
भारत की प्रस्थापित व्यवस्थाएं हिन्दुओं में व्यापक स्तर पर जागृति न हो; इसका ध्यान रखती आई हैं । इस देश पर बीते एक दशक से भले ही हिन्दुत्वनिष्ठ भाजपा का शासन है, तब भी प्रशासनिक व्यवस्था साम्यवादी तथा उपनिवेशवादी दृष्टिकोण रखनेवाली होने से वह भारत के हित के लिए मारक सिद्ध हो रही है । वर्ष २०१४ से पहले न्यूनतम ६ दशकों तक भारत का व्यापक कथानक इस व्यवस्था को संचालित करनेवाले साम्यवादियों के हाथ में था । वह इतना था कि ११ वर्ष बीत जाने के उपरांत अब जाकर कहीं नई शिक्षा नीति का कार्यान्वयन हो रहा है, तब भी ‘हिन्दू’ भारत पर हो रहे ऐतिहासिक ‘अन्यायों को’ केंद्र सरकार अभी भी पूरा न्याय नहीं दिला पाई है । ‘जो अपना इतिहास भूल जाता है, उसे अपने भूगोल को भी त्याग देना चाहिए’, ऐसा जो कहा जाता है, वह भारत के लिए सटीकता से लागू होता है । वर्तमान में नए सिरे से ऐसा प्रयास किया जा रहा है । भौतिकी के एक प्रतिभावान प्राध्यापक नीरज अत्री ! अल्बर्ट आईंस्टाइन, नील्स बोर, माइकल फैरडे, इर्विन स्क्रोडिंजर जैसे भौतिकी के महान वैज्ञानिकों के आविष्कार तथा उस पर आधारित विकसित प्रौद्योगिकी छात्रों को सिखाने में अपनी प्रतिभा को जी जान से लगाकर अत्यंत महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक कार्य करनेवाले इस प्राध्यापक को यह सब छोडकर इतिहास में प्रवेश करने की इच्छा हुई ! इसका कारण है भारतीयों में अर्थात ही हिन्दुओं में स्थित हीनता की मानसिकता उद्दिपित करनेवाली वर्तमान भारतीय शिक्षा प्रणाली ! अति आधुनिक जीवनशैली अपनानेवाले भारतीय समाज को न्यूनतम हिन्दू बुद्धिजीवियों के मन में तो यह प्रश्न निश्चित ही उठना चाहिए कि ‘इस प्राध्यापक को ऐसा करने की इच्छा क्यों हुई ?’; परंतु वह प्रश्न उनके मन में उठने के लिए उसकी कहानी विश्व के सामने लाई जानी चाहिए । कुछ दिन पूर्व प्रदर्शित ‘हिस स्टोरी ऑफ इतिहास’ फिल्म को समाज के सामने आने न देने के अघोषित योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं । इस फिल्म को अच्छे अथवा दर्शकों के लिए सुविधाजनक हो, ऐसे सिनेमाघर मिलने न देना, ऐन दोपहर में अथवा देर रात को इस फिल्म का ‘शो’ निर्धारित करना, इस प्रकार से इस फिल्म का जानबूझकर दमन करने का षड्यंत्र रचा गया है ।

दुष्प्रचार की पराकाष्ठा !
पिछली शताब्दी के बंगाल के प्रसिद्ध इतिहासकार आर.सी. मजूमदार कहते थे, ‘यह अत्यंत दुखद है कि इतिहास का विकृतीकरण अब राजनेताओं तक सीमित नहीं रहा है, अपितु व्यावसायिक इतिहासकार भी यह काम कर रहे हैं ।’ यह वर्ष १९८० से पूर्व की बात है ! वर्ष २०२५ के आते-आते सच्चा इतिहास समाज तक पहुंचने न देने की स्थिति उससे भी अधिक संकटकारी तथा हिन्दुओं को हानि पहुंचानेवाली है । ‘हिस स्टोरी ऑफ इतिहास’ फिल्म से विगत १५० वर्षों से भारत के यथार्थ इतिहास को हिन्दू समाज से छिपाए रखने के कुटील षड्यंत्रों को उजागर करने का सुंदर प्रयास किया गया है । प्रा. नीरज अत्री द्वारा लिखित ‘ब्रेनवॉश्ड रिपब्लिक’ पुस्तक पर आधारित यह फिल्म है । उनकी पुस्तक ने ‘वैचारिक आतंकवाद’ की पोल खोल दी है । उन्होंने इसमें यह स्पष्ट किया है कि ‘एन.सी.ई.आर.टी.’ के पाठ्यक्रम लिखनेवाले अच्छे इतिहासकार नहीं हैं, अपितु वे दुष्प्रचारक (प्रोपेगैंडिस्ट) हैं । इन कथित लेखकों ने भारत के इतिहास के विकृतीकरण की चरमसीमा लांघ दी है । इस माध्यम से हमारे संस्कारक्षम लाखों छात्रों को उनके पूर्वज, संस्कृति तथा देश का द्वेष एवं अत्यंतिक तिरस्कार करने के लिए अक्षरश: प्रशिक्षित किया गया । उसके कारण ही हमारे यहां ‘अकबर’, ‘टीपू सुल्तान’ जैसे राजा गौरवशाली राजा हैं, जबकि ‘छत्रपति शिवाजी महाराज’ एवं ‘भगत सिंह’ आतंकवादी प्रमाणित होते हैं । ‘मनुस्मृति’, ‘वेद-उपनिषद’ अत्यंत जटिल, महिलाविरोधी तथा भेदभाव को बढावा देनेवाले धर्मग्रंथ बन जाते हैं ।
सत्य की ओर अग्रसर !
