भारत के शासनकर्ताओं ने वेदादि शास्त्रमान्य दर्शनविज्ञान को पृथ्वी पर लागू करने का व्रत लिया, तो उससे कोरोना महामारी समाप्त होगी ! – पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती

देश में बीमारी नहीं है, अपितु यह उन्माद की पराकाष्ठा है । अतः भारत के शासनकर्ता यह घोषणा करें, ‘प्रकृति ने हमें पाठ पढाकर जो संकेत दिया है, वह हमारी समझ में आ गया है ।’

घनघोर आपातकाल में अपनी सुरक्षा हेतु अच्छी साधना करके भगवान का भक्त बनना ही आवश्यक है ! – पूज्य नीलेश सिंगबाळ, धर्मप्रचारक, हिन्दू जनजागृति समिति

कोरोना के इस महामारी के काल में सभी को यह अनुभव हो गया होगा कि ईश्वर की भक्ति ही हमारी रक्षा कर सकती है । समाज साधना कर आध्यात्मिक बल अर्जित कर सके इस उद्देश्य से ८ मास पूर्व सनातन संस्था की ओर से पूरे देश में ऑनलाइन सत्संग शृंखला का आयोजन किया गया ।

रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर प्रवचन

रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस के अवसर पर दिल्ली के साईदुला जेब, एमबी रोड स्थित लिटिल वन पब्लिक स्कूल में सनातन संस्था द्वारा ऑनलाइन प्रवचन का आयोजन किया गया ।

वराड (जिला सिंधुदुर्ग) के महान संत प.पू. परूळेकर महाराजजी का देहत्याग !

वराड, सिंधुदुर्ग के महान संत प.पू. परूळेकर महाराज (आयु ८४ वर्षे) ने यहां के ‘श्रीरामनगरी’ आश्रम में २८ जून २०२१ को सवेरे ९ बजे देहत्याग किया ।

पुलवामा में ३ आतंकी मारे गए !

कश्मीर में सुरक्षाबलों द्वारा निरंतर आतंकियों को मारा जा रहा  है तथापि  वहां का  आतंकवाद समाप्त नहीं  हो रहा है। जब तक आतंकियों का जनक पाकिस्तान नष्ट नहीं होगा, तब तक नए नए आतंकी निर्माण होते ही रहेंगे  ! अत: पाक नामक भस्मासुर को ही समाप्त करना होगा !

(कहते हैं) ‘राज्य में हमारी सरकार आने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को मूत्र पिलाएंगे !’

ऐसे नेताओं को तत्काल हिरासत में लेकर कारागृह में डालना चाहिए और उनके ऊपर द्रुत गति से न्यायालय में मुकदमा चलाकर कठोर सजा होने के लिए सरकार को प्रयास करने चाहिए !

नन अभया की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काटने वाले पादरी और नन को पेरोल !

केरल की कम्युनिस्ट नेतृत्व वाली सरकार ईसाइयों की दास होने से स्वयं के अधिकारों का प्रयोग कर खूनियों को सहायता करने का इस प्रकार प्रयास कर रही है । इस विषय में ढोंगी धर्मनिरपेक्षतावादी और कानून प्रेमी मुंह नहीं खोलते, यह ध्यान दें !

मंदिर, मठ आदि स्थलों से ५ किमी के परिसर में गोमांस के क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध होगा  !

आवश्यक प्रमाणपत्र प्राप्त किए बिना मवेशियों का वध नहीं किया जा सकेगा !
असम सरकार का नया गोधन संरक्षण विधेयक