
मुंबई – ‘औषधि खरीदना’ यह रोगी का कानूनी अधिकार है । रोगी को अस्पताल के औषधालय से ही औषधियां खरीदना कानूनन अनिवार्य नहीं है । औषधियां कहां से खरीदनी हैं ?, यह पूरी तरह से रोगी तथा उसके परिजनों के ऊपर निर्भर करता है । सभी अस्पतालों के लिए इस नियम का पालन करना अनिवार्य है । यदि अस्पताल अपने ही अस्पताल से औषधियां खरीदने की बाध्यता करते हैं, तो नागरिक इसके विरुद्ध अन्न तथा औषधि प्रशासन के पास सीधे शिकायत लिखा सकते हैं । प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लेकर संबंधित अस्पताल के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्यवाही की जाएगी, ऐसी चेतावनी अन्न तथा औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने पत्रकार परिषद में दी ।
आयुक्त तुकाराम मुंढे आगे बोले, ‘‘कई स्थानों पर हमारे पास ऐसी शिकायतें आती हैं । रोगी को अस्पताल के औषधालय से ही औषधियां लेने के लिए बाध्य किया जाता है, परंतु औषधियां कहां से लानी हैं, यह रोगी की व्यक्तिगत पसंद और मूलभूत अधिकार है । आप किसी पर भी दबाव नहीं डाल सकते । आधुनिक वैद्यों के लिए यह अनिवार्य है कि वे रोगी को आवश्यक औषधियों का ‘प्रिस्क्रिप्शन’ (औषधियों की सूची) परिजनों के हाथ में दें । परिजन अपनी सुविधा एवं वहनीय दर के अनुसार किसी भी बाहर के पंजीकृत औषधालय से औषधियां ला सकते हैं । यदि किसी औषधि का विशिष्ट ‘ब्रांड’ (प्रतिष्ठान) उपलब्ध न हो, तो वे उसके ‘जेनेरिक’ (उत्पादन लागत के अनुसार मिलने वाली औषधियां) विकल्प भी चुन सकते हैं ।’’
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