बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के दबाव में आकर ‘सनातन धर्म संकुल’ का निर्माण कार्य रुका !

  • बांग्लादेश के गायबांधा जिले की घटना ।

  • ५३ फीट ऊंची प्रभु श्रीराम की मूर्ति के निर्माण के साथ १४४ मूर्तियों का हो रहा था निर्माण ।

  • भारत की गुप्तचर संस्था के समर्थन से निर्माण होने का आरोप ।

ढाका (बांग्लादेश) – बांग्लादेश , साथ ही फ्रांस एवं अमेरिका के कट्टर इस्लामी गुट रंगपुर विभाग के गायबांधा जिले में बनाए जा रहे ‘सनातन धार्मिक संकुल’ के विध्वंस की मांग कर रहे हैं । इस दबाव के आगे झुकते हुए बांग्लादेश सरकार ने इस संकुल का निर्माण कार्य रोकने का आदेश दिया ।

यहां भगवान श्रीराम की ५३ फीट ऊंची मूर्ति का औपचारिक उद्घाटन २५ नवम्बर २०२५ के दिन राजशाही स्थित भारत के सहायक उच्चायुक्त मनोज कुमार के हाथों हुआ था । यहां श्रीराम एवं शिव (ऊंचाई २८ फीट) की मूर्तियों के साथ देवताओं की १४४ मूर्तियों की स्थापना की जानेवाली थी । इसकी कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा तीव्र विरोध होने की जानकारी ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि को बांग्लादेश के हिन्दुओं से पहले ही प्राप्त हुई थी ।

इस सन्दर्भ में राजधानी ढाका के ‘वीकली ब्लिट्ज’ के वरिष्ठ सम्पादक सलाहउद्दीन शोएब चौधरी ने पहले ही एक लेख लिखकर इसकी विस्तृत जानकारी दी । उन्होंने कहा कि स्थानीय दानवीर हरिदास बाबू की पहल से स्थापित यह प्रकल्प धीरे-धीरे एक बडे धार्मिक एवं स्थापत्यशास्त्रीय संकुल के रूप में विकसित हुआ ।

१९ जून को ‘सनातन धर्म संकुल’ की मूर्तियां नष्ट करने की कट्टरपंथियों की उकसाने की प्रक्रिया !

चौधरी ने भारतीय प्रसारमाध्यमों से आवाहन करते हुए कहा कि कृपया बांग्लादेश में भगवान श्रीराम , भगवान शिव एवं भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियों की रक्षा करें ! पाकिस्तान की ‘आई.एस.आई.’ के सीधे समर्थन से बांग्लादेश के इस्लामवादियों एवं जिहादियों ने ‘सनातन संकुल’ का निर्माण रोकने में पहले ही सफलता प्राप्त कर ली है । अब १९ जून को उस स्थान पर आक्रमण कर इन मूर्तियों की तोडफोड करने का उनका षडयंत्र होने की बात समझ आ रही है । बांग्लादेश के इस्लामवादी सामाजिक माध्यमों से इन मूर्तियों के ‘सिर काटने’ का आवाहन कर रहे हैं । कुछ लोग उससे भी आगे बढकर ‘मूर्तियों पर चढने’ एवं ‘तोडफोड करने से पूर्व उन पर लघुशंका करने’ जैसी कृतियां करने का आवाहन अपने सहयोगियों से कर रहे हैं ।

इस सन्दर्भ में ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि ने बांग्लादेश के गाजीपुर के कुछ हिन्दुत्वनिष्ठों से चर्चा की , तब उन्होंने कहा कि इस संकुल पर ४ सहस्र से ५ सहस्र मुसलमानों की भीड चढाई कर सकती है तथा मूर्तियों की तोडफोड कर सकती है , इसमें कोई सन्देह नहीं है ।

देशभर में लाखों मस्जिदें होते हुए एक हिन्दू संकुल को विरोध क्यों ? – बांग्लादेशी लेखिका तस्लिमा नसरीन

तस्लिमा नसरीन

सरकार के इस आदेश के विरोध में बांग्लादेशी लेखिका तस्लिमा नसरीन ने आवाज उठाई है । उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में लाखों मस्जिदें हैं । देशभर में नई मस्जिदों का निर्माण कार्य भी चलता ही रहता है । फिर केवल एक श्रीराममन्दिर अथवा भगवान श्रीराम की प्रतिमा के निर्माण को इतना विरोध क्यों ? यदि धार्मिक स्वतन्त्रता वास्तव में सभी के लिए है , तो वह केवल बहुसंख्यकों को ही नहीं , अपितु अल्पसंख्यकों को भी समानता से लागू होनी चाहिए ।

उन्होंने आगे कहा कि राममन्दिर के विरोध में दी जानेवाली धमकियां , भडकाऊ वक्तव्य एवं द्वेषपूर्ण प्रचार अत्यन्त चिन्ताजनक है । केवल कोई प्रार्थनास्थल पसन्द नहीं है , इसलिए उसे गिराने का अधिकार किसी भी व्यक्ति अथवा गुट को नहीं मिलता । कानून का राज्य होनेवाले देश में धार्मिक मतभेद हिंसा अथवा बर्बरता से नहीं सुलझाए जाते ।

