
पुरी (ओडिशा) – प्रकृति ने विश्व और भारत को पाठ पढाकर जो संकेत दिया है, उसे मैं समझ चुका हूं । भगवान की कृपा से कोरोना की यह महामारी दूर हो ! भारतीय शासनकर्ता, यदि ‘हम वेदादि शास्त्रमान्य दर्शनविज्ञान को पृथ्वी पर लागू करने का व्रत लेते हैं’, ऐसा घोषित कर दें, तो कोरोना की यह महामारी तुरंत ही समाप्त होना आरंभ हो जाएगी । पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कुछ दिन पूर्व ही यहां ऐसा प्रतिपादित किया ।
जगद्गुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वतीजी ने आगे कहा,
१. प्रकृति तो ईश्वर की शक्ति है । प्रकृति निर्जीव होते हुए भी चिन्मय है । प्रकृति कर्तव्यनिष्ठ एवं गुणनिष्ठ होने से वह शासनकर्ताओं की भाषा समझ लेगी; परंतु उनकी, साथ ही आगे भी जो शासनकर्ता होंगे, उनकी एक ही समस्या है । उन्हें ऐसा लगता है कि ‘उन्होंने यदि किसी मनुवादी की बात सुनी, तो वे राज्य नहीं कर सकेंगे । उसके कारण भले भारत नष्ट हो जाए, तब भी चलेगा; वह रसातल को पहुंच जाए, तभी चलेगा; परंतु उन्हें किसी भी धर्माचार्य अथवा आध्यात्मिक पुरुष के पास जाकर उनके सामने घुटने नहीं टेकने हैं और उनका मार्गदर्शन नहीं लेना है । संभव हुआ, तो उन्हें भी अपने दल का प्रचारक बनकर रखना है ।’ इस उन्माद के कारण यह स्थिति बनी हुई है ।
२. देश में बीमारी नहीं है, अपितु यह उन्माद की पराकाष्ठा है । अतः भारत के शासनकर्ता यह घोषणा करें, ‘प्रकृति ने हमें पाठ पढाकर जो संकेत दिया है, वह हमारी समझ में आ गया है ।’ प्रकृति ने हमें ऐसे द्वार पर लाकर खडा कर दिया है कि अब हमें सनातन परंपरा के द्वारा ही विकास करना होगा ।
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संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
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