
‘कुछ लोग रात देर तक जागरण करते हैं और पुन: सवेरे भी शीघ्र उठते हैं । कभी-कभी यह ठीक है; परंतु सदैव ही ऐसा करने पर उसका शरीर पर गंभीर दुष्परिणाम हो सकता है । रात की नींद पूरी न हो, तो दिनभर नींद आती रहती है अथवा दोपहर को सोना पडता है । रात की नींद पूरी होना अत्यंत आवश्यक है । सामान्यत: प्रत्येक के लिए ६ से ८ घंटे, रात की नींद आवश्यक होती है । दिनभर में शरीर का जो क्षय होता है, उसकी भरपाई रात की नींद में होती है । यह नींद ठीक से न होने पर कालांतर में हृदयविकार, पक्षाघात का झटका आना, मधुमेह (डायबिटीज), अंतस्रावी ग्रंथियों (हार्माेन) के विकार, विस्मरण जैसे गंभीर रोग हो सकते हैं । साधना करने के लिए भी स्वस्थ रहना आवश्यक है । इसलिए प्रत्येक को अपनी दिनचर्या का नियोजन ऐसे करना चाहिए, जिससे रात की नींद पूर्ण हो ।’ – वैद्य मेघराज माधव पराडकर, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (५.९.२०२३)
लेखमाला के सर्व लेख एकत्रित पढने के लिए लिंक : bit.ly/ayusanatan_h
लिंक खोलने के लिए क्यू.आर. कोड स्कैन करें !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?