वर्तमान समय में ‘सोशल मीडिया’ के कारण पूरा विश्व हमारे तलुवे पर समाया है । उसके कारण ही हिन्दू जनमानस को भले ही उनकी कोमल आयु में उनकी संस्कृति एवं परंपरा को हीन मानने के संस्कार मिले हों, तब भी कुछ मात्रा में उसे मिटाने के प्रयास हो रहे हैं । पहले हिन्दुओं की आंखों पर चढाए गए ‘साम्यवादी’ चश्मे को उतारने का प्रयास उतना सफल नहीं हो पाता था; परंतु इस अज्ञान का स्थान अब चरणबद्ध पद्धति से संभ्रमावस्था, शंका तथा आगे जाकर गहरे संदेह ने लिया । ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘द केरल स्टोरी’ आदि फिल्मों के माध्यम से हिन्दू धर्म एवं हिन्दुओं के साथ किस प्रकार अन्याय एवं अत्याचार हुए यह सामने
आया । वर्ष १९९० के दशक में कश्मीरी हिन्दुओं का वंशसंहार तथा हिन्दुओं के अस्तित्व पर संकट बना ‘लव जिहाद’, इन वर्तमान काल के षड्यंत्रों का रहस्योद्घाटन करनेवाली ये फिल्में ! परंतु ‘हिस स्टोरी ऑफ इतिहास’ फिल्म १०० वर्षों के ब्रिटिशकालीन तथा स्वतंत्र भारत के ७५ वर्ष ऐसे कुल मिलाकर पौने दो सौ वर्ष के नीचतापूर्ण हिन्दूद्वेषी प्रयासों का तथा इस पूरे षड्यंत्र का भंडाफोड करनेवाला है । संक्षेप में कहा जाए, तो यह जड पर ‘डीप स्टेट’ प्रहार करनेवाला है । उसकी परिणामकारकता के कारण ही अत्यंत चतुराईपूर्ण पद्धति से उसका अघोषित विरोध हो रहा है तथा उसे ‘साइलेंटली किल’ किया जा रहा है ।
किसी को ऐसा लगेगा कि यदि यह फिल्म हिन्दूहित साधनेवाली है, तो हिन्दूद्वेषी ‘सेंसर बोर्ड’ ने उसे हरी झंडी कैसे दिखाई ? जब-जब हिन्दुओं में जागृति लानेवाली फिल्में बनती हैं, तब-तब उन फिल्मों के कुछ दृश्यों पर आपत्ति जताकर उन्हें हटाने का दबाव बनाया जाता है । इसके कारण स्वाभाविक ही ऐसी फिल्मों को उनके प्रदर्शन से पूर्व ही प्रसिद्धि मिलती है; परंतु इस बार अलग खेल खेला गया है, ऐसा दिखाई देता है । इस बार सेंसर बोर्ड ने फिल्म के प्रसारण की अनुमति तो दी; परंतु उसके आगे के ‘माफिया इकोसिस्टम’ ने योजनाबद्ध षड्यंत्र कर उसे सिनेमाघर मिलने नहीं दिए । इस माध्यम से राष्ट्रविघातक शक्तियों से क्या एक नई परंपरा स्थापित की जा रही है ? अब चाहे कुछ भी हो, तब भी हिन्दुओं को इस फिल्म के उपलक्ष्य में इन शक्तियों से दो-दो हाथ करने का अवसर हिन्दुओं को नहीं गंवाना चाहिए ।
प्रत्येक हिन्दू की ‘स्टोरी’!
अब हिन्दुओं को प्रयासों की पराकाष्ठा कर इस फिल्म के प्रसारण के लिए योजनाबद्ध प्रयास करने चाहिए । भाजपा, शिवसेना, रा.स्व. संघ जैसे हिन्दुत्वनिष्ठ राजनीतिक दल एवं संगठन तथा भारतप्रेमी स्वयंसेवी संगठनों द्वारा इस फिल्म को प्रायोजित करना, विद्यालय-महाविद्यालयों में उसके ‘शो’ आयोजित करना आदि योजनाएं बनानी चाहिए । इस फिल्म का आधार ‘ब्रेनवॉश्ड रिपब्लिक’ पुस्तक की लाखों प्रतियों की बिक्री की व्यवस्था होनी चाहिए । वास्तव में देखा जाए, तो ‘हिस स्टोरी ऑफ इतिहास’ मात्र एक प्राध्यापक के इतिहास की कहानी नहीं है, अपितु प्रत्येक ‘हिन्दू भारतीय’ को अंधेरे में रखने की कहानी है । यदि ऐसी संवेदनशीलता उत्पन्न हुई, तभी और तभी जाकर हिन्दुओं से उसके प्रसारण के अघोषित ‘ब्रेनवॉशिंग’ के विरोध में प्रयास होंगे !
| ‘हिस स्टोरी ऑफ इतिहास’ केवल एक प्राध्यापक की कहानी नहीं है, अपितु प्रत्येक हिन्दू को अज्ञान में ही बनाए रखने की कहानी है, इसे जान लें ! |
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