भड़ौच (गुजरात) – यहां स्थित ७०० वर्ष प्राचीन जामा मस्जिद के मुद्रित (सील किए गए) भूगर्भ में हिन्दू देवताओं की प्राचीन मूर्तियां, तथा इसके साथ ही जैन तीर्थंकरों से संबंधित मूर्तियां भी प्राप्त होने की बात कही जा रही है। निकट भूतकाल में एक चलचित्र (वीडियो) प्रसारित हुआ था। इसमें मस्जिद के भूगर्भ में हिन्दू देवताओं की अनेक प्राचीन मूर्तियां, तथा भगवान मल्लिनाथ (जैन धर्म के १९ वें तीर्थंकर) की मूर्ति होने का दावा किया गया था। यह चलचित्र अत्यधिक मात्रा में प्रसारित होने के पश्चात विभिन्न हिन्दू तथा जैन संगठनों ने इस प्रकरण की जांच की मांग की।
पुरातत्व विभाग द्वारा मस्जिद का निरीक्षण !
इसके पश्चात पुरातत्व विभाग के दल ने सुदृढ सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत मस्जिद परिसर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय भूगर्भ का दृश्यांकन (वीडियो रिकॉर्डिंग) किया गया। वहां ‘संवत १२१३’ उत्कीर्णित (खोदी हुई) एक प्राचीन मूर्ति तथा अनेक स्तंभों पर पारंपरिक नक्काशी के अवशेष प्राप्त होने का दावा किया जा रहा है। तथापि, इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि पुरातत्व विभाग के अंतिम आधिकारिक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) के आधार पर ही भविष्य में विधिक (कानूनी) कार्रवाई निश्चित की जाएगी।
जामा मस्जिद ट्रस्ट ने दावे को अस्वीकार किया !
जामा मस्जिद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इन समस्त दावों को पूर्णतः अस्वीकार कर दिया है। उनका कहना है कि शासकीय अभिलेखों, वर्ष १९०७ के ‘राजपत्र’ (गैजेट) तथा वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों में मस्जिद का इतिहास स्पष्ट रूप से उल्लिखित है। ट्रस्ट ने कहा है कि वे धार्मिक भावनाओं को भडकाने वाले तथा अनावश्यक विवाद उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं।
पुरातत्व विभाग ने अवैध वजूखाना (नमाज से पूर्व हस्त-पाद प्रक्षालन का स्थान) हटाया !
इसी अवधि में पुरातत्व विभाग ने मस्जिद परिसर में बिना अनुमति के निर्मित अतिरिक्त ‘वजूखाना’ हटा दिया है। साथ ही, एक विवादित प्रवेश द्वार को मुद्रित (सील) कर दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संरक्षित स्मारकों से संबंधित नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
यह श्री चक्रधर स्वामी का जन्मस्थान है ! – महंत मुक्तानंद स्वामीइस प्रकरण में शंकराचार्य मठ के महंत मुक्तानंद स्वामी ने कहा कि इस शोध (खोज) से मेरे द्वारा पूर्व में किए गए दावों को बल मिला है। यह स्थान किसी समय जैन धर्म के ‘जैन समरी विहार’ के रूप में जाना जाता था, साथ ही इसे श्री चक्रधर स्वामी का जन्मस्थान भी माना जाता है। |

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