‘१० जुलाई २०२५ को गुरुपूर्णिमा है । गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का यह दिवस शिष्य के लिए अविस्मरणीय होता है । इस दिन गुरुदेवजी का कृपाशीर्वाद तथा उनसे प्रक्षेपित शब्दातीत ज्ञान सामान्य की अपेक्षा सहस्रों गुना कार्यरत होता है । अतः गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में गुरुसेवा एवं धन का त्याग करनेवाले व्यक्ति को गुरुतत्त्व का सहस्रों गुना लाभ होता है ।

१. शिष्य के जीवन में गुरु का महत्त्व : निर्गुण परमेश्वर का पृथ्वी तल पर कार्यरत सगुण रूप हैं गुरु ! गुरु शिष्य को ज्ञान प्रदान कर उसकी पारमार्थिक उन्नति होने हेतु अखंड श्रम उठाते हैं । इसलिए शिष्य के लिए गुरु के बिना अन्य कोई उपाय नहीं होता । गुरु को सबकुछ अर्पित कर उनकी सेवा करना, यही शिष्य की खरी गुरुदक्षिणा होती है । उसके कारण शिष्य पर गुरुकृपा का प्रवाह अविरत बना रहता है ।
२. गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में गुरुकार्य अर्थात धर्मकार्य हेतु अर्पण दें : इस गुरुपूर्णिमा के निमित्त तन, मन व धन का अधिकाधिक त्याग कर गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर सभी को मिला है । अतः जिज्ञासु, शुभचिंतक धर्मप्रसार का कार्य कर तथा उसके लिए धन अर्पित कर गुरुपूर्णिमा का आध्यात्मिक स्तर पर लाभ लें ।
वर्तमान में धर्म-ग्लानि का समय है । अतः ‘धर्मप्रसार का कार्य करना’ सर्वश्रेष्ठ अर्पण है । इसके लिए धर्मप्रसार का कार्य करनेवाले संत, संस्था एवं संगठनों के कार्य हेतु धन का दान देना, काल के अनुसार आवश्यक है । हिन्दू जनजागृति समिति अत्यंत निःस्वार्थ भाव से विगत अनेक वर्षाें से यह कार्य कर रही है । इसलिए अर्पणदाताओं द्वारा हिन्दू जनजागृति समिति को दिए जानेवाले अर्पण का विनियोग निश्चित रूप से धर्मकार्य हेतु ही होगा ।
अर्पण देने हेतु इच्छुक व्यक्ति श्रीमती भाग्यश्री सावंत से 7058885610 क्रमांक पर या [email protected] इस ई-मेल पते पर संपर्क करें । गुरुपूर्णिमा हेतु घर बैठे ‘ऑनलाइन’ अर्पण देने की सुविधा भी उपलब्ध है । उसके लिए https://www.sanatan.org/en/donate लिंक पर जाएं !’
– श्री. वीरेंद्र मराठे, व्यवस्थापकीय न्यासी, सनातन संस्था. (२५.५.२०२५)
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