नसरीन ने इस बात पर बल दिया कि पलाशबारी में हिन्दू मन्दिरों एवं मूर्तियों की तोडफोड होने का इतिहास देखते हुए यह स्थिति विशेष रूप से चिन्ताजनक है । इन घटनाओं के कारण वहां का हिन्दू अल्पसंख्यक समुदाय असुरक्षित की अनुभव कर रहा है । इण्डोनेशिया , संयुक्त अरब अमीरात , मलेशिया एवं ओमान जैसे विश्व के अनेक मुसलमान बहुल देशों में बडे हिन्दू मन्दिर हैं । उन देशों में मन्दिरों का अस्तित्व राज्य के लिए संकट नहीं माना जाता । फिर बांग्लादेश में एक मन्दिर के निर्माण को कुछ मुसलमानों द्वारा अस्तित्व के संकट के रूप में क्यों देखा जा रहा है ? , ऐसा प्रश्न भी तस्रीन ने उपस्थित किया ।

धार्मिक संकुल के विरोध में हो रहे गम्भीर आरोप !

१. भारतीय प्रभाव का कथित विस्तार : बांग्लादेश के साथ पाकिस्तान , तुर्किये , फ्रांस , अमेरिका आदि देशों के धर्मान्ध मुसलमानों के गुट भी ‘गायबांधा धार्मिक संकुल’ का विरोध कर रहे हैं । साथ ही इसे ‘भारतीय प्रभाव का कथित विस्तार’ के रूप में चित्रित करने का ऑनलाइन अभियान ही हाथ में लिया गया है ।

२. भारतीय गुप्तचर संस्था ‘रॉ’ ने उपलब्ध कराया धन : कोई भी विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत किए बिना प्रकल्प के कार्यवाहक हरिश्चन्द्र तारोनी दास पर भारतीय गुप्तचर संस्थाओं से सम्बन्ध होने का आरोप लगाया जा रहा है । भारतीय गुप्तचर संस्था ‘रॉ’ ने इस प्रकल्प के लिए धन देने का आरोप भी किया जा रहा है ।

३. ‘इस्कॉन’ का दुष्प्रचार करनेवाले यही गुट : विशेष रूप से यही इस्लामी गुट बांग्लादेश में ‘इस्कॉन’ का दुष्प्रचार करने के साथ , संन्यासी चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी में इन्होंने भूमिका निभाने का आरोप है ।

४. यह गुट भारत के विरुद्ध जिहाद पुकारकर ‘गजवा-ए-हिन्द’ (भारत का इस्लामीकरण) प्रत्यक्ष में लाने के लिए , साथ ही बांग्लादेश के हिन्दुओं की सामूहिक हत्या आरम्भ करने का आवाहन कर रहे हैं ।

चौधरी अपने लेख में भय व्यक्त करते हुए कहते हैं कि समय रहते कदम न उठाने पर बांग्लादेश हिन्दुओं के कसाईखाने में परिवर्तित हो सकता है एवं हिंसा की नई लहर अथवा नरसंहार भी किसी भी क्षण आरम्भ हो सकता है । बांग्लादेश सरकार द्वारा निर्माण कार्य रोकने का आदेश देने के पश्चात अब हिन्दुओं के विरुद्ध आक्रमण आरम्भ होने पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए , ऐसा अब कहा जा रहा है ।

मन्दिर निर्माण का निमित्त बनाकर इस प्रकार किया जा रहा है दुष्प्रचार !

फेसबुक आदि सामाजिक माध्यमों से कट्टरपंथी मुसलमान दुष्प्रचार कर रहे हैं ।

वे कह रहे हैं कि :

१. हिन्दुत्वनिष्ठ ‘अखण्ड भारत’ निर्माण करने का सपना देखते हैं । यदि उसे साध्य करने में उन्हें सफलता नहीं मिली , तो भी बांग्लादेश पर अधिकार प्राप्त करने का स्वप्न पूर्ण करने का वे निश्चित ही प्रयास करेंगे । सनातन संकुल उत्तर बंगाल में भारत के ‘चिकन नेक कॉरिडोर’ के बिल्कुल समीप ही क्यों होना चाहिए ? २२ करोड टाका व्यय कर बनाए जानेवाले इस संकुल में , देश की सबसे बडी श्रीराम की प्रतिमा (५३ फीट) , शिव प्रतिमा (२८ फीट ऊंची) एवं १४४ देवताओं की मूर्तियां पहले ही स्थापित की गई हैं ।

२. ६ प्रतिशत हिन्दू अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करते हुए वे बांगलादेश के ९३ प्रतिशत मुसलमान बहुसंख्यकों को चुनौती दे रहे हैं । और इधर हम मुसलमान मात्र गहरी नींद में ‘गजवा-ए-हिन्द’ के स्वप्न देख रहे हैं ! वास्तव में ऐसा लगता है कि इस देश के मुसलमानों के भाग्य में दुर्भाग्य ही लिखा है !!!

३. जिस राम के मन्दिर के लिए भारत में बाबरी मस्जिद गिराई गई , उसी राम की प्रतिमा यहां एक खुली भूमि पर बनाई जा रही है !

संपादकीय भूमिका

धर्मनिरपेक्षतावादी होने का ढोंग करनेवाले बांग्लादेश ने इस्लामी धार्मिक गुटों के दबाव में आकर हिन्दू मंदिरों का निर्माण कार्य रोक दिया है , इसके लिए भारत को उससे उत्तर मांगना चाहिए । इसके लिए भारत के प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा सरकार पर दबाव बनाना आवश्यक है !