
पूरे भारत में चार तीर्थक्षेत्रों में कुम्भ पर्व के समय कुम्भ मेला अथवा अर्धकुम्भ मेला होने का उद्देश्य आध्यात्मिक है । कुम्भ पर्व के पुण्य अवसर के निमित्त दूर-दूर रह रहे श्रद्धालु हरिद्वार, प्रयाग आदि पवित्र तीर्थों पर एकत्र आकर देवनदी गंगा का पुण्यदायी स्नान करें, ऋषि-मुनि तथा सन्तमहात्मा के प्रवचनों से ज्ञानप्राप्ति करें । तदनुसार श्रद्धालु ध्यान, दान, यज्ञ, तप, जप आदि साधना कर आध्यात्मिक प्रगति करें तथा मृत्यु के उपरान्त सद्गति प्राप्त करें, यह कुम्भ मेले का आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रयोजन है । कुम्भ मेले का यह आध्यात्मिक प्रयोजन ध्यान में रख सश्रद्ध हिन्दू समाज केवल कुम्भ पर्व में ही नहीं, वर्ष के ३६५ दिन आध्यात्मिक प्रगति के लिए साधना करे, यह ईश्वरचरणों में प्रार्थना है !
(संदर्भ : सनातन का ग्रंथ – ‘कुम्भ पर्व की महिमा’)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?