
अ. प.पू. डॉक्टरजी के कार्य के विषय में प.पू. महाराजजी ने पहले ही बता रखा था । एक बार विशाखापट्टणम् जाने पर वहां सभी के छायाचित्र खींचने आए छायाचित्रकार को रोककर उन्होंने हमें उनके चरणों में बिठाकर छायाचित्र खिंचवा लिया । उस समय उन्होंने कहा, ‘‘पूरे विश्व को यह ज्ञात होना चाहिए कि आप मेरे शिष्य हैं !’’ वास्तव में भी वैसा हुआ, इसे तो आप देख ही रहे हैं ।
आ. एक बार कोई जलन के कारण प.पू. डॉक्टरजी के विषय में कुछ उल्टा-सीधा बोलने लगे । प.पू. महाराजजी को ज्ञात होने पर वे क्रोधित होकर सुश्री सीमा गरुड से बोले, ‘‘मैं उसकी पूजा करवाऊंगा ।’’ यह सत्य हुआ ! – डॉ. (श्रीमती) कुंदा जयंत आठवले (२९.४.२०२५)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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