वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने दी जानकारी :

बेंगलुरु (कर्नाटक) – ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय भारत ने पाकिस्तान को बडी हानि पहुंचाई । हमने उनके ५ लडाकू विमान एवं एक ‘अवाक्स’ ( हवाई चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली के लिए एक बडा विमान) विमान गिराए, ऐसी जानकारी वायुसेना प्रमुख (एयर चीफ मार्शल) ए.पी. सिंह ने २ महीने उपरांत यहां एक कार्यक्रम में आधिकारिक रूप से दी । इस समय उन्होंने आक्रमणों के कुछ छायाचित्र भी दिखाए ।
Today, in Bengaluru, Karnataka, Chief of the Air Staff, Air Chief Marshal AP Singh spoke in detail on #OperationSindoor.
The before and after images at Bahawalpur – JeM HQ show the extent of damage caused by IAF.
(Images Source: Indian Air Force) pic.twitter.com/pbYJJbaUdb
— ANI (@ANI) August 9, 2025
एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि,
१. हमारी हवाई सुरक्षा प्रणाली ने उत्कृष्ट कार्य किया है । हमने कुछ दिन पूर्व ही खरीदी ‘एस-४००’ हवाई सुरक्षा प्रणाली निर्णायक प्रमाणित हुई है । पाकिस्तान के पास लंबी दूरी के लक्षित बम थे; परंतु वे उनमें से एक भी उपयोग नहीं कर पाए; क्योंकि वे हवाई सुरक्षा में भेद नहीं कर सकते थे ।
२. विमानों के अतिरिक्त हमने बडी संख्या में यूएवी (अनमैंड एयर व्हीकल – मानवरहित विमान) एवं ड्रोन भी नष्ट किए । उनके कुछ प्रक्षेपास्त्र हमारी सीमा में गिरे थे । हमने उनके अवशेष इकट्ठा किए हैं । इन अवशेषों का अध्ययन चल रहा है । जिससे यह जानकारी मिल सकेगी कि वे कहां से छोडे गए थे ? उन्होंने कौन सा मार्ग अपनाया था ? प्रक्षेपास्त्र छोडनेवाली प्रणाली कैसी है तथा उसकी क्षमता कितनी है ?
३. पाकिस्तान के बहावलपुर में हुए आक्रमण के पहले एवं पश्चात के छायाचित्र सबके सामने हैं । वहां कुछ भी शेष नहीं रहा है । ये छायाचित्र केवल उपग्रह से नहीं लिए गए । स्थानीय माध्यमों ने ध्वस्त भवनों के अंदर के छायाचित्र भी दिखाए हैं ।
४. इस सफलता का एक प्रमुख कारण राजनीतिक इच्छाशक्ति थी । हमें बहुत ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे । हमें पूर्ण स्वतंत्रता थी । हमें कितना दूर जाना है, इसका हम निर्णय कर रहे थे । हमें योजना बनाने तथा कार्रवाई करने की पूर्ण स्वतंत्रता थी । तीनों सेनाओं में समन्वय था । चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस – तीनों सैन्यदलों का प्रमुख) इस पद से वास्तव में अंतर पडा । वे हमें एक साथ लाने के लिए थे । सभी प्रणालियों को एक साथ लाने में राष्ट्रीय सुरक्षा परामर्शदाताओं ने भी बडी भूमिका निभाई ।
५. यह एक उच्च प्रौद्योगिकी का युद्ध था । ८० से ९० घंटों के युद्ध में, हम इतनी हानि कर सके कि उन्हें स्पष्ट रूप से अनुभव हुआ कि यदि वे इसे ऐसे ही जारी रखते हैं, तो पाक को इसका अधिक मूल्य चुकाना पड़ेगा; इसलिए उसने पीछे हटने का निर्णय लिया ।
संपादकीय भूमिकाभारतीय सेना के इस पराक्रम के लिए उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है ! अब उन्हें पूरी छूट देकर पाक को नष्ट करके भारत से जिहादी आतंकवाद को सदा के लिए समाप्त करना चाहिए, ऐसा ही भारतीयों को लगता है ! |
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