श्री भीमराव खोत, पलूस
ईश्वरपुर, १३ जून (वार्ता) – सांगली जिले का ईश्वरपुर एक महत्वपूर्ण यात्री वाहनस्थानक है । इस यात्री वाहनस्थानक पर चबूतरों (प्लेटफार्म) की संख्या अपर्याप्त है । इसलिए वाराणानगर, कोडोली, आष्टा, ताकारी, विटा, जुनेखेड, तासगाव एवं पलूस मार्गों की यात्री वाहन फलाट पर न रोककर शेड रहित स्थानों पर रोकी जाती हैं । इसके कारण यात्रियों को तीव्र धूप में इन मार्गों की यात्री वाहनोंकी प्रतीक्षा करते हुए खड़ा रहना पडता है ।

बरसात में भी यात्रियों की भीषणअसुविधा होती है । इससे यह प्रश्न भी उठता है कि “कौनसी गाडी ठीक कौन सी जगह आएगी ?” एवं यात्रियों को असुविधा होती है । यदि यात्री वाहनकी जगह बदल दी जाती है, तो यात्रियों को सामान लेकर वहां दौडना पडता है । यहां यात्रियों को धूप न लगे, इसलिए न तो अस्थायी छत की व्यवस्था की गई है एवं न ही बैठने की व्यवस्था है । परिणामस्वरूप महिलाएं, बच्चे-वयो वृद्ध, एवं बीमार यात्री भी असुविधा झेलते हैं । यात्रियों को थोडी सी छाया नारियल के पेडों से मिलती है, एवं वे उसी पर निर्भर होकर यात्री वाहनों की प्रतीक्षा करते हैं; परन्तु यात्रियों को होनेवाली इन समस्याओऺ से प्रशासन पूर्ण रूप से उदासीन है ।
१. यात्री वाहनस्थानक के शौचालय अत्यंत गंदे हैं । वहां जाना हो तो शब्दशः नाक पकडकर जाना पडता है । इसलिए कुछ यात्री वाहनस्थानक के आसपास झाडियों की ओट में शौच कर लेते हैं । यहां के नल की टोंटी (सैनिटरी फिटिंग) भी टूटी हुई है ।

२. यात्री वाहनस्थानक के परिसर में इधर उधर घास-फूस बढी हुई है । यात्री वाहनस्थानक की सडकों की कंक्रीटिंग अधूरी है । यात्री वाहनस्थानक के आधे भाग में मुरूम (बजरी-कंकड़) डाला गया है । उस भाग में अनेक गड्ढे हैं । कुछ स्थानों पर झाडियां उगी हुई हैं ।

३. ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि ने ईश्वरपुर आगार प्रबंधक श्री दिलीप ठोंबरे से मिलकर यात्रियों को हो रही असुविधाओऺ के संबंध में पूछा, तब उन्होंने कहा कि ” त्रुटियां दूर करने का प्रयास कर रहे हैं” ।
सकारात्मक निरीक्षण
यहां पेयजल की सुविधा उपलब्ध है । यात्री वाहनों के समय-सारिणी के फलक एवं विभिन्न योजना संबंधी फलक लगाए हुए हैं । हिरकणी कक्ष एवं कर्मचारी विश्राम कक्ष की स्थिति अच्छी है । स्थानक पर यात्री वाहनोंकी स्थिति भी ठीक है ।


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