अवांछनीय कृत्यों के लिए ५ लाख रुपयों तक के दंड का प्रावधान

मुंबई – राज्य के रोगियों को उनके वैधानिक अधिकार प्रदान करने वाला, साथ ही आपातकालीन स्थिति में भर्ती होने वाले रोगियों से धन की मांग किए बिना प्राथमिक उपचार करना, तथा परीक्षणों एवं उपचारों की मूल्य सूची घोषित करना आदि बातें चिकित्सालयों के लिए अनिवार्य करने वाले ‘महाराष्ट्र चिकित्सा प्रतिष्ठान अधिनियम’ को पारित करने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है । इस विषय का विधेयक विधानमंडल में प्रस्तुत किया गया । राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर नियंत्रण रखने के लिए ‘राज्य चिकित्सा प्रतिष्ठान परिषद’ की स्थापना की जाएगी, ऐसी सूचना स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने दी ।
उन्होंने कहा,…
१. इस अधिनियम के अनुसार पंजीकरण के बिना कोई भी औषधालय अथवा चिकित्सालय संचालित करने पर प्रतिबंध है तथा किसी भी रोगी को धन के अभाव में उपचार से वंचित करने वाले चिकित्सालयों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी ।
२. निजी स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता लाना, रोगियों के आर्थिक शोषण को रोकना तथा चिकित्सा संस्थानों में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता बनाए रखना इस अधिनियम का उद्देश्य है ।
३. अधिनियम की परिधि में एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा आदि सभी चिकित्सा पद्धतियों के सभी निजी, धर्मार्थ तथा स्वायत्त संस्थानों के चिकित्सालय, परिचर्या गृह (नर्सिंग होम), औषधालय, डे-केयर केंद्र, डायग्नोस्टिक, विकृति विज्ञान प्रयोगशालाएं (पैथोलॉजी लैब), चिकित्सा प्रयोगशालाएं सम्मिलित की गई हैं तथा सैन्य चिकित्सालयों, मानसिक चिकित्सालयों एवं केंद्र एवं राज्य सरकारों के चिकित्सालयों को इससे मुक्त रखा गया है ।
४. प्रस्तावित अधिनियम में प्रत्येक चिकित्सालय के लिए चिकित्सालय के मुख्य भाग में उपचार, परीक्षणों तथा सेवाओं की मूल्य सूची मराठी, हिंदी तथा अंग्रेजी भाषाओं में प्रदर्शित करना तथा उसे जालपृष्ठ (वेबसाइट) पर प्रकाशित करना अनिवार्य किया गया है ।
५. निश्चित किए गए मूल्य से अधिक शुल्क लेने वाले अथवा रोगी को विस्तृत देयक (बिल) न देने वाले चिकित्सालयों पर वैधानिक कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है ।
६. अधिनियम के माध्यम से रोगियों को रोग का निदान, उपचार की रूपरेखा तथा अनुमानित व्यय की जानकारी, केसपेपर, उपचार का विवरण, तथा अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक का परामर्श लेने का वैधानिक अधिकार दिया गया है ।
७. चिकित्सालयों के पंजीकरण के लिए ‘पंजीकरण प्राधिकरण’ स्थापित किया जाएगा तथा प्रत्येक जिले के लिए स्वतंत्र पंजीकरण व्यवस्था होगी । प्राधिकरण को चिकित्सालयों का पंजीकरण निरस्त करने, निलंबित करने, तथा आर्थिक दंड लगाने का अधिकार दिया गया है ।
८. अधिनियम के अनुसार पंजीकरण के बिना चिकित्सालय संचालित नहीं किया जा सकेगा । ‘स्वर्ण घंटे’ (गोल्डन आवर) में निःशुल्क उपचार देना अनिवार्य किया गया है । स्वास्थ्य व्यवस्था पर नियंत्रण रखने एवं नियमन करने के लिए ‘राज्य चिकित्सा स्थापना परिषद’ की स्थापना का प्रावधान भी विधेयक में किया गया है ।
९. अवैध चिकित्सालयों, पैथोलॉजी, तथा भ्रामक (फर्जी) चिकित्सकों पर अंकुश लगाने के लिए ५ लाख रुपयों तक के दंड का प्रावधान किया गया है । अनधिकृत चिकित्सालय में कार्य करने वाले चिकित्सकों तथा कर्मचारियों को १ लाख रुपयों तक का दंड, तथा चिकित्सालय द्वारा जानकारी छिपाने अथवा असत्य जानकारी देने पर ५ लाख रुपयों तक के दंड का प्रावधान किया गया है ।
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