सनातन के कार्य से समाज में गोवा की कलुषित प्रतिमा नष्ट हुई ! – पद्मश्री सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामीजी, दत्त पद्मनाभ पीठ, तपोभूमि, कुंडई, गोवा

गुरुदेवजी के इस महोत्सव की देश में पिछले कुछ दिनों से चर्चा चल रही है । इस मंच पर प्रस्तुत हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना अवश्य पूर्ण होगी । भारत हिन्दू राष्ट्र बनेगा । सनातन धर्म बचा, तो राष्ट्र बचेगा एवं सनातन धर्म के कारण भारत को गौरव प्राप्त होगा । विश्वास एवं शांति बने रहने के लिए भारत का सनातन राष्ट्र होना आवश्यक है । आज गोवा की समाज में जो मलिन छवि थी, वह दूर होकर एक सात्त्विक परशुराम भूमि के रूप में गोवा की पहचान सनातन के कार्य से निर्माण हुई है । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो प्रभाव आज विश्व में निर्माण किया है, उस प्रकार आज राष्ट्र, धर्म एवं संस्कृति को बचाने की आवश्यकता है । यह हिन्दुओं ने आत्मसात किया, तो ही समाज में शांति एवं हिन्दू सुरक्षित रहेंगे । हनुमान, श्रीराम, श्रीकृष्ण के हाथों में आयुध हैं । ये आयुध धर्म की रक्षा के लिए हैं । हमें शांतिचाहिए । आज हिन्दू नहीं जागे, तो कल का दिन हमारा नहीं रहेगा ।
केवल राजनीति पर निर्भर न रहते हुए धर्म एवं संस्कृति की रक्षा करने का दायित्व हिन्दुओं का भी है । पूरे समाज को सनातन के राष्ट्र एवं धर्म कार्य में सहभागी होने की आवश्यकता है । हम भी इस कार्य में सहभागी हैं, सनातन के साधकों के साथ हैं । इस कार्य को हमारे भी आशीर्वाद हैं ।
सनातन के साधक सनातन की महिमा संपूर्ण विश्व में फैलाएंगे ! – पद्मश्री सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामीजीपद्मश्री सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामीजी सनातन के साधकों की प्रशंसा करते हुए बोले, ‘‘जिस प्रकार सैनिक सीमा पर राष्ट्र के लिए लड रहे हैं, उसी प्रकार सनातन के साधक गांव-गांव जाकर धर्मशिक्षा देंगे, वैसे ही सनातन की महिमा संपूर्ण विश्व में फैलाएंगे । सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के आशीर्वाद एवं उनके नेतृत्व में सनातन के सभी साधक देव, देश एवं धर्म के लिए समर्पित हैं ।’’ |
अध्यात्म ही सनातन राष्ट्र की संकल्पना है ! – यदुवीर कृष्ण दत्त चामराज वाडीयार, युवराज तथा सांसद, मैसूरु राजघराना, कर्नाटक

विश्व की सर्वाधिक प्राचीन परंपरा के हम रक्षक हैं । हमारी मूल संस्कृति सनातन धर्म में ज्ञात है । हमें आर्थिक, सैन्य एवं आध्यात्मिक स्तर पर भविष्य निश्चित करना है । अध्यात्म ही हमारा मूल सार है एवं वही हमारे सनातन राष्ट्र की संकल्पना है । यह पंथ आधारित देश न होकर अपनी संस्कृति की पहचान है । विजयनगर साम्राज्य इसका उत्तम उदाहरण है । सनातन राष्ट्र राजनीतिक सत्ता व्यवस्था न होकर आध्यात्मिक सेवाभाव से की गई व्यवस्था है । सनातन राष्ट्र की संकल्पना पहले से व्याप्त है । सनातन राष्ट्र विविधता को नकारता नहीं, अपितु हमारे यहां वाद-प्रतिवाद की परंपरा है । यही तो सनातन धर्म की आत्मा है । सनातन राष्ट्र अमर है और वह सर्वसमावेशक है । इसी से वर्ष २०४७ के विकसित भारत का सपना सही अर्थों में पूर्ण होगा ।
गोवा ‘बीच’ पर बैठने की नहीं, अपितु भगवान परशुराम की उपासना भूमि है ! – पू. देवकीनंदन ठाकुर, प्रसिद्ध कथावाचक

गोवा ‘तट’ (सागर किनारे) पर बैठने की नहीं, अपित भगवान परशुराम की उपासना करने की भूमि है । पाकिस्तान का शासन भिक्षा मांगनेवाला है, आतंकवादी प्रशिक्षित कर दूसरों की हानि करता है, जबकि भारत में देवालय, गोशाला और वेद विद्यालय का निर्माण हो रहा है । हमारा राष्ट्र हिन्दू राष्ट्र था और आगे भी रहेगा ।
विश्वकल्याणकारी सनातन राष्ट्र की स्थापना के लिए ही यह शंखनाद है ! – चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था

सनातन संस्था गत २५ वर्षों से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शन में गोमंतक (गोवा) की पवित्र परशुराम भूमि से सनातन राष्ट्र के लिए आदर्श एवं संस्कारी पीढी का निर्माण करने हेतु अथक प्रयास कर रही है । सनातन संस्था के रजत जयंती महोत्सवी वर्ष के निमित्त रामराज्य स्वरूप आदर्श राष्ट्र निर्माण करने का सामूहिक संकल्प करने के लिए यह ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ है । वर्तमान में भारत के समक्ष चुनौतियां देखें, तो ‘सनातन धर्मियों का अस्तित्व एवं सनातन धर्म का संरक्षण’ अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । पहलगाम में आतंकवादियों ने पर्यटन के लिए आए हिन्दुओं की उनका धर्म पूछकर हत्या की । काशी-मथुरा स्थित हमारे देवताओं के लिए न्यायालय में जाकर याचना करनी पडना, यह हिन्दुओं के लिए लज्जास्पद है । ‘ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेस’ द्वारा गोमाता, गंगा, मंदिर, देवता, धर्मग्रंथ आदि सनातन मानबिंदुओं पर सतत आघात हो रहे हैं । राष्ट्र का सनातनत्व टिकाए रखने के लिए, वैसे ही गोमाता, गंगा, गायत्री, मंदिर, वेदादि धर्मग्रंथ आदि को पुनर्वैभव प्राप्त कराना आवश्यक
है । ‘धर्मेण जयति राष्ट्रम् ।’ अर्थात ‘सनातन धर्म के कारण राष्ट्र विजयी होता है !’, यह इस महोत्सव का ध्येयवाक्य है । हमारा राष्ट्र सदैव विजयी हो, इसके लिए सनातन धर्म की आवश्यकता है एवं उसी के लिए यह शंखनाद है ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?