वैज्ञानिकों के शोधकार्य और ऋषि-मुनियों के ज्ञान में अंतर !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘किसी एक सतही भौतिक खोज के लिए वैज्ञानिकों को वर्षों तक शोधकार्य करना पडता है । उसमें आगे चलकर अन्य वैज्ञानिक बदलाव भी करते हैं । इसके विपरीत ऋषि-मुनियों को सूक्ष्म से मिलनेवाले ज्ञान के कारण शोध कार्य नहीं करना पडता, बल्कि क्षणभर में ही सूक्ष्म से भी सूक्ष्म सभी प्रश्नों के उत्तर मिल जाते हैं; और वे अंतिम सत्य होने के कारण कोई उसमें बदलाव नहीं कर सकता ।’

– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक संपादक, ʻसनातन प्रभातʼ नियतकालिक