? ऐसी घटनाओं के विषय में कांग्रेस, साम्यवादी, समाजवादी दल, प्रगतिविरोधी, तथाकथित धर्मनिरपेक्ष अथवा इस्लामी संगठन मुख तक नहीं खोलते, यह ध्यान रखें !
  • राज्य में हिन्दुत्वनिष्ठ शासन होते हुए भी धर्मान्धों का ऐसा साहस कैसे हो रहा है ? शासन को चाहिए कि ऐसे लोगों को कठोर दंड मिले इसके लिये प्रयत्न करे ! हिन्दुओं को भी संगठित होकर ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई हेतु शासन को बाध्य करना चाहिए !
  • ऐसी घटनाओं को समाचार माध्यम प्रसिद्ध नहीं करते, यह भी ध्यान रखें !