देश को नरेंद्र मोदी जैसा नेता देनेवाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत !

११ सितंबर को प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवतजी का ७५ वां जन्मदिवस है । उसके उपलक्ष्य में …

भारत में सर्वाधिक अधिकार राष्ट्रपति के पास होते हैं, उसके उपरांत दूसरे स्थान पर प्रधानमंत्री आते हैं । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अधिकारों की सीमाएं सुस्पष्टरूप से सुनिश्चित की गई है; परंतु एक व्यक्ति ऐसा है, जिनके अधिकारों की सीमा सुनिश्चित नहीं है । वे सामान्य नागरिकों की भांति ही रहते हैं, वे हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत ! राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत ११ सितंबर को ७५ वर्ष के हुए हैं । वे यही डॉ. भागवत हैं, जो भारत को तत्कालिन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यंकाल से नरेंद्र मोदी के युग में लेकर आए । वर्ष २०१४ में डॉ. भागवत ने प्रधानमंत्री पद के लिए सभी प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया और अंततः मोदी ही प्रधानमंत्री बने ।

प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवतजी एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

१. रा.स्व. संघ के कार्य को व्यापक स्तर पर ले जाने में अग्रणी !

डॉ. मोहनजी भागवत जब संघ के सरसंघचालक बने, उस समय भाजपा की स्थिति बहुत ही दयनीय थी । संघ के सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय पुराने हो चुके थे, जबकि किसान संगठनों पर साम्यवादियों का वर्चस्व बढ गया था । डॉ. भागवत ऐसे प्रथम संघप्रमुख थे, जिन्होंने राजनीति में होनेवाले गठजोड बहुत निकटता से देखे । कांग्रेस से भाजपा में आनेवाले नेताओं के वे समर्थक नहीं थे; परंतु उन्होंने कभी अपना विरोध घोषित नहीं किया, इसके विपरीत जब ज्योतिरादित्य शिंदे भाजपा में आए, उस समय उन्होंने ‘अपने घर में पुनः स्वागत है’, ऐसा वक्तव्य दिया ।
डॉ. मोहनजी भागवत के नेतृत्व में ही संघ ने अपने विद्यालयों में अंग्रेजी को भी महत्त्व देना आरंभ किया । डॉ. भागवतजी ने प्रसिद्धि का महत्त्व भी पहचाना । उनके अनेक भाषण अंग्रेजी भाषा में भी उपलब्ध हैं, जो आज भी सुनने के लिए बडी सहजता से उपलब्ध हैं । इसके कारण उनके विचार विदेशों तक पहुंचे । आज संघ जितना व्यापक बन गया है, वह उतना व्यापक पहले कभी भी नहीं था । वर्तमान समय में महिला, किसान एवं छात्र इन तीनों स्तरों पर संघ के संगठन का बडा कार्य चल रहा है ।

२. प.पू. सरसंघचालक डॉ. भागवतजी स्वयं ही हैं एक मापदंड !

भाजपा आज जितना शक्तिशाली है, उतना वह पहले कभी नहीं था । उसका श्रेय केंद्रीय गृहमंत्री तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शहा को निश्चितरूप से जाता है; परंतु इसमें डॉ. मोहनजी भागवत की अनदेखी नहीं की जा सकती । आप उनके वक्तव्यों की आलोचना कर सकते हैं; परंतु ‘किंग मेकर’ के रूप में उन्होंने जो भूमिका निभाई है, उसका कोई तोड नहीं है ।

संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार एवं पू. गोळवलकरगुरुजी से उनकी तुलना करना उचित नहीं होगा; क्योंकि डॉ. भागवतजी स्वयं ही एक मापदंड बन गए हैं । संघ के इतिहास का कोई भी अध्याय उनके उल्लेख के बिना पूरा नहीं होगा, साथ ही वे ऐसे प्रथम संघप्रमुख हैं, जिन्होंने अपनी आयु के ७५ वर्ष पूरे कर भी इस पद पर कार्य करना जारी रखा है ।

वर्तमान समय में भारत देश वैश्विक शक्तियों की बराबरी में खडा है । इसका श्रेय देश के नेतृत्व को तथा उस नेतृत्व को तैयार करनेवाले व्यक्ति का भी है । देश को नरेंद्र मोदी जैसा नेता देने के लिए देश का भविष्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का तथा प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत का सदैव आभारी रहेगा ! प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत को दीर्घायु प्राप्त हो तथा देश के लिए उनका मार्गदर्शन सदैव उपलब्ध रहे, यही शुभकामनाएं !
– जयसिंग मोहन, पुणे