
रामनाथ देवस्थान – वास्तव में केवल मांसतक सीमित मूल ‘हलाल’ की इस्लामी संकल्पा को आज शाकाहारी पदार्थाें, औषधियों, चिकित्सालयों, इमारतों, उपाहारगृहों, पर्यटन क्षेत्र, जालस्थलों आदि प्रत्येक क्षेत्र में लागू की गई है । केवल विदेशी ही नहीं, अपितु ‘हल्दीराम’, ‘बिकानो’ जैसे शाकाहारी खाद्यपदार्थ बनानेवाले भारतीय प्रतिष्ठान भी हलाल प्रमाणित खाद्यपदार्थ ग्राहकों को बेच रहे हैं । हलाल पदार्थाें की मांग केवल १४ प्रतिशत मुसलमानों की होते हुए भी ये हलाल उत्पाद बहुसंख्यक हिन्दू, सीक्ख, जैन, बौद्ध, ईसाई आदि शेष ८६ प्रतिशत जनता पर थोपे जा रहे हैं ।

भारत में संविधान के द्वारा सभी को स्वतंत्रता प्रदान किया गया है; परंतु तब भी हिन्दुओं पर की जा रही हलाल की अनिवार्यता के विरुद्ध, साथ ही हलाल के नाम पर चलाई जा रही समानांतर अर्थव्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाना आवश्यक है । उस दृष्टि से पिछले एक वर्ष में बडे स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया गया, साथ ही इस जिहाद को रोकने के लिए संपूर्ण देश के हिन्दुत्वनिष्ठों, कानून के क्षेत्र में कार्यरत लोगों, साथ ही सामाजिक एवं व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों को लेकर विभिन्न राज्यों में ‘हलाल अनिवार्यताविरोधी क्रियान्वयन समिति’ का गठन किया जा रहा है । केवल यही न रुककर हलाल अर्थव्यवस्था के विरुद्ध अधिक तीव्र लडाई लडना आवश्यक है, ऐसा प्रतिपादन हिन्दू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य प्रवक्ता श्री. मोहन गौडा ने किया । वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव के पांचवें दिन (२०.६.२०२३ को) उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों को संबोधित करते हुए वे ऐसा बोल रहे थे ।
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