तालिबान से ऐसी अपेक्षा करना मूर्खता है, श्रीलंका को वर्तमान में वहां हो रही उनकी क्रूरता से यह समझना चाहिए ! क्या श्रीलंका की सहायता करने वाले चीन के कारण ही श्रीलंका को तालिबान पर इतना भरोसा है ? जबकि विश्व के १-२ देशों को छोडकर कोई भी ऐसी अपेक्षा नहीं करता ? यह एक बडा प्रश्न है ! – संपादक

कोलंबो (श्रीलंका) – ‘हम तालिबान के अफगानिस्तान पर नियंत्रण पाने के उपरांत, नागरिकों को क्षमा करने, महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने और किसी भी विदेशी नागरिक को हानि न पहुंचाने के वचन से प्रसन्न हैं । हमें अपेक्षा है कि वे इन वचनों का पालन करेंगे’, इन शब्दों में श्रीलंका ने तालिबान शासन का स्वागत किया है ।
१. श्रीलंका ने कहा है, कि उसने अफगानिस्तान से अपने नागरिकों को निकालने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, भारत, पाकिस्तान और संयुक्त राष्ट्र की सहायता मांगी है ।
२. श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने इससे पहले चेतावनी देते हुए कहा, कि श्रीलंका को तालिबान सरकार को मान्यता नहीं देनी चाहिए । सभी को डर है कि तालिबान सरकार के शासन में अफगानिस्तान, जिहादी आतंकवादी समूहों का अड्डा बन जाएगा, इसलिए श्रीलंका को उससे संबंध तोड लेना चाहिए।
हमारा तथा भारत का डीएनए (DNA) एक ही है ! – Afghanistan Minister Mawlawi Attaullah Omari
(और इनकी सुनिए) “भारत ने दवाइयों के बक्सों में छिपाकर अफगानिस्तान को ड्रोन भेजे ।” : Pakistan Defense Minister Khwaja Asif
रूस एवं तालिबान सरकार के बीच सैन्य सहयोग का समझौता !
(और इनकी सुनिए…) इच्छा हो, तो अफगानिस्तान के साथ हम चर्चा करवा सकते हैं ! : Iran’s Foreign Minister Abbas Araqchi
Pakistan Asim Munir : पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर ईरान के गुप्त मित्र !
अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान के मध्य संघर्ष की अनेक परतें