पंजशीर (अफगानिस्तान) पर नियंत्रण करने के प्रयास में मारे गए ३०० तालिबानी आतंकी !
जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है, तबसे तालिबान विरोधी अफगान पंजशीर घाटी में एकत्रित हो रहे हैं । इनमें अधिकांश अफगान राष्ट्रीय सेना के सैनिक हैं ।
५६ इस्लामी देशों में से केवल पाक और कतर का तालिबान को समर्थन !
इस्लामी देशों का संगठन तालिबान को समर्थन ही दे रहा; लेकिन भारत के मुसलमान संगठन और कुछ नेता और प्रसिद्ध लोग उसको समर्थन देकर हम अधिक कट्टर मुसलमान हैं, यह दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, यह ध्यान दें !
२० वर्षों में जो कुछ बनाया था, वह सब समाप्त हो गया ! – अफगानी विधायक नरेंदर सिंह खालसा
अफगानिस्तान से भारतीय वायुसेना के विमान द्वारा भारतीय और अफगानी लोगों को भारत में लाया जा रहा है । इसमें अफगानिस्तान के सिख विधायक नरेंदर सिंह खालसा के भारत आते ही अश्रु निकलने लगे ।
आशा है कि तालिबान अपने आश्वासनों पर अडिग रहेगा ! – श्रीलंका
तालिबान से ऐसी अपेक्षा करना मूर्खता है, श्रीलंका को वर्तमान में वहां हो रही उनकी क्रूरता से यह समझना चाहिए ! क्या श्रीलंका की सहायता करने वाले चीन के कारण ही श्रीलंका को तालिबान पर इतना भरोसा है ?
काबुल हवाई अड्डे के बाहर भीड की भगदड में सात अफगानों की मृत्यु !
अफगानिस्तान की इस घटना और समग्र वर्तमान परिस्थिति के संबंध में मानवाधिकार संगठन और इस्लामिक देश अपना मुंह क्यों नहीं खोलते ? या क्या वे यह मानते हैं, कि मुसलमानों द्वारा दूसरे मुसलमानों पर अत्याचार करना उचित है ?
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घनी के भाई का तालिबान को समर्थन !
हशमत घनी अहमदजई ने तालिबान को समर्थन देने का निर्णय अल्हाज खलील-उर-रहमान हक्कानी इस तालिबानी नेता के साथ हुई बैठक के बाद लिया है ।
काबुल हवाई अड्डे से कथित अपहरण हुए १५० नागरिक सुरक्षित
यहां के हवाई अड्डे के पास से १५० नागरिकों के अपहरण किए जाने का वृत्त प्रसारित हुआ था; लेकिन स्थानीय अफगानी मीडिया ने स्पष्ट किया कि, ये १५० नागरिक सुरक्षित हैं ।
यदि हमारे बचाव कार्य अथवा सेना पर आक्रमण किया, तो हम स्पष्ट रूप से उत्तर देंगे ! – जो बिडेन की तालिबान को चेतावनी
२० वर्षों के संघर्ष के पश्चात भी अफगानिस्तान को तालिबान से मुक्त न कर पाने वाले अमेरिका की यह चेतावनी हास्यास्पद ही है !
(कहते हैं) ‘सीमा का उल्लंघन होने पर हम कार्यवाही करेंगे !’ – ट्विटर
ट्विटर पर तालिबानियों के खातें चालू ही हैं !
मात्र अफगानिस्तान के प्रभारी राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह का खाता बंद कर दिया है !