देश के मंदिरों के लिए एक स्वतंत्र ‘सनातन संरक्षण मंडल’ या समिति का गठन किया जाना चाहिए ! – Shankaracharya Sadanand Saraswati

श्रीराम मंदिर में दान की चोरी के संबंध में शंकराचार्य सदानंद सरस्वती की मांग

शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज

छिंदवाडा (मध्य प्रदेश) – भक्तों के कष्ट से प्राप्त धन तथा उनकी आस्था के साथ छेडछाड नहीं करनी चाहिए। न्यास से संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा कथित भ्रष्टाचार दु:खद है । सरकारी अधिकारी धार्मिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक व्यवस्थाओं का पर्याप्त ज्ञान नहीं रखते । इसलिए देश के मंदिरों के प्रबंधन एवं संरक्षण के लिए एक स्वतंत्र ‘सनातन संरक्षण मंडल‘ या समिति का गठन किया जाना चाहिए, जो मंदिरों के संचालन एवं सुरक्षा का निरीक्षण कर सके, ऐसा द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने यहां कहा ।

शंकराचार्यजी ने आगे कहा कि श्रीराम मंदिर में भक्तों ने कठिन परिश्रम से जुटाई हुई राशि श्रद्धा से दान के रूप में दी है, जिससे उसका सदुपयोग धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में हो सके । ऐसी स्थिति में जब दान की गई राशि के दुरुपयोग या चोरी जैसी घटनाए उजागर होती हैं तो अत्यंत वेदना होती है । जो लोग सनातन धर्म एवं भगवान के कार्य से संबंद्ध हैं, वही ऐसे दुषकृत्य करें तो वह अधिक पीडादायक है ।

मंडल या समिति में विशेषज्ञ सम्मिलित किए जाएं !

शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने परामर्श दिया कि देश भर के मंदिरों के प्रबंधन एवं संरक्षण हेतु बने मंडल या समिति में उस विषय के जानकार एवं अनुभवी व्यक्तियों का समावेश होना चाहिए । जिस व्यक्ति की किसी कार्य में विशेषज्ञता है, वही वह कार्य योग्य पद्धति से कर सकता है। किसी अन्य क्षेत्र के व्यक्ति से उसी स्तर की दक्षता की अपेक्षा नहीं की जा सकती । अधिकारियों को विधि, पूजा आदि का ज्ञान नहीं होता । उनमें न तो धार्मिक नैतिकता होती है एवं न ही आध्यात्मिक समझ। अत: जिस विषय का कोई विशेषज्ञ है, वही उसे दिया जाना चाहिए ।

धर्मांतरण को तुरंत रोका जाए !

धर्मांतरण के विषय पर शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि धर्मांतरण को तत्काल प्रतिबंधित किया जाना चाहिए; क्योंकि किसी भी देश में संख्या बल का विशेष महत्व होता है । जिसकी संख्या अधिक होगी, वही देश में शासन करेगा । इसी कारण से षड्यंत्र कर के धर्मांतरण एवं ‘लव जिहाद’ जैसे कार्य किए जा रहे हैं । यह अत्यंत चिंताजनक है । सरकार एवं समाज इस गंभीर विषय पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं, जबकि संत एवं शंकराचार्य लगातार जनजागरण कर लोगों को जागरूक कर रहे हैं । इन घटनाओं पर प्रतिबंध लगाने के लिए शासन को कठोर कानून बनाकर अपराधियों पर कडी कार्रवाई करनी चाहिए ।