अफगानी निर्वासितों की आड में आतंकवादियों को आश्रय ना मिले ! – रशिया के राष्ट्रपति पुतिन
पुतिन को जो समझ में आता है ,वो भारत को भी समझना चाहिए अन्यथा अफगानी निर्वासितों को आश्रय देने के प्रयास में तालिबानी भारत में घुसेंगे !
पुतिन को जो समझ में आता है ,वो भारत को भी समझना चाहिए अन्यथा अफगानी निर्वासितों को आश्रय देने के प्रयास में तालिबानी भारत में घुसेंगे !
यह है इस्लामी देशों का ढोंगी मुसलमान प्रेम ! स्वयं के असहाय बंधुओं को सहायता न करने वाले इस्लामी देश अन्य धर्मियों से कैसा व्यवहार करते होंगे, इसका विचार न करना ही अच्छा होगा !
जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है, तबसे तालिबान विरोधी अफगान पंजशीर घाटी में एकत्रित हो रहे हैं । इनमें अधिकांश अफगान राष्ट्रीय सेना के सैनिक हैं ।
इस्लामी देशों का संगठन तालिबान को समर्थन ही दे रहा; लेकिन भारत के मुसलमान संगठन और कुछ नेता और प्रसिद्ध लोग उसको समर्थन देकर हम अधिक कट्टर मुसलमान हैं, यह दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, यह ध्यान दें !
अफगानिस्तान से भारतीय वायुसेना के विमान द्वारा भारतीय और अफगानी लोगों को भारत में लाया जा रहा है । इसमें अफगानिस्तान के सिख विधायक नरेंदर सिंह खालसा के भारत आते ही अश्रु निकलने लगे ।
तालिबान से ऐसी अपेक्षा करना मूर्खता है, श्रीलंका को वर्तमान में वहां हो रही उनकी क्रूरता से यह समझना चाहिए ! क्या श्रीलंका की सहायता करने वाले चीन के कारण ही श्रीलंका को तालिबान पर इतना भरोसा है ?
अफगानिस्तान की इस घटना और समग्र वर्तमान परिस्थिति के संबंध में मानवाधिकार संगठन और इस्लामिक देश अपना मुंह क्यों नहीं खोलते ? या क्या वे यह मानते हैं, कि मुसलमानों द्वारा दूसरे मुसलमानों पर अत्याचार करना उचित है ?
हशमत घनी अहमदजई ने तालिबान को समर्थन देने का निर्णय अल्हाज खलील-उर-रहमान हक्कानी इस तालिबानी नेता के साथ हुई बैठक के बाद लिया है ।
यहां के हवाई अड्डे के पास से १५० नागरिकों के अपहरण किए जाने का वृत्त प्रसारित हुआ था; लेकिन स्थानीय अफगानी मीडिया ने स्पष्ट किया कि, ये १५० नागरिक सुरक्षित हैं